Reuters के मुताबिक, चीनी AI कंपनी DeepSeek ने अपने नए V4 मॉडल का pre-release एक्सेस अमेरिकी चिप कंपनियों जैसे Nvidia और AMD को नहीं दिया। इसके बजाय उसने शुरुआती वर्जन घरेलू कंपनियों, खासकर Huawei, को दिया ताकि वे अपने चिप्स के हिसाब से सॉफ्टवेयर optimize कर सकें। यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका चीन पर advanced चिप्स को लेकर पाबंदियां लगा रहा है। माना जा रहा है कि चीन अब अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कम करके अपना AI और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम मजबूत करना चाहता है।
चीन ने टेक्नोलॉजी और ट्रेड के मुद्दे पर अपना रुख और सख्त कर दिया है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी AI कंपनी DeepSeek ने अपने अगले बड़े AI मॉडल की लॉन्चिंग से पहले अमेरिकी चिप कंपनियों को शुरुआती एक्सेस नहीं दिया।
बताया गया है कि DeepSeek ने अपने फ्लैगशिप मॉडल V4 का pre-release एक्सेस Nvidia और Advanced Micro Devices (AMD) जैसी कंपनियों को नहीं दिया। पहले DeepSeek, Nvidia की टेक्निकल टीम के साथ मिलकर काम करता था, लेकिन इस बार उसने अलग रास्ता चुना।
इसके उलट, DeepSeek ने अपने मॉडल का शुरुआती वर्जन घरेलू कंपनियों — खासकर Huawei Technologies — को पहले ही दे दिया। इससे चीनी चिप कंपनियों को अपने प्रोसेसर के हिसाब से सॉफ्टवेयर optimize करने का ज्यादा समय मिल गया।
यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका पिछले कुछ सालों से चीन को एडवांस सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी तक पहुंच सीमित करने की कोशिश कर रहा है। वॉशिंगटन का कहना है कि हाई-एंड AI चिप्स का इस्तेमाल सैन्य या निगरानी के लिए हो सकता है। वहीं, चीन इन पाबंदियों को अनुचित और ग्लोबल ट्रेड के लिए नुकसानदायक बताता रहा है।
DeepSeek पिछले साल तब चर्चा में आया जब उसने कम लागत वाला AI मॉडल लॉन्च किया, जिसने अमेरिकी कंपनियों के दबदबे को चुनौती दी। Hugging Face जैसे open-source प्लेटफॉर्म पर उसके मॉडल 75 मिलियन से ज्यादा बार डाउनलोड किए जा चुके हैं।
क्या अमेरिकी चिप्स का इस्तेमाल हुआ? एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने Reuters से कहा कि DeepSeek का नया मॉडल संभव है कि Nvidia के एडवांस Blackwell चिप्स से ट्रेन किया गया हो — और यह अमेरिकी export नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
अधिकारी ने यह भी कहा कि DeepSeek अमेरिकी चिप्स के इस्तेमाल के संकेत हटाकर सार्वजनिक रूप से Huawei हार्डवेयर का दावा कर सकता है। बड़ा संदेश क्या है? विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल इसका सीधा असर अमेरिकी कंपनियों पर सीमित हो सकता है।
लेकिन संकेत साफ है — चीन अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कम करना चाहता है और अपना AI व सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम मजबूत कर रहा है। कुल मिलाकर, DeepSeek का यह कदम सिर्फ बिजनेस फैसला नहीं, बल्कि टेक और ट्रेड की जंग में एक रणनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।
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