कैंसर का इलाज अक्सर इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि कई दवाएं कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ शरीर की कुछ स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसी समस्या को कम करने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नई संभावित दवा RK-251 विकसित की है। इस दवा की खासियत यह है कि इसे सामान्य दवाओं की तरह हर जगह सक्रिय रहने के बजाय कैंसर कोशिकाओं के अंदर मौजूद खास माहौल में सक्रिय होने के लिए डिजाइन किया गया है। इसी वजह से इसे ‘स्मार्ट’ कैंसर दवा कहा जा रहा है।
कैंसर का इलाज अक्सर इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि कई दवाएं कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ शरीर की कुछ स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसी समस्या को कम करने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नई संभावित दवा RK-251 विकसित की है। इस दवा की खासियत यह है कि इसे सामान्य दवाओं की तरह हर जगह सक्रिय रहने के बजाय कैंसर कोशिकाओं के अंदर मौजूद खास माहौल में सक्रिय होने के लिए डिजाइन किया गया है। इसी वजह से इसे ‘स्मार्ट’ कैंसर दवा कहा जा रहा है।
क्या है RK-251? RK-251 एक ऐसी संभावित कैंसर-रोधी दवा है जिसे prodrug के रूप में तैयार किया गया है। आसान भाषा में कहें तो यह दवा शरीर में पहुंचने के बाद तुरंत अपना पूरा असर शुरू नहीं करती।
यह कैंसर कोशिका के अंदर मौजूद एक खास रासायनिक संकेत का इंतजार करती है। जब उसे यह संकेत मिलता है, तो दवा का सक्रिय हिस्सा बाहर आता है और कैंसर कोशिका पर हमला करने लगता है। इस डिजाइन का मुख्य उद्देश्य यह है कि दवा का असर कैंसर कोशिकाओं पर ज्यादा और स्वस्थ कोशिकाओं पर कम हो।
कैंसर कोशिकाओं को कैसे पहचानती है? RK-251 के पीछे का विचार काफी दिलचस्प है। कैंसर कोशिकाओं में कई बार Reactive Oxygen Species यानी ROS का स्तर सामान्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक होता है।
वैज्ञानिकों ने इसी अंतर का फायदा उठाने की कोशिश की है। जब RK-251 ऐसी कोशिका में पहुंचती है जहां ROS ज्यादा मौजूद है, तो यह रासायनिक वातावरण दवा को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके बाद NBDHEX नाम का सक्रिय यौगिक मुक्त होता है।
यह यौगिक GSTP1 नाम के प्रोटीन को निशाना बनाता है। यह प्रोटीन कुछ कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने और उपचार के प्रति उनके प्रतिरोध से जुड़ा हुआ है।
यानी दवा का पूरा डिजाइन कुछ इस तरह काम करता है: कैंसर कोशिका → ज्यादा ROS → RK-251 सक्रिय → NBDHEX मुक्त → कैंसर पर असर
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ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर में दिखा असर वैज्ञानिकों ने RK-251 को triple-negative breast cancer (TNBC) की कोशिकाओं पर भी जांचा।
TNBC स्तन कैंसर का एक ऐसा प्रकार है जिसमें इलाज चुनौतीपूर्ण हो सकता है। शुरुआती प्रयोगों में RK-251 ने कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ प्रभाव दिखाया, जबकि सामान्य गैर-कैंसर कोशिकाओं पर इसका असर तुलनात्मक रूप से कम देखा गया।
शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि ROS की मौजूदगी में दवा की fluorescence में बदलाव आता है। इससे यह संकेत मिला कि दवा उस रासायनिक वातावरण में सक्रिय हो रही है, जिसके लिए उसे डिजाइन किया गया था।
Zebrafish पर भी हुई शुरुआती जांच इस दवा की शुरुआती जांच में वैज्ञानिकों ने zebrafish embryos यानी मछली के भ्रूणों का भी इस्तेमाल किया। इन प्रयोगों का उद्देश्य दवा की शुरुआती सुरक्षा और उसके जैविक प्रभावों को समझना था। उपलब्ध परिणामों में गंभीर तत्काल विषाक्तता के स्पष्ट संकेत नहीं मिले और दवा ने ROS की मौजूदगी में अपेक्षित प्रतिक्रिया दिखाई।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना बहुत जरूरी है। Zebrafish या लैब में अच्छे परिणाम मिलने का मतलब यह नहीं है कि दवा इंसानों के लिए भी सुरक्षित और प्रभावी साबित हो गई है। मानव शरीर कहीं ज्यादा जटिल होता है। इसलिए किसी भी नई दवा को मरीजों पर इस्तेमाल करने से पहले कई चरणों की जांच जरूरी होती है।
किसने विकसित की RK-251? RK-251 पर काम Institute of Advanced Study in Science and Technology (IASST) और IIT Guwahati के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है।
इस शोध का नेतृत्व IASST के डॉ. Asis Bala और IIT Guwahati के डॉ. K.P. Bhabak ने किया। इस शोध के निष्कर्ष Journal of Medicinal Chemistry में प्रकाशित हुए हैं।
क्या RK-251 अभी मरीजों को दी जा रही है? नहीं। यह बात सबसे महत्वपूर्ण है। RK-251 अभी शुरुआती यानी प्रीक्लिनिकल रिसर्च चरण में है। इसका मतलब है कि वैज्ञानिक अभी प्रयोगशाला और शुरुआती जैविक मॉडलों में इसकी क्षमता और सुरक्षा को समझ रहे हैं। इसे अभी कैंसर का प्रमाणित इलाज नहीं कहा जा सकता और न ही यह वर्तमान कीमोथेरेपी का विकल्प है।
आगे इसे इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल के अलग-अलग चरणों से गुजरना होगा। इन परीक्षणों में यह देखा जाएगा कि दवा इंसानों में कितनी सुरक्षित है, सही खुराक क्या होनी चाहिए, इसके क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं और क्या यह वास्तव में कैंसर के इलाज में प्रभावी है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज? RK-251 की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘सही जगह पर सक्रिय होने’ का विचार है। कैंसर के इलाज में वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसी दवाएं बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो कैंसर कोशिकाओं को ज्यादा निशाना बनाएं और स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचाएं।
अगर आगे के अध्ययनों में RK-251 सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो इस तरह की तकनीक भविष्य में कैंसर की ज्यादा लक्षित दवाएं बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि अभी इस खोज को लेकर उत्साहित होने के साथ-साथ सावधानी रखना भी जरूरी है। लैब में मिली सफलता और मरीजों के सफल इलाज के बीच कई चरण होते हैं।
फिलहाल RK-251 एक दिलचस्प और संभावनाओं वाली शुरुआती वैज्ञानिक खोज है। आने वाले मानव परीक्षण ही बताएंगे कि यह ‘स्मार्ट’ दवा वास्तव में कैंसर के इलाज में कितनी उपयोगी साबित होती है।
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