प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निजी अंतरिक्ष कंपनियों और स्टार्ट-अप्स से भारत को दुनिया का बड़ा अंतरिक्ष केंद्र बनाने में मदद करने की अपील की। उन्होंने निवेश बढ़ाने, विदेशी प्रतिभाओं को भारत लाने और नई अंतरिक्ष तकनीक पर काम करने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को दुनिया के बड़े अंतरिक्ष देशों में शामिल करने के लिए निजी कंपनियों और स्टार्ट-अप्स से आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत में कम लागत, कुशल लोग और नए काम करने की क्षमता है, जिसका फायदा उठाकर देश अंतरिक्ष के कारोबार में अपनी जगह और मजबूत कर सकता है।
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री ने 20 निजी अंतरिक्ष कंपनियों के CEOs और संस्थापकों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में ऐसा माहौल बनना चाहिए, जहां दूसरे देशों के हुनरमंद लोग और निवेशक भी काम करने और पैसा लगाने के लिए आएं। उनका जोर भारतीय अंतरिक्ष कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को दुनिया भर की प्रतिभाओं के लिए पसंदीदा जगह बनाने पर रहा।
निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका भारत ने 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया था। इसके बाद इस क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्ट-अप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014 में देश में सिर्फ एक निजी अंतरिक्ष स्टार्ट-अप था, जबकि अब इनकी संख्या करीब 440 हो गई है।
Indian Space Policy 2023 के बाद भी निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने के रास्ते बढ़े हैं। अब कंपनियां उपग्रह, रॉकेट, अंतरिक्ष से जुड़ी सेवाओं और कई दूसरे कामों में आगे बढ़ रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों में भरोसा और लगातार एक जैसी नीति रहने से निजी कंपनियों को नए क्षेत्रों में पैसा लगाने का हौसला मिला है। इससे अंतरिक्ष क्षेत्र में नए कारोबार और नई तकनीक पर काम बढ़ा है।
निजी निवेश में बड़ा उछाल भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश भी तेजी से बढ़ा है। 2021-22 में करीब 100.5 मिलियन डॉलर का निजी निवेश हुआ था। 31 मार्च 2026 तक यह बढ़कर 618.5 मिलियन डॉलर हो गया।
इस साल अब तक करीब 187 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया है। यह बढ़ता निवेश दिखाता है कि निजी कंपनियां भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में कारोबार की अच्छी संभावनाएं देख रही हैं।
दुनिया के अंतरिक्ष उद्योग का आकार करीब 600 अरब डॉलर बताया गया है। भारत की मौजूदा हिस्सेदारी करीब 9 अरब डॉलर है। सरकार का लक्ष्य अगले दशक में इसे बढ़ाकर 40 से 45 अरब डॉलर तक ले जाना है।
सिर्फ रॉकेट लॉन्च तक सीमित नहीं कंपनियां भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियां अब केवल रॉकेट बनाने और लॉन्च करने तक काम नहीं करना चाहतीं। प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत में Skyroot Aerospace, Agnikul Cosmos, Pixxel, Dhruva Space और GalaxEye जैसी कंपनियों ने कई नए कामों की योजनाएं साझा कीं।
इन योजनाओं में अंतरिक्ष में खराब हो चुके उपग्रहों को हटाने के लिए रोबोटिक यान, अंतरिक्ष में ईंधन भरने और दो यानों को जोड़ने की तकनीक शामिल है। अंतरिक्ष में दवाएं बनाने पर भी काम की योजनाएं सामने आईं।
Skyroot Aerospace ने अपनी लॉन्च सेवाओं को आगे बढ़ाने और लॉन्च की संख्या बढ़ाने की योजना भी साझा की। इससे भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए दूसरे देशों के बाजारों में जाने के रास्ते बढ़ सकते हैं।
खेती समेत कई क्षेत्रों में होगा इस्तेमाल बैठक में अंतरिक्ष तकनीक के खेती और दूसरे क्षेत्रों में इस्तेमाल पर भी बात हुई। ग्राउंड-स्टेशन नेटवर्क, बेहतर रॉकेट तकनीक और अंतरिक्ष से मिलने वाली सेवाओं के जरिए नए कारोबारी मौके बनाने पर जोर दिया गया।
दूसरे देशों से मिल रहे काम, बढ़ता निवेश और सरकार की निर्यात को बढ़ावा देने वाली नीतियां भी निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए मददगार हो रही हैं। इससे भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी बाजारों में काम बढ़ाने की संभावना बन रही है।
भारत अब अंतरिक्ष क्षेत्र को सिर्फ सरकारी काम तक सीमित रखने के बजाय निजी कंपनियों, स्टार्ट-अप्स, निवेशकों, वैज्ञानिकों और दुनिया भर की प्रतिभाओं को साथ लाने पर जोर दे रहा है। कम लागत वाली अंतरिक्ष सेवाएं, बड़ी संख्या में कुशल लोग और निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी भारत के लिए इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका दे रही है।
सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को और बड़ा बनाना है। अगर निवेश और निजी कंपनियों की मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो भारत की अंतरिक्ष कंपनियों की दुनिया में मौजूदगी और मजबूत हो सकती है।
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