कई लोग माइग्रेन का दर्द शुरू होते ही कोई दर्द की दवा ले लेते हैं और दर्द कम होने पर अपनी दिनचर्या में वापस लौट जाते हैं। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो केवल हर बार दर्द को दबाना ही पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसे लोगों के लिए माइग्रेन की रोकथाम यानी Preventive Treatment भी एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है। हाल ही में American Academy of Neurology (AAN) और American Headache Society (AHS) ने वयस्कों में माइग्रेन की रोकथाम को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें पुराने उपचारों के साथ माइग्रेन को रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले नए विकल्पों को भी शामिल किया गया है।
कई लोग माइग्रेन का दर्द शुरू होते ही कोई दर्द की दवा ले लेते हैं और दर्द कम होने पर अपनी दिनचर्या में वापस लौट जाते हैं। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो केवल हर बार दर्द को दबाना ही पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसे लोगों के लिए माइग्रेन की रोकथाम यानी Preventive Treatment भी एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है।
हाल ही में American Academy of Neurology (AAN) और American Headache Society (AHS) ने वयस्कों में माइग्रेन की रोकथाम को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें पुराने उपचारों के साथ माइग्रेन को रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले नए विकल्पों को भी शामिल किया गया है।
माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द नहीं है माइग्रेन में सिरदर्द के साथ कई दूसरे लक्षण भी हो सकते हैं। तेज रोशनी या आवाज परेशान कर सकती है, जी मिचला सकता है या उल्टी हो सकती है। कुछ लोगों को चक्कर, देखने में बदलाव या ध्यान लगाने में परेशानी भी महसूस हो सकती है।
यही वजह है कि माइग्रेन को सामान्य सिरदर्द समझकर बार-बार नजरअंदाज करना सही नहीं है। अगर इसके कारण काम, पढ़ाई या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
दर्द होने पर ली जाने वाली दवा और बचाव की दवा अलग होती है माइग्रेन के इलाज को आसान भाषा में दो हिस्सों में समझ सकते हैं। Acute Treatment उस समय काम आता है जब माइग्रेन का अटैक शुरू हो चुका हो। इसका मकसद उस समय के दर्द और दूसरे लक्षणों को कम करना होता है।
वहीं Preventive Treatment का उद्देश्य आगे होने वाले माइग्रेन के हमलों को कम करना होता है। कुछ preventive medicines नियमित रूप से ली जाती हैं, जबकि कुछ injectable treatments महीने में एक बार या तीन महीने में एक बार दिए जा सकते हैं। यानी बात सिर्फ यह नहीं कि “दर्द हुआ तो क्या लें?” बल्कि यह भी हो सकती है कि “दर्द बार-बार हो ही न, इसके लिए क्या किया जा सकता है?”
किसे Preventive Treatment की जरूरत पड़ सकती है? हर माइग्रेन मरीज को preventive medicine की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को महीने में 4 या उससे ज्यादा दिन माइग्रेन या मध्यम से गंभीर सिरदर्द होता है, या माइग्रेन के कारण काम और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो डॉक्टर preventive treatment पर विचार कर सकते हैं।
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खासकर अगर बार-बार होने वाला माइग्रेन आपकी जिंदगी के जरूरी काम रोक रहा है, तो डॉक्टर से यह सवाल जरूर पूछा जा सकता है कि क्या मुझे माइग्रेन की रोकथाम के इलाज की जरूरत है?
Chronic Migraine को समझना भी जरूरी है अगर किसी व्यक्ति को महीने में 15 या उससे ज्यादा दिनों तक सिरदर्द होता है और इनमें कम से कम 8 दिन माइग्रेन जैसी विशेषताओं वाले होते हैं, तो इसे Chronic Migraine की श्रेणी में रखा जा सकता है।
इस तरह सिरदर्द कितनी बार होता है, इसकी जानकारी डॉक्टर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए माइग्रेन की समस्या वाले लोगों के लिए यह नोट करना उपयोगी हो सकता है कि महीने में कितने दिन सिरदर्द हुआ और वह कितना गंभीर था।
एक दवा काम न करे तो उम्मीद खत्म नहीं होती नई गाइडलाइन से मिलने वाली सबसे उपयोगी सीख यही है कि माइग्रेन की रोकथाम के लिए अब कई तरह के विकल्प मौजूद हैं। हर व्यक्ति पर एक ही दवा का असर समान नहीं होता। किसी दवा से फायदा कम हो सकता है या उसके side effects परेशान कर सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दूसरा विकल्प चुन सकते हैं। इसलिए “यह दवा काम नहीं कर रही, अब कुछ नहीं हो सकता” ऐसा मान लेना सही नहीं है।
दवा चुनते समय इन बातों का ध्यान रखा जाता है माइग्रेन की preventive medicine चुनते समय केवल उसकी effectiveness ही नहीं देखी जाती। डॉक्टर यह भी देख सकते हैं कि: दवा के side effects क्या हैं?
इसे कितनी बार लेना पड़ेगा? इसकी कीमत मरीज के लिए सुविधाजनक है या नहीं? मरीज को कोई दूसरी स्वास्थ्य समस्या तो नहीं है? क्या कोई ऐसी दवा है जो दूसरी समस्या में भी फायदा दे सकती है? यानी सही दवा हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है।
सबसे जरूरी सीख: माइग्रेन को सहना जरूरी नहीं अगर कभी-कभार सिरदर्द होता है और जल्दी ठीक हो जाता है, तो स्थिति अलग हो सकती है। लेकिन अगर माइग्रेन बार-बार लौट रहा है और आपकी जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो सिर्फ हर बार दर्द खत्म करने पर ध्यान देने के बजाय रोकथाम के विकल्पों के बारे में डॉक्टर से बात करना ज्यादा समझदारी हो सकती है।
नई गाइडलाइन की खास बात यही है कि माइग्रेन के इलाज के विकल्प अब पहले की तुलना में ज्यादा हैं। इसलिए एक इलाज से फायदा न मिलने पर डॉक्टर के साथ मिलकर दूसरा विकल्प तलाशा जा सकता है।
याद रखने वाली 3 बातें बार-बार माइग्रेन = डॉक्टर से सलाह लें।
सिर्फ दर्द खत्म करना ही इलाज नहीं, जरूरत पड़ने पर Prevention भी जरूरी हो सकता है। एक दवा काम न करे तो दूसरे विकल्प मौजूद हो सकते हैं।
नोट: यह जानकारी जागरूकता के उद्देश्य से है। माइग्रेन की कोई भी preventive medicine खुद से शुरू या बंद न करें। दवा का चुनाव डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार करते हैं।
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