क्या कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं सिर्फ हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा ही कम करती हैं, बल्कि डिमेंशिया से भी बचाव में मदद कर सकती हैं? करीब 15 साल तक चले एक बड़े अध्ययन में इसका संकेत मिला है। शोध के अनुसार, स्टैटिन लेने वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा करीब 10% कम पाया गया, जबकि जिन्हें अपेक्षाकृत जल्दी स्टैटिन शुरू की गई, उनमें यह कमी 15% तक थी।
क्या कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं सिर्फ हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा ही कम करती हैं, बल्कि डिमेंशिया से भी बचाव में मदद कर सकती हैं? करीब 15 साल तक चले एक बड़े अध्ययन में इसका संकेत मिला है। शोध के अनुसार, स्टैटिन लेने वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा करीब 10% कम पाया गया, जबकि जिन्हें अपेक्षाकृत जल्दी स्टैटिन शुरू की गई, उनमें यह कमी 15% तक थी।
1.32 लाख से ज्यादा लोगों पर हुई स्टडी डेनमार्क में हुए इस अध्ययन में 1,32,585 लोगों को शामिल किया गया। सभी लोगों को टाइप-2 डायबिटीज थी और 2006 से 2021 के बीच उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी गई।
इस दौरान करीब 2.7% लोगों में बाद में डिमेंशिया पाया गया। शोधकर्ताओं ने देखा कि स्टैटिन लेने वालों में डिमेंशिया का खतरा उन लोगों की तुलना में कम था, जो स्टैटिन नहीं ले रहे थे। पुरुषों और महिलाओं दोनों में इसका असर लगभग समान देखा गया। आखिर स्टैटिन दिमाग के लिए कैसे मदद कर सकती है?
स्टैटिन दवाएं खून में मौजूद LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करती हैं। LDL ज्यादा होने पर रक्त वाहिकाओं में प्लाक जमा हो सकता है, जिससे वे संकरी या कठोर हो सकती हैं और खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर मस्तिष्क तक रक्त की सप्लाई प्रभावित होती है, तो इससे मस्तिष्क के ऊतकों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना मस्तिष्क की सेहत के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
जल्दी स्टैटिन शुरू करने वालों में ज्यादा फायदा अध्ययन की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जल्दी स्टैटिन शुरू करने वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा करीब 15% कम पाया गया। वहीं, बाद में स्टैटिन शुरू करने वालों में यह कमी करीब 10% थी। इससे संकेत मिलता है कि समय पर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्या अब हर किसी को स्टैटिन लेनी चाहिए? नहीं। इस अध्ययन का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति डिमेंशिया से बचने के लिए स्टैटिन लेना शुरू कर दे। यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी थी। इसमें स्टैटिन लेने और डिमेंशिया के कम खतरे के बीच संबंध देखा गया है, लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि स्टैटिन सीधे तौर पर डिमेंशिया को रोकती हैं।
इसलिए स्टैटिन जैसी दवाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के साथ शारीरिक रूप से सक्रिय रहना और संतुलित भोजन करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। कुल मिलाकर, अध्ययन का संकेत साफ है—दिल और रक्त वाहिकाओं की सेहत का असर दिमाग की सेहत पर भी पड़ सकता है। स्टैटिन और डिमेंशिया के बीच इस संबंध को पूरी तरह समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
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