Meta ने AI रेस में आगे बढ़ने के लिए AMD के साथ मल्टी-बिलियन डॉलर की बड़ी डील की है। इसके तहत AMD, Meta को छह गीगावॉट तक पावरफुल AI GPUs सप्लाई करेगा। इस खबर के बाद AMD के शेयर 6.5% तक चढ़ गए। Meta के CEO Mark Zuckerberg ने इसे लंबी अवधि की साझेदारी बताया। डील में Meta को भविष्य में AMD में हिस्सेदारी लेने का विकल्प भी मिला है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते अरबों डॉलर के खर्च के बीच यह समझौता टेक इंडस्ट्री में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अमेरिकी टेक दिग्गज Meta ने प्रोसेसर निर्माता AMD के साथ बड़ी डील की है। इस समझौते के तहत Meta, AMD से करोड़ों पावरफुल AI चिप्स खरीदेगा। दोनों कंपनियों ने मंगलवार को इस साझेदारी की घोषणा की। यह डील ऐसे समय में हुई है जब Meta, Google, OpenAI और Microsoft जैसी कंपनियों से जनरेटिव AI की रेस में मुकाबला कर रहा है।
2022 में ChatGPT के आने के बाद AI की दौड़ और तेज हो गई थी। हाल ही में Meta ने AMD के प्रतिद्वंद्वी Nvidia से भी बड़े पैमाने पर प्रोसेसर खरीदने की बात कही थी।
कितनी बड़ी है डील? AMD, Meta को छह गीगावॉट तक के ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) सप्लाई करेगा। ये चिप्स AI सिस्टम को चलाने के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। डील की सटीक रकम नहीं बताई गई, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कई अरब डॉलर (डबल डिजिट बिलियन डॉलर) की है।
घोषणा के बाद AMD के शेयर वॉल स्ट्रीट में 6.5% तक उछल गए। Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि यह AMD के साथ लंबी अवधि की साझेदारी की शुरुआत है, जिससे “इफिशिएंट AI इंफ्रास्ट्रक्चर” और पर्सनल सुपरइंटेलिजेंस को आगे बढ़ाया जाएगा।
Meta बन सकता है बड़ा शेयरहोल्डर इस डील के तहत AMD ने Meta को एक फाइनेंशियल ऑप्शन भी दिया है। अगर AMD आने वाले वर्षों में तय प्रदर्शन लक्ष्य हासिल करता है, तो Meta इस ऑप्शन को शेयर में बदल सकता है और कंपनी में बड़ा हिस्सेदार बन सकता है।
AI में अरबों डॉलर की रेस 2026 में अमेरिका की पांच बड़ी क्लाउड और AI कंपनियां — Microsoft, Alphabet, Amazon, Meta और Oracle — मिलकर 650 अरब डॉलर से ज्यादा का कैपिटल खर्च करने की योजना बना चुकी हैं। यह 2025 के मुकाबले लगभग दोगुना है। AMD इससे पहले अक्टूबर 2025 में OpenAI के साथ भी इसी तरह की मल्टी-बिलियन डॉलर डील कर चुका है।
क्या Meta का दांव जोखिम भरा है? कुछ निवेशकों का मानना है कि Meta का AI पर इतना बड़ा दांव थोड़ा जोखिम भरा है। Amazon, Microsoft और Google के पास अपना क्लाउड बिजनेस है, जिससे उन्हें AI से सीधा रेवेन्यू मिलता है।
Meta के पास क्लाउड सर्विस नहीं है, लेकिन कंपनी का कहना है कि AI की मदद से उसके डिजिटल एड्स बिजनेस में टार्गेटिंग बेहतर हो रही है, जिससे कमाई बढ़ रही है। Meta अपने प्लेटफॉर्म्स पर AI फीचर्स और AI कैरेक्टर्स भी लॉन्च कर रहा है।
हालांकि जनवरी में कंपनी ने कहा था कि वह किशोरों के लिए इन फीचर्स की पहुंच अस्थायी रूप से रोक रही है, ताकि प्रोडक्ट को और बेहतर बनाया जा सके।
कुल मिलाकर, Meta और AMD की यह डील AI इंडस्ट्री में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो आने वाले सालों में टेक दुनिया की दिशा तय कर सकती है।
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