अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन हब का काम लगभग पूरा हो गया है। 2027 में ट्रेन का ट्रायल शुरू करने की तैयारी है, जबकि 2028 तक अहमदाबाद-मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने का लक्ष्य है। यह हब रेलवे, मेट्रो और बस सेवा से जुड़ा होगा, जिससे यात्रियों के लिए सफर आसान होगा।
अहमदाबाद में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए बन रहा मुख्य ट्रांजिट हब अब अपने आखिरी कामों में पहुंच गया है। यहां 2027 में ट्रेन का ट्रायल शुरू करने की तैयारी है और 2028 तक अहमदाबाद से मुंबई के बीच देश की पहली तेज रफ्तार ट्रेन सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर बन रहा यह बुलेट ट्रेन हब मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का अहम हिस्सा है। हब का सिविल काम लगभग पूरा हो चुका है और अब बाकी कामों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। इंजीनियरों के मुताबिक, ट्रायल रन के लिए भी तैयारी शुरू हो गई है।
इस ट्रेन सेवा की शुरुआत करीब 600 यात्रियों की क्षमता वाली ट्रेन से करने की योजना है। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर ट्रेन में धीरे-धीरे कोच बढ़ाए जाएंगे। जरूरत के हिसाब से इसमें कुल 10 कोच तक किए जा सकते हैं। इससे ज्यादा लोगों को एक साथ सफर करने की सुविधा मिलेगी।
रेलवे, मेट्रो और बस से जुड़ा होगा बुलेट ट्रेन हब अहमदाबाद का बुलेट ट्रेन हब इस तरह बनाया जा रहा है कि यात्रियों को दूसरे साधनों से आने-जाने में ज्यादा परेशानी न हो। यह हब अहमदाबाद मेट्रो और रेलवे स्टेशन के पास है। दोनों के बीच करीब 100 मीटर की दूरी है। हब से यात्री आगे मेट्रो, रेलवे और शहर की बस सेवा का इस्तेमाल कर सकेंगे। बस सेवा के लिए ग्राउंड फ्लोर पर सुविधा होगी। इस तरह एक ही जगह से अलग-अलग यातायात साधनों तक पहुंचना आसान होगा। अहमदाबाद में बन रहा यह स्टेशन मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का हिस्सा है। यह कॉरिडोर करीब 508 किलोमीटर लंबा है। तेज रफ्तार सेवा में अहमदाबाद और मुंबई के बीच सफर करीब 2 घंटे 5 मिनट में पूरा करने की योजना है। वहीं, रास्ते के सभी 12 स्टेशनों पर रुकने वाली ट्रेन को करीब 2 घंटे 56 मिनट लगेंगे।
भारतीय इंजीनियरों ने तैयार की खास क्रेन बुलेट ट्रेन परियोजना में भारतीय इंजीनियरों की बनाई एक खास क्रेन का भी इस्तेमाल हो रहा है। इसकी क्षमता 1,000 मीट्रिक टन तक भारी सामान उठाने की है। यह रिमोट से चलने वाली क्रेन है और फिलहाल सूरत और आनंद में काम कर रही है। इसका इस्तेमाल भारी गर्डर को यार्ड से उठाकर बुलेट ट्रेन की ऊंची पटरी तक पहुंचाने में किया जा रहा है। परियोजना से जुड़े इंजीनियरों के अनुसार, इस क्रेन के काम को देखकर करीब 80 देशों ने इसके लिए ऑर्डर दिए हैं।
सुरक्षा पर भी खास ध्यान बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में सुरक्षा को लेकर कई तरह के परीक्षण किए गए हैं। गुजरात में पहले आए भुज भूकंप को ध्यान में रखते हुए ट्रेन और पूरे कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था पर खास ध्यान दिया गया है। परियोजना अधिकारियों के अनुसार, भूकंप जैसी स्थिति में ट्रेन को कुछ ही सेकंड में रोका जा सकता है। सिस्टम को इस तरह तैयार किया गया है कि ऐसी स्थिति में ट्रेन और यात्रियों की सुरक्षा बनी रहे।
जापानी इंजीनियरों के साथ काम कर रहे भारतीय इंजीनियर इस परियोजना में भारत के साथ जापान के इंजीनियर भी काम कर रहे हैं। करीब 30 से 40 जापानी इंजीनियर भारतीय टीम के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस दौरान भारतीय इंजीनियरों ने समय पर काम पूरा करने, सही योजना बनाने और काम में अनुशासन रखने जैसे तरीकों को सीखा है। परियोजना में ट्रेन की देखभाल के लिए वर्कशॉप और दूसरी सुविधाएं भी तैयार की जा रही हैं। काम की जिम्मेदारियां साफ तौर पर तय की गई हैं। ट्रेन के सिग्नल और दूसरी व्यवस्था में समय का खास ध्यान रखा जाता है।
परियोजना से जुड़े इंजीनियरों ने बताया कि भारत और जापान के बीच इस काम से तकनीक के साथ-साथ लोगों के बीच भी जुड़ाव बढ़ा है। जापानी टीम के कुछ सदस्यों ने स्थानीय लोगों से बातचीत के लिए गुजराती और हिंदी भी सीखी।
फिलहाल अहमदाबाद बुलेट ट्रेन हब का काम अंतिम चरण में है। 2027 में ट्रायल रन की तैयारी की जा रही है और 2028 तक अहमदाबाद-मुंबई के बीच पहली हाई स्पीड ट्रेन सेवा शुरू करने का लक्ष्य बताया गया है।
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