अमेरिका में हुए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि दिव्यांग पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए PSA टेस्ट कराने की दर, बिना दिव्यांगता वाले पुरुषों की तुलना में कम है। यह अंतर खास तौर पर उन पुरुषों में ज्यादा दिखाई दिया, जिन्हें चलने-फिरने या शरीर की गतिविधियों से जुड़ी दिव्यांगता है। अध्ययन के नतीजे JAMA Network Open में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने 2023 के Behavioral Risk Factor Surveillance System (BRFSS) के आंकड़ों का विश्लेषण किया।
अमेरिका में हुए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि दिव्यांग पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए PSA टेस्ट कराने की दर, बिना दिव्यांगता वाले पुरुषों की तुलना में कम है। यह अंतर खास तौर पर उन पुरुषों में ज्यादा दिखाई दिया, जिन्हें चलने-फिरने या शरीर की गतिविधियों से जुड़ी दिव्यांगता है।
अध्ययन के नतीजे JAMA Network Open में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने 2023 के Behavioral Risk Factor Surveillance System (BRFSS) के आंकड़ों का विश्लेषण किया।
55 से 69 साल के 10,508 पुरुषों पर अध्ययन इस अध्ययन में 55 से 69 साल की उम्र के 10,508 पुरुषों को शामिल किया गया। इनमें करीब 29.6 प्रतिशत पुरुषों ने कम से कम एक तरह की दिव्यांगता होने की जानकारी दी।
अध्ययन में कुल मिलाकर करीब 62.7 प्रतिशत पुरुषों ने बताया कि उन्होंने पहले कभी PSA टेस्ट कराया था। दिव्यांग पुरुषों में यह आंकड़ा 57.2 प्रतिशत रहा, जबकि बिना दिव्यांगता वाले पुरुषों में 65.1 प्रतिशत था। यानी दोनों समूहों के बीच PSA स्क्रीनिंग की दर में साफ अंतर देखा गया।
चलने-फिरने में परेशानी वाले पुरुषों में ज्यादा अंतर शोधकर्ताओं ने दिव्यांगता को छह तरह की श्रेणियों में देखा। इनमें चलने-फिरने, सोचने-समझने, सुनने, देखने, खुद की देखभाल करने और स्वतंत्र रूप से रहने से जुड़ी सीमाएं शामिल थीं।
जब शोधकर्ताओं ने अन्य सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कारकों को भी ध्यान में रखा, तो चलने-फिरने से जुड़ी दिव्यांगता और PSA स्क्रीनिंग की कम दर के बीच संबंध सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण रहा। दूसरी ओर, सोचने-समझने, देखने, सुनने और खुद की देखभाल से जुड़ी दिव्यांगताओं में भी PSA टेस्ट कराने की संभावना कम होने के संकेत मिले, लेकिन इन मामलों में अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं था।
डॉक्टर और मरीज के बीच बातचीत जरूरी अध्ययन के प्रमुख लेखक José I. Nolazco और उनकी टीम का कहना है कि डॉक्टरों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि दिव्यांग मरीज प्रोस्टेट कैंसर की जांच से लाभ नहीं उठा सकते। शोधकर्ताओं के अनुसार, PSA स्क्रीनिंग के फायदे और संभावित नुकसान पर हर मरीज से उसकी स्वास्थ्य स्थिति, जीवन प्रत्याशा और व्यक्तिगत पसंद को ध्यान में रखकर बातचीत की जानी चाहिए।
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अध्ययन में यह संभावना भी बताई गई है कि चिकित्सकीय पूर्वाग्रह इस अंतर का एक कारण हो सकता है। शोधकर्ताओं ने पहले के एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि कई डॉक्टरों ने दिव्यांग मरीजों को समान स्तर की स्वास्थ्य सेवा देने को लेकर आत्मविश्वास की कमी की बात कही थी।
क्या हर दिव्यांग पुरुष को PSA टेस्ट कराना चाहिए? अध्ययन ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं देता कि हर दिव्यांग पुरुष को PSA टेस्ट जरूर कराना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य दिव्यांगता और PSA स्क्रीनिंग की कम दर के बीच संबंध को सामने लाना था।
यह एक क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन था। इसलिए इससे यह साबित नहीं किया जा सकता कि दिव्यांगता ही कम PSA स्क्रीनिंग का कारण है। इसके अलावा, PSA टेस्ट और दिव्यांगता से जुड़ी जानकारी प्रतिभागियों ने खुद दी थी। ऐसे में पुरानी जानकारी याद करने में गलती होने की संभावना हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि BRFSS में जीवन प्रत्याशा से जुड़ी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए कुछ पुरुषों में कम स्क्रीनिंग होना उनकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर उचित भी हो सकता है। प्रोस्टेट कैंसर की जांच का फैसला कैसे होना चाहिए?
अध्ययन का मुख्य संदेश यह है कि सिर्फ दिव्यांगता के आधार पर किसी व्यक्ति को प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग से अलग नहीं किया जाना चाहिए। PSA टेस्ट कराने का फैसला मरीज की उम्र, स्वास्थ्य, जीवन प्रत्याशा, संभावित जोखिम और उसकी व्यक्तिगत पसंद को ध्यान में रखकर डॉक्टर और मरीज के बीच बातचीत के आधार पर किया जाना चाहिए। अध्ययन यह भी संकेत देता है कि दिव्यांग पुरुषों में कैंसर की रोकथाम और बीमारी की शुरुआती पहचान से जुड़ी संभावित असमानताओं को समझने और कम करने की जरूरत है।
निष्कर्ष नई स्टडी में दिव्यांग पुरुषों, खासकर चलने-फिरने से जुड़ी दिव्यांगता वाले पुरुषों में PSA स्क्रीनिंग की दर कम पाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अध्ययन से यह साबित नहीं होता कि दिव्यांगता कम स्क्रीनिंग का सीधा कारण है। इसलिए हर मरीज के लिए स्क्रीनिंग का फैसला उसकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति और पसंद के आधार पर डॉक्टर के साथ चर्चा करके किया जाना चाहिए।
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