दो अलग-अलग शोधों में कैंसर के दोबारा लौटने के खतरे और स्वस्थ कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को कम करने पर ध्यान भारत में कैंसर के इलाज को और बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक अलग-अलग तरीकों पर काम कर रहे हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) से जुड़े शोध संस्थानों में हुए दो अलग-अलग अध्ययनों में कैंसर के इलाज की दो बड़ी समस्याओं पर ध्यान दिया गया है। पहले शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उन खास कैंसर कोशिकाओं को पहचानने की कोशिश की गई है, जो इलाज के बाद भी शरीर में बच सकती हैं। दूसरे शोध में एक small-molecule candidate की जांच की गई है, जिसका मकसद दवा से जुड़े सक्रिय compounds को कैंसर कोशिकाओं तक ज्यादा सही तरीके से पहुंचाना है।
दो अलग-अलग शोधों में कैंसर के दोबारा लौटने के खतरे और स्वस्थ कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को कम करने पर ध्यान भारत में कैंसर के इलाज को और बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक अलग-अलग तरीकों पर काम कर रहे हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) से जुड़े शोध संस्थानों में हुए दो अलग-अलग अध्ययनों में कैंसर के इलाज की दो बड़ी समस्याओं पर ध्यान दिया गया है।
पहले शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उन खास कैंसर कोशिकाओं को पहचानने की कोशिश की गई है, जो इलाज के बाद भी शरीर में बच सकती हैं। दूसरे शोध में एक small-molecule candidate की जांच की गई है, जिसका मकसद दवा से जुड़े सक्रिय compounds को कैंसर कोशिकाओं तक ज्यादा सही तरीके से पहुंचाना है।
दोनों शोध अभी कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने की दिशा में किए जा रहे वैज्ञानिक काम का हिस्सा हैं। पहला शोध AI की मदद से कैंसर कोशिकाओं की पहचान पर पहला अध्ययन SN Bose National Centre for Basic Sciences के डॉ. शुभाशिस हलदार के नेतृत्व में किया गया। इसमें Ashoka University ने भी सहयोग किया।
इस शोध में वैज्ञानिकों का ध्यान cancer stem-like cells (CSCs) पर है। ये ट्यूमर के अंदर मौजूद कुछ खास कोशिकाएं होती हैं। इनकी संख्या सामान्य कैंसर कोशिकाओं की तुलना में कम हो सकती है और ये इलाज के प्रति ज्यादा मजबूत हो सकती हैं।
यही वजह है कि कैंसर के इलाज के दौरान ट्यूमर की कई कैंसर कोशिकाएं खत्म होने के बाद भी कुछ stem-like cells बच सकती हैं। इलाज के बाद बची कोशिकाएं क्यों चिंता की वजह हैं? कीमोथेरेपी जैसे इलाज कैंसर की बड़ी संख्या में कोशिकाओं को खत्म करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन कुछ cancer stem-like cells इलाज के बाद भी बच सकती हैं।
इन बची हुई कोशिकाओं की वजह से भविष्य में कैंसर के दोबारा लौटने का खतरा हो सकता है। ये कोशिकाएं कैंसर के शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैलने में भी भूमिका निभा सकती हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए शोधकर्ताओं ने AI आधारित एक framework तैयार करने की दिशा में काम किया है। इसका उद्देश्य ऐसी दुर्लभ cancer stem-like cells की पहचान करने में मदद करना है। AI से क्या फायदा हो सकता है?
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इस शोध में AI का इस्तेमाल खास तरह की कैंसर कोशिकाओं को पहचानने में मदद के लिए किया जा रहा है। अगर ऐसी कोशिकाओं को बेहतर तरीके से पहचाना जा सके, तो वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि इलाज के बाद कौन सी कोशिकाएं बच रही हैं। यह जानकारी भविष्य में कैंसर के दोबारा लौटने के खतरे को समझने में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि यह AI तरीका अभी मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने लगा है।
दूसरा शोध स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचाने पर दूसरा अध्ययन कैंसर के इलाज से जुड़ी एक और बड़ी समस्या पर ध्यान देता है। कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने के दौरान कई बार आसपास की स्वस्थ कोशिकाएं और ऊतक भी प्रभावित हो सकते हैं। इस शोध में एक small-molecule candidate की जांच की गई है। यह एक ऐसा candidate है, जिसमें कैंसर कोशिकाओं के अंदर चुनिंदा रूप से compounds को release करने की क्षमता देखी जा रही है।
इसका मकसद सक्रिय compounds को कैंसर कोशिकाओं तक ज्यादा लक्षित तरीके से पहुंचाना है, ताकि स्वस्थ ऊतकों पर होने वाले अनावश्यक असर को कम किया जा सके। इलाज को ज्यादा सटीक बनाने की कोशिश कैंसर के इलाज में यह कोशिश महत्वपूर्ण मानी जाती है कि उपचार का असर कैंसर कोशिकाओं पर ज्यादा हो और स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचे।
दूसरे अध्ययन में इसी दिशा में काम किया गया है। शोधकर्ता यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या small-molecule candidate की मदद से सक्रिय compounds को कैंसर कोशिकाओं तक ज्यादा सही तरीके से पहुंचाया जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस candidate का नाम, इसके विस्तृत परीक्षण के नतीजे या इंसानों पर इसके परीक्षण की स्थिति नहीं बताई गई है।
दोनों शोध का लक्ष्य क्या है? दोनों अध्ययनों में अलग-अलग समस्याओं पर काम किया गया है, लेकिन दोनों का बड़ा लक्ष्य कैंसर के इलाज को ज्यादा सटीक और बेहतर बनाने की कोशिश करना है। पहला शोध कैंसर के इलाज के बाद बची cancer stem-like cells को पहचानने और कैंसर के दोबारा लौटने के खतरे को समझने पर केंद्रित है।
दूसरा शोध कैंसर कोशिकाओं तक सक्रिय compounds को ज्यादा सही तरीके से पहुंचाने और स्वस्थ ऊतकों को होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में है।
अभी शोध के स्तर पर है काम इन दोनों अध्ययनों से कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने के लिए नई दिशा में काम होने की जानकारी मिलती है। लेकिन उपलब्ध सामग्री के आधार पर इन्हें अभी मरीजों के लिए तैयार इलाज नहीं कहा जा सकता। खासकर दूसरे शोध के small-molecule candidate के बारे में विस्तृत परीक्षण और मानव परीक्षण से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसके असर या भविष्य में इसके इस्तेमाल को लेकर कोई पक्का दावा करना सही नहीं होगा।
फिलहाल इन शोधों का महत्व इस बात में है कि वैज्ञानिक कैंसर की सिर्फ मुख्य कोशिकाओं को खत्म करने पर ही नहीं, बल्कि इलाज के बाद बचने वाली कोशिकाओं और स्वस्थ कोशिकाओं को होने वाले नुकसान जैसी समस्याओं पर भी काम कर रहे हैं।
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