चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भविष्य में होने वाले मानव मिशनों के साथ पृथ्वी के सूक्ष्मजीव भी पहुंच सकते हैं। एक नए अध्ययन के अनुसार, चंद्रमा की कुछ बेहद ठंडी और अंधेरी जगहों पर कुछ बैक्टीरिया और फंगस सामान्य चंद्र सतह की तुलना में ज्यादा समय तक जीवित रह सकते हैं। चंद्रमा को आमतौर पर जीवन के लिए बेहद कठिन जगह माना जाता है। वहां लगभग कोई वायुमंडल नहीं है, तापमान में बहुत ज्यादा बदलाव होता है और सतह पर तेज पराबैंगनी विकिरण पहुंचता है। पानी भी बहुत सीमित मात्रा में उपलब्ध है।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भविष्य में होने वाले मानव मिशनों के साथ पृथ्वी के सूक्ष्मजीव भी पहुंच सकते हैं। एक नए अध्ययन के अनुसार, चंद्रमा की कुछ बेहद ठंडी और अंधेरी जगहों पर कुछ बैक्टीरिया और फंगस सामान्य चंद्र सतह की तुलना में ज्यादा समय तक जीवित रह सकते हैं। चंद्रमा को आमतौर पर जीवन के लिए बेहद कठिन जगह माना जाता है। वहां लगभग कोई वायुमंडल नहीं है, तापमान में बहुत ज्यादा बदलाव होता है और सतह पर तेज पराबैंगनी विकिरण पहुंचता है। पानी भी बहुत सीमित मात्रा में उपलब्ध है। फिर भी चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव वैज्ञानिकों के लिए खास है। यहां कई गहरे क्रेटर ऐसे हैं जहां सूर्य की रोशनी लगभग कभी नहीं पहुंचती। इन स्थायी रूप से छायादार क्षेत्रों में सतह के पास बर्फ मौजूद होने के प्रमाण मिले हैं। यही वजह है कि भविष्य के कई चंद्र मिशनों में इस इलाके पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इंसानों के साथ चंद्रमा तक पहुंच सकते हैं सूक्ष्मजीव मानव शरीर के अंदर और बाहर बड़ी संख्या में सूक्ष्मजीव मौजूद रहते हैं। अंतरिक्ष यात्री और उनके उपकरण इन सूक्ष्मजीवों को चंद्रमा तक पहुंचने से काफी हद तक रोक सकते हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह रोक पाना आसान नहीं है। मानव मिशन जितना लंबा होगा और अगर भविष्य में चंद्रमा पर रहने के लिए आवास बनाए जाते हैं, तो पृथ्वी के कुछ सूक्ष्मजीवों के चंद्र सतह तक पहुंचने की संभावना भी बढ़ सकती है। अंतरिक्ष यानों को कुछ वैज्ञानिक मिशनों में जैविक संदूषण कम करने के लिए विशेष तरीके से निष्फल किया जा सकता है। लेकिन इंसानों के साथ ऐसा करना संभव नहीं है। इसलिए मानव मिशनों से होने वाला माइक्रोबियल कंटैमिनेशन वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता बन सकता है। किस सूक्ष्मजीव की जीवित रहने की क्षमता ज्यादा मिली?
डॉ.
प्रबल सक्सेना और उनके सहयोगियों ने पहले किए गए प्रयोगों से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल कर तीन बैक्टीरिया और दो फंगस प्रजातियों के जीवित रहने की क्षमता का अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने इन सूक्ष्मजीवों की पराबैंगनी विकिरण (UV radiation) सहने की क्षमता की तुलना चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के अलग-अलग इलाकों में मिलने वाले विकिरण स्तर से की। इस अध्ययन में Aspergillus niger सबसे ज्यादा टिकाऊ प्रजाति के रूप में सामने आया। यह एक फंगस है, जिसे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भी पाया जा चुका है और अंतरिक्ष के कठिन वातावरण में इसके टिके रहने की क्षमता का पहले अध्ययन किया गया है। क्या चंद्रमा पर सूक्ष्मजीव फैल सकते हैं?
अध्ययन से यह संकेत नहीं मिलता कि ये सूक्ष्मजीव चंद्रमा पर तेजी से बढ़ेंगे या किसी बड़े क्षेत्र में फैल जाएंगे। चंद्रमा का वातावरण उनके लिए अभी भी बेहद कठिन है। अध्ययन के अनुसार, सबसे अनुकूल परिस्थितियों में भी A.
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niger कुछ इलाकों में करीब एक सप्ताह तक जीवित रह सकता है। ध्रुव से दूर ऐसे इलाकों में उसके जीवित रहने का समय और कम हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि चंद्रमा पर पृथ्वी के सूक्ष्मजीवों से कोई नया पारिस्थितिकी तंत्र बनने की आशंका है। कुछ सूक्ष्मजीव कठिन परिस्थितियों में निष्क्रिय अवस्था में रह सकते हैं, लेकिन उनके तेजी से बढ़ने और फैलने की संभावना बहुत कम है। वैज्ञानिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
चंद्रमा पर पहुंचने वाले सूक्ष्मजीवों का सबसे बड़ा असर वैज्ञानिक अनुसंधान पर पड़ सकता है। मान लीजिए कोई सूक्ष्मजीव किसी छायादार क्रेटर या बर्फ वाले इलाके तक पहुंचकर कुछ समय के लिए बच जाता है। बाद में अगर वैज्ञानिकों को वहां कोई जैविक या रासायनिक संकेत मिलता है, तो यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि वह प्राकृतिक रूप से मौजूद था या मानव मिशन के कारण वहां पहुंचा। यही वजह है कि चंद्र मिशनों में planetary protection यानी दूसरे खगोलीय पिंडों को पृथ्वी के जैविक प्रदूषण से बचाने पर ध्यान देना जरूरी माना जाता है। मंगल मिशनों के लिए भी अहम सबक चंद्रमा इस समस्या को समझने के लिए वैज्ञानिकों के लिए एक उपयोगी जगह हो सकता है। चंद्रमा पर स्थानीय जीवन मौजूद होने के प्रमाण नहीं हैं, इसलिए वहां मानव मिशनों से पहुंचे सूक्ष्मजीवों के प्रभाव को समझना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। भविष्य में जब इंसान मंगल पर जाएंगे, तब यह सवाल और भी महत्वपूर्ण होगा। अगर मंगल पर जीवन के संकेत मिलते हैं, तो वैज्ञानिकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे संकेत वास्तव में मंगल के हों और पृथ्वी से पहुंचे किसी सूक्ष्मजीव के कारण न बने हों। कुल मिलाकर, चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव सिर्फ पानी की बर्फ और भविष्य के मानव मिशनों के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। वहां मौजूद अंधेरे और बेहद ठंडे इलाके पृथ्वी से पहुंचे कुछ सूक्ष्मजीवों को सामान्य चंद्र सतह की तुलना में ज्यादा समय तक टिकने का मौका दे सकते हैं। इसलिए भविष्य के चंद्र अभियानों में वैज्ञानिक खोजों के साथ microbial contamination को रोकना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
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