बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम सरकार ने NEET पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी 116 FIR रद्द करने की मांग की है। राज्यों ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत राहत देने की अपील की है। इन मामलों के साथ दिल्ली की 13 FIR पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है।
बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम सरकार ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज 116 FIR रद्द करने की मांग की है। राज्यों ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत राहत देने की अपील की है।
NEET परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम सरकार ने अलग-अलग आवेदन देकर कुल 116 FIR को खत्म करने की मांग की है। इन राज्यों का कहना है कि 25 जुलाई को केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शन खत्म होने के बाद मामलों को वापस लेने की बात कही गई थी।
बिहार में सबसे ज्यादा 69 FIR बिहार सरकार ने 69 FIR रद्द करने की मांग की है। ये मामले 20 से 27 जुलाई 2026 के बीच राज्य के अलग-अलग जिलों और थानों में दर्ज किए गए थे।
इन मामलों में पटना के गांधी मैदान और कोतवाली थाने के साथ गोपालगंज टाउन, सिवान टाउन, जहानाबाद, कटिहार टाउन, मुजफ्फरपुर टाउन और बिहार शरीफ समेत कई जगहों के मामले शामिल हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि इन मामलों को आगे चलाने की जरूरत नहीं है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट से इन्हें रद्द करने की मांग की गई है।
महाराष्ट्र में 34 FIR का मामला महाराष्ट्र सरकार ने 34 FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ये मामले नागपुर, मुंबई, पुणे, जलगांव, बुलढाणा और अमरावती समेत कई शहरों से जुड़े हैं।
सरकार ने अपने आवेदन में कहा है कि 25 जुलाई को केंद्र की ओर से लिए गए फैसले के बाद वह इन मामलों में जांच या आगे की कार्रवाई जारी नहीं रखना चाहती। इसलिए इन FIR को खत्म करने की मांग की गई है।
इस तरह बिहार और महाराष्ट्र के मामलों को मिलाकर ही 103 FIR हो जाती हैं। बाकी मामले पश्चिम बंगाल और असम से जुड़े हैं।
पश्चिम बंगाल ने 8 FIR रद्द करने को कहा पश्चिम बंगाल सरकार ने 8 FIR खत्म करने की मांग की है। इनमें एक मामला एंटली पुलिस स्टेशन और सात मामले हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन से जुड़े हैं।
राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि अगर इन्हीं घटनाओं से जुड़े कोई दूसरे मामले बाद में सामने आते हैं, तो वह संबंधित लोगों को सुप्रीम कोर्ट से इसी तरह की राहत मांगने का विरोध नहीं करेगा।
पश्चिम बंगाल ने यह भी कहा है कि आवेदन में बताई गई घटनाओं को लेकर आगे कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
असम में 5 मामलों पर राहत की मांग असम सरकार ने 5 FIR रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया है। राज्य ने भी कहा है कि 25 जुलाई के केंद्र सरकार के फैसले के बाद वह इन मामलों की जांच या उन पर मुकदमा आगे नहीं बढ़ाना चाहता।
चारों राज्यों की मांग को मिलाकर कुल 116 FIR का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है। अब इन मामलों में आगे की कार्रवाई अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।
दिल्ली के 13 मामलों पर भी सुनवाई दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों से जुड़े 13 FIR को लेकर केंद्र सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दे चुकी है। केंद्र ने इन मामलों को रद्द करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का सहारा लिया है।
केंद्र ने 2,873 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक नई FIR दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है। सरकार का दावा है कि इन लोगों की गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि है।
केंद्र ने यह भी कहा है कि एक ही घटना से जुड़े मामलों में आगे कोई दूसरी FIR दर्ज नहीं की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ? इन सभी मामलों पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ सुनवाई कर रही है। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंगलवार को अदालत के सामने बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम की ओर से दायर आवेदनों का जिक्र किया। उन्होंने अनुरोध किया कि इन मामलों को केंद्र के आवेदन के साथ दोपहर 2 बजे सुना जाए।
अब सुप्रीम कोर्ट के सामने यह तय करना है कि छात्र प्रदर्शनों से जुड़े इन मामलों में अनुच्छेद 142 के तहत राहत दी जाए या नहीं। चार राज्यों की याचिकाएं सामने आने के बाद मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा है।
फिलहाल बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम की ओर से कुल 116 FIR रद्द करने की मांग अदालत के सामने है। इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आगे की कार्रवाई के लिए अहम होगा।
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