कांग्रेस की CWC बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम पर नाराजगी जताई। राहुल गांधी ने पार्टी के नेताओं की सक्रियता पर नजर रखने और इसकी नियमित रिपोर्ट तैयार करने को कहा। बैठक में छात्र आंदोलनों को लेकर राहुल गांधी और मनीष तिवारी के बीच भी अलग-अलग राय सामने आई।
कांग्रेस की CWC बैठक में पार्टी के नेताओं के काम करने के तरीके पर बात हुई। बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी में उनके कार्यक्रम के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में पार्टी के कई नेताओं ने खुलकर अपनी बात नहीं रखी।
इसके बाद राहुल गांधी ने पार्टी की सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत से कहा कि इस बात की जानकारी रखी जाए कि कौन से नेता पार्टी की बात को लोगों तक पहुंचा रहे हैं और कौन से नेता इसमें पीछे हैं। इसके लिए नियमित रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।
हल्द्वानी मामले पर खड़गे ने जताई नाराजगी CWC की बैठक में खड़गे ने हल्द्वानी की घटना का जिक्र किया। उनके कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम किया गया था। खड़गे इस बात से नाराज दिखे कि पार्टी के कई बड़े नेताओं ने इस मामले पर खुलकर आवाज नहीं उठाई।
बैठक में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि पार्टी पहले ही इस घटना की कड़ी निंदा कर चुकी है। इसके बावजूद खड़गे इससे पूरी तरह खुश नजर नहीं आए।
खड़गे ने कहा कि पार्टी के नेताओं को जरूरी मुद्दों पर सामने आना चाहिए। केवल कुछ नेताओं के बोलने से काम नहीं चलेगा।
राहुल गांधी ने मांगी नेताओं की रिपोर्ट खड़गे की बात के बाद राहुल गांधी ने सुप्रिया श्रीनेत से नेताओं की सक्रियता पर नजर रखने को कहा। अब यह देखा जाएगा कि पार्टी के बड़े मुद्दों पर कितने नेता सोशल मीडिया और दूसरे मंचों पर अपनी बात रख रहे हैं।
इससे यह भी पता चलेगा कि कौन नेता पार्टी के साथ खड़ा होकर मुद्दों को उठा रहा है और कौन नेता इन मामलों में ज्यादा सक्रिय नहीं है। बैठक में खड़गे ने कुछ वरिष्ठ नेताओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ नेता टीवी पर अच्छी तरह अपनी बात रखते हैं, लेकिन जब पार्टी के जरूरी मुद्दों की बात आती है तो वे उतनी मजबूती से सामने नहीं आते।
छात्र आंदोलनों पर राहुल गांधी और मनीष तिवारी में अलग राय CWC की बंद बैठक में छात्र आंदोलनों को लेकर भी चर्चा हुई। इस दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी की राय अलग नजर आई।
मनीष तिवारी ने कहा कि देश में बहुत कम छात्र आंदोलन ऐसे रहे हैं जिन्हें पूरी तरह छात्रों का अपना आंदोलन कहा जा सके। उन्होंने पुराने कई आंदोलनों का उदाहरण दिया।
तिवारी ने 1960 के दशक के तमिलनाडु के हिंदी-विरोधी आंदोलन का जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने उत्तर भारत में अंग्रेजी के इस्तेमाल को लेकर हुए छात्र विरोध, गुजरात के नवनिर्माण आंदोलन और बाद में हुए मंडल आंदोलन का भी उदाहरण दिया।
तिवारी का कहना था कि राजनीतिक दलों के छात्र संगठन इन आंदोलनों को आगे बढ़ाने में ज्यादा सफल नहीं रहे। इस पर राहुल गांधी ने अपनी अलग बात रखी। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक के आखिर और 1980 के दशक की शुरुआत में छात्र कांग्रेस के साथ थे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, CWC की बंद बैठक में यह तीसरा मौका था जब राहुल गांधी ने मनीष तिवारी की बात का सीधे विरोध किया।
बैठक के बाद तिवारी की पोस्ट चर्चा में CWC बैठक खत्म होने के बाद मनीष तिवारी ने मीडिया से बातचीत नहीं की। हालांकि, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट की। इसमें उन्होंने पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल का जिक्र किया।
तिवारी की इस पोस्ट को बैठक में हुई चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उनकी पोस्ट में बैठक का सीधा जिक्र नहीं था। पूरी बैठक से यह बात सामने आई कि कांग्रेस का नेतृत्व चाहता है कि पार्टी के नेता जरूरी मुद्दों पर ज्यादा सक्रिय रहें। पार्टी की बात को जनता तक पहुंचाने में सोशल मीडिया और दूसरे मंचों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है।
वहीं, छात्र आंदोलनों जैसे मुद्दों पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच अलग राय भी सामने आई है। नेताओं की सक्रियता पर नियमित रिपोर्ट बनाने की बात के बाद अब पार्टी के अंदर इस पर ज्यादा नजर रखी जा सकती है।
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