पुणे स्थित IUCAA (Inter-University Centre for Astronomy and Astrophysics) की अगुवाई में चल रहे MeerKAT Absorption Line Survey (MALS) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस सर्वे से इकट्ठा किए गए बहुत बड़े खगोलीय डेटा की एक कॉपी अब जर्मनी में भी सुरक्षित रखी गई है। इससे दुनिया के अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक इस डेटा का आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे।
पुणे स्थित IUCAA (Inter-University Centre for Astronomy and Astrophysics) की अगुवाई में चल रहे MeerKAT Absorption Line Survey (MALS) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस सर्वे से इकट्ठा किए गए बहुत बड़े खगोलीय डेटा की एक कॉपी अब जर्मनी में भी सुरक्षित रखी गई है। इससे दुनिया के अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक इस डेटा का आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे।
जर्मनी के गोरलिट्ज में स्थित Deutsches Zentrum für Astrophysik (DZA) ने MALS के डेटा का एक मिरर तैयार किया है। आसान भाषा में समझें तो मिरर का मतलब है कि असली डेटा की एक पूरी कॉपी दूसरे स्थान पर भी सुरक्षित रखी गई है। अगर भविष्य में किसी वजह से मुख्य डेटा तक पहुंचने में परेशानी होती है, तो जर्मनी में रखी गई कॉपी काम आ सकती है।
क्या है MALS सर्वे? MALS एक बड़ा रेडियो टेलीस्कोप सर्वे है। इसके जरिए वैज्ञानिक रेडियो तरंगों की मदद से ब्रह्मांड में मौजूद दूर-दराज की आकाशगंगाओं और गैस का अध्ययन करते हैं।
इस सर्वे में दक्षिण अफ्रीका में लगे MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने करीब 1,400 घंटे तक अंतरिक्ष की ओर देखा और इस दौरान लगभग 1. 5 पेटाबाइट डेटा इकट्ठा किया गया। 1.
5 पेटाबाइट बहुत बड़ी मात्रा है। इसे आसान तरीके से समझें तो यह इतना ज्यादा डेटा है कि इसे सामान्य कंप्यूटर या हार्ड ड्राइव में रखना आसान नहीं है। इसलिए इस डेटा को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिकों तक पहुंचाने के लिए खास सिस्टम की जरूरत होती है।
MALS ने साल 2025 के अंत तक अपनी तय की गई सभी अंतरिक्ष संबंधी ऑब्जर्वेशन पूरी कर ली थीं। अब इसका फोकस इकट्ठा किए गए डेटा से नई वैज्ञानिक जानकारियां हासिल करने पर है।
दुनिया भर के वैज्ञानिकों को मिलेगा फायदा जर्मनी में बनाए गए इस डेटा मिरर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वैज्ञानिकों को MALS के डेटा तक लंबे समय तक पहुंच मिलती रहेगी। MALS के प्रमुख वैज्ञानिक प्रोफेसर नीरज गुप्ता के मुताबिक, DZA का यह मिरर दुनिया भर के वैज्ञानिकों को इस विशाल डेटा से मिलने वाले वैज्ञानिक परिणामों तक लगातार पहुंच देने में मदद करेगा।
MALS के अब तक तीन बड़े पब्लिक डेटा रिलीज जारी किए जा चुके हैं। यानी इन आंकड़ों का एक हिस्सा वैज्ञानिकों के लिए सार्वजनिक किया जा चुका है। आने वाले समय में और भी डेटा जारी किया जाएगा।
अब UHF डेटा की बारी अब MALS का अगला बड़ा डेटा रिलीज UHF यानी Ultra High Frequency बैंड का होगा। इसमें 580 से 1,015 MHz तक की रेडियो फ्रीक्वेंसी का डेटा शामिल है।
इस डेटा की मदद से वैज्ञानिक अंतरिक्ष में मौजूद रेडियो स्रोतों को और बेहतर तरीके से देख पाएंगे। खासकर बहुत दूर स्थित आकाशगंगाओं का अध्ययन करने में मदद मिल सकती है। इससे वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि: आकाशगंगाओं का निर्माण और विकास कैसे हुआ।
गैस से नए तारे कैसे बनते हैं। ब्रह्मांड के शुरुआती समय में आकाशगंगाएं कैसी थीं। अंतरिक्ष में चुंबकीय क्षेत्र कैसे बनते और बदलते हैं। अलग-अलग आकाशगंगाओं में गैस की स्थिति कैसी है। यानी MALS का डेटा वैज्ञानिकों को सिर्फ दूर की चीजें देखने में ही मदद नहीं करेगा, बल्कि यह समझने में भी मदद कर सकता है कि ब्रह्मांड समय के साथ कैसे बदला।
अंतरिक्ष के चुंबकीय क्षेत्रों को समझने में भी मदद DZA के वैज्ञानिक अरित्र बसु के मुताबिक, केंद्र MALS के डेटा की मदद से रेडियो आकाश का एक बड़ा और विस्तृत नक्शा बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
इस नक्शे से वैज्ञानिक ब्रह्मांड में मौजूद चुंबकीय क्षेत्रों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। ये चुंबकीय क्षेत्र आकाशगंगाओं और अंतरिक्ष में होने वाली कई प्रक्रियाओं से जुड़े हुए हैं।
भविष्य के बड़े टेलीस्कोप के लिए भी महत्वपूर्ण जर्मनी में बनाया गया यह डेटा सिस्टम सिर्फ MALS के लिए ही उपयोगी नहीं है। यह भविष्य के बड़े रेडियो टेलीस्कोप प्रोजेक्ट्स के लिए भी मददगार हो सकता है।
इनमें Square Kilometre Array (SKA) जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। आने वाले समय में ऐसे टेलीस्कोप इतनी बड़ी मात्रा में डेटा तैयार करेंगे कि उसे संभालना अपने आप में एक बड़ी चुनौती होगी। MALS के 1.5 पेटाबाइट डेटा को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिकों तक पहुंचाने के लिए तैयार किया गया सिस्टम इस काम के लिए एक तरह का टेस्ट मॉडल भी बन सकता है।
आसान शब्दों में समझें MALS ने अंतरिक्ष से बहुत बड़ी मात्रा में डेटा इकट्ठा किया है। अब इस डेटा की एक कॉपी जर्मनी में भी सुरक्षित रखी गई है। इससे दुनिया के वैज्ञानिक इस डेटा का इस्तेमाल करके आकाशगंगाओं, गैस, तारों, चुंबकीय क्षेत्रों और ब्रह्मांड के शुरुआती दौर के बारे में नई जानकारी हासिल कर सकेंगे।
इस तरह MALS का काम सिर्फ अंतरिक्ष की तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं है। अब इन आंकड़ों से ब्रह्मांड के कई अनसुलझे सवालों के जवाब खोजने की कोशिश की जाएगी।
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