शुक्र के बादलों में मौजूद बेहद तेजाबी वातावरण को जीवन के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। लेकिन MIT के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में पाया गया है कि peptides 98% concentrated sulfuric acid में भी स्थिर रह सकते हैं। शोध में कुछ peptides ने न सिर्फ अपनी संरचना बरकरार रखी, बल्कि बेहद कठोर acidic environment में खास 3D structure भी बनाए रखी। इससे शुक्र के बादलों में अलग तरह की life-supporting chemistry की संभावना पर वैज्ञानिकों का ध्यान गया है।
शुक्र के बादलों में मौजूद बेहद तेजाबी वातावरण को जीवन के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। लेकिन MIT के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में पाया गया है कि peptides 98% concentrated sulfuric acid में भी स्थिर रह सकते हैं।
शोध में कुछ peptides ने न सिर्फ अपनी संरचना बरकरार रखी, बल्कि बेहद कठोर acidic environment में खास 3D structure भी बनाए रखी। इससे शुक्र के बादलों में अलग तरह की life-supporting chemistry की संभावना पर वैज्ञानिकों का ध्यान गया है।
शुक्र के बादलों में जीवन की तलाश लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए चुनौती रही है। वहां sulfuric acid की मौजूदगी और पानी की बेहद कम मात्रा ऐसी परिस्थितियां बनाती है, जिन्हें पृथ्वी पर मौजूद जीवन के लिए बेहद प्रतिकूल माना जाएगा।
इसी सवाल को समझने के लिए Massachusetts Institute of Technology (MIT) की Sara Seager और Mei Hong की टीम ने छोटे peptide chains का अध्ययन किया। Peptides, amino acids से बने होते हैं और जीवित प्रणालियों में पाए जाने वाले कई महत्वपूर्ण molecules के building blocks माने जाते हैं।
वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि concentrated sulfuric acid peptide bonds को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन प्रयोग में peptides 98% sulfuric acid में भी टूटे नहीं। करीब दो सप्ताह तक NMR spectroscopy से उनकी जांच की गई और उनकी संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया।
सबसे दिलचस्प परिणाम एक peptide में देखने को मिला, जिसने sulfuric acid में Ω-loop जैसी 3D संरचना अपना ली। पानी में यही peptide अलग configuration में पाया गया था। यानी बेहद acidic वातावरण ने molecule को नष्ट करने के बजाय उसकी संरचना को स्थिर करने में भूमिका निभाई।
इसका एक संभावित कारण hydrolysis है। Peptide bonds के टूटने की इस प्रक्रिया में पानी की जरूरत होती है। शुक्र के बादलों जैसे लगभग water-free वातावरण में पानी की कमी peptide bonds के टूटने को सीमित कर सकती है। साथ ही, sulfuric acid molecules amino acid residues के साथ electrostatic interactions बनाकर peptide की संरचना को स्थिर कर सकते हैं।
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हालांकि, इस खोज का मतलब यह नहीं है कि Venus पर जीवन मौजूद है। यह केवल इतना संकेत देती है कि जीवन से जुड़ी chemistry के लिए पृथ्वी जैसी परिस्थितियां जरूरी होने की धारणा को और व्यापक नजरिए से देखने की जरूरत हो सकती है।
Astrobiologist Stuart Bartlett के अनुसार, ऐसे परिणाम sulfuric-acid-based biochemistry की संभावना पर आगे अध्ययन का रास्ता खोलते हैं। अब वैज्ञानिक यह जांचना चाहते हैं कि लंबे peptides और अलग-अलग amino acid sequences भी ऐसे वातावरण में कितने समय तक स्थिर रह सकते हैं।
अगर आगे के प्रयोगों में भी peptides की ऐसी ही स्थिरता सामने आती है, तो Venusian clouds, biomolecules और alien life की खोज के लिए वैज्ञानिकों को एक नई दिशा मिल सकती है।
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