प्रोस्टेट कैंसर कई बार शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं देता। ऐसे में उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार डॉक्टर से PSA टेस्ट और प्रोस्टेट स्क्रीनिंग को लेकर बातचीत करना बीमारी की समय पर पहचान में मदद कर सकता है। अमेरिकी पत्रकार Cal Thomas का अनुभव भी इसी बात की ओर ध्यान दिलाता है। उनके PSA स्तर में लगातार बढ़ोतरी हुई और आगे की जांच में प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि हुई।
प्रोस्टेट कैंसर कई बार शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं देता। ऐसे में उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार डॉक्टर से PSA टेस्ट और प्रोस्टेट स्क्रीनिंग को लेकर बातचीत करना बीमारी की समय पर पहचान में मदद कर सकता है।
अमेरिकी पत्रकार Cal Thomas का अनुभव भी इसी बात की ओर ध्यान दिलाता है। उनके PSA स्तर में लगातार बढ़ोतरी हुई और आगे की जांच में प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि हुई।
PSA टेस्ट क्या है? PSA यानी Prostate-Specific Antigen एक रक्त परीक्षण है, जिसका इस्तेमाल प्रोस्टेट से जुड़ी स्थिति का आकलन करने में मदद के लिए किया जाता है।
Cal Thomas के मामले में PSA करीब दो वर्षों तक बढ़ता रहा और 9.0 तक पहुंच गया। इसके बाद आगे की जांच और prostate biopsy की गई, जिसमें कैंसरयुक्त ट्यूमर की पुष्टि हुई।
हालांकि, PSA बढ़ना अपने आप में प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि नहीं करता। इसकी रिपोर्ट को डॉक्टर अन्य जांच और मरीज की स्थिति के साथ देखकर समझते हैं।
Gleason Score 9 का क्या मतलब है? Gleason Score प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं की बनावट और बीमारी की आक्रामकता का आकलन करने में इस्तेमाल किया जाता है। Cal Thomas के मामले में उनका Gleason score 9 था। इसके बाद डॉक्टरों ने उपचार के विकल्पों पर चर्चा की।
प्रोस्टेट कैंसर का इलाज कैसे होता है? मरीज की स्थिति के आधार पर प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के अलग-अलग विकल्प हो सकते हैं। Cal Thomas को दो प्रमुख विकल्प बताए गए थे—प्रोस्टेट ग्रंथि को हटाने की सर्जरी या रेडिएशन और हार्मोन उपचार।
उन्होंने रेडिएशन और हार्मोन उपचार का विकल्प चुना। उनके अनुसार, उन्हें 38 radiation treatments दिए गए और बाद में PSA शून्य तक पहुंच गया। दो वर्षों तक hormone drug लेने की योजना भी बताई गई। यह एक व्यक्ति का उपचार अनुभव है। हर मरीज के लिए इलाज का विकल्प कैंसर की स्थिति और स्वास्थ्य के आधार पर अलग हो सकता है। शुरुआती पहचान क्यों महत्वपूर्ण है?
खबर में American Cancer Society के आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार यदि प्रोस्टेट कैंसर प्रोस्टेट के बाहर नहीं फै ला है, तो 5-year relative survival rate 99% तक हो सकती है। इसीलिए बीमारी का समय पर पता चलना महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, किसी व्यक्ति का वास्तविक परिणाम कैंसर की अवस्था और अन्य स्वास्थ्य कारकों पर निर्भर करता है।
50 की उम्र के बाद क्या करें? 50 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों को अपने डॉक्टर से प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम और PSA screening के बारे में चर्चा करनी चाहिए। स्क्रीनिंग की जरूरत और समय व्यक्ति के जोखिम कारकों के अनुसार अलग हो सकता है।
खास तौर पर डॉक्टर से इन बातों पर चर्चा की जा सकती है: क्या PSA टेस्ट आपके लिए जरूरी है? आपके जोखिम के अनुसार जांच कितनी बार होनी चाहिए? परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास है या नहीं?
PSA बढ़ने पर आगे कौन-सी जांच की जरूरत पड़ सकती है? किन लोगों में जोखिम अधिक हो सकता है? प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम केवल उम्र पर निर्भर नहीं करता। खबर में बताया गया है कि Black men में प्रोस्टेट कैंसर होने और उससे मृत्यु का जोखिम White men तथा कुछ अन्य नस्लीय समूहों की तुलना में अधिक है।
पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर से स्क्रीनिंग को लेकर सलाह लेना इसलिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
पुरुषों को जांच टालनी क्यों नहीं चाहिए? प्रोस्टेट से जुड़ी जांच को लेकर झिझक या डर के कारण कई पुरुष डॉक्टर से संपर्क करने में देरी कर सकते हैं। लेकिन शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर डॉक्टर उपचार के विकल्पों पर समय रहते विचार कर सकते हैं।
PSA की एक रिपोर्ट देखकर खुद निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। बढ़ा हुआ PSA कई कारणों से हो सकता है और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अतिरिक्त जांच की सलाह देते हैं।
जरूरी बात 50 की उम्र कोई तय सीमा नहीं है कि हर पुरुष को उसी उम्र में PSA टेस्ट कराना ही चाहिए। स्क्रीनिंग कब और कितनी बार होनी चाहिए, यह व्यक्तिगत जोखिम पर निर्भर करता है। इसलिए डॉक्टर से अपनी स्थिति के अनुसार सलाह लेना बेहतर है। अगर पेशाब से जुड़ी परेशानी, खून, दर्द या कोई अन्य असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
निष्कर्ष Cal Thomas की कहानी का मुख्य संदेश है कि स्वास्थ्य जांच को टालना नहीं चाहिए और PSA जैसी जांच की जरूरत को लेकर डॉक्टर से समय पर बातचीत करनी चाहिए। प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने और इलाज की प्रक्रिया हर व्यक्ति में अलग हो सकती है, इसलिए किसी दूसरे मरीज के अनुभव को अपने लिए उपचार का आधार नहीं बनाना चाहिए।
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