भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए 405 रक्षा वस्तुओं के आयात पर चरणबद्ध रोक लगाने का फैसला किया है। इन वस्तुओं का देश में ही उत्पादन बढ़ाया जाएगा, जिससे भारतीय कंपनियों को करीब ₹3,070 करोड़ का कारोबार मिलने की उम्मीद है। यह कदम 2026 से 2029 के बीच लागू होगा और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगा।
भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी सामान पर निर्भरता कम करने के लिए 405 रक्षा वस्तुओं के आयात पर चरणबद्ध रोक लगाने का फैसला किया है। इन सामानों का अब धीरे-धीरे देश में ही उत्पादन किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे भारतीय कंपनियों के लिए करीब ₹3,070 करोड़ का कारोबार पैदा होगा।
नई सूची रक्षा मंत्रालय की छठी Positive Indigenisation List का हिस्सा है। इसमें लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, टैंक, बख्तरबंद वाहन और मिसाइलों से जुड़े कई जरूरी सामान और कलपुर्जे शामिल हैं।
इन रक्षा सामानों पर होगा असर नई सूची में Advanced Light Helicopter, Light Utility Helicopter, Su-30MKI, Light Combat Aircraft और AL-31FP Engine से जुड़े कई सामान शामिल हैं। इसके साथ ही T-72, T-90 और BMP-II जैसे टैंकों और बख्तरबंद वाहनों में इस्तेमाल होने वाले सामान भी सूची में रखे गए हैं।
युद्धपोतों और मिसाइल प्रणालियों से जुड़े कई सामान भी अब देश में बनाने की दिशा में काम होगा। इनमें Konkurs-M, Invar और MRSAM जैसी मिसाइल प्रणालियों के लिए जरूरी सामान शामिल हैं। सूची में रडार, सोनार, फायर कंट्रोल सिस्टम, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और हाई-एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक एम्युनिशन से जुड़े सामान भी हैं। इन सामानों का इस्तेमाल भारतीय सेना और दूसरे रक्षा बलों की अलग-अलग जरूरतों में होता है।
2026 से 2029 तक होगा बदलाव रक्षा मंत्रालय ने हर सामान के लिए देश में बनाने की एक समय सीमा तय की है। यह समय सीमा दिसंबर 2026 से दिसंबर 2029 तक है। जब किसी सामान का देश में सफल उत्पादन शुरू हो जाएगा, तो उसकी खरीद भारतीय कंपनियों से की जाएगी।
नई सूची की 389 वस्तुएं अभी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां आयात करती हैं। वहीं 16 वस्तुएं भारतीय तटरक्षक बल से जुड़ी हैं। इससे पहले जारी की गई पांच सूचियों में 5,012 वस्तुएं शामिल की गई थीं और इनमें से कई का देश में उत्पादन शुरू हो चुका है।
2020 से आयात कम करने पर जोर भारत ने साल 2020 से रक्षा सामान के मामले में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। पांच Positive Indigenisation Lists के जरिए अब तक 509 प्रमुख रक्षा वस्तुओं और प्लेटफॉर्म को आयात रोक के दायरे में लाया जा चुका है।
इनमें लड़ाकू विमान, युद्धपोत, हेलीकॉप्टर, तोप, मिसाइल, विध्वंसक युद्धपोत, क्रूज मिसाइल, हल्के टैंक, मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम जैसी बड़ी रक्षा प्रणालियां शामिल हैं।
रक्षा उत्पादन बढ़ाने की तैयारी सरकार देश में रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है। घरेलू खरीद के लिए अलग बजट रखने, रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने और कारोबार को आसान बनाने जैसे फैसले भी इसी दिशा में हैं।
SIPRI की मार्च में जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2016-20 की तुलना में 2021-25 के दौरान भारत के हथियार आयात में 4 प्रतिशत की कमी आई है। इसके बावजूद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य सामान आयात करने वाला देश है। दुनिया के कुल हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत है।
सरकार ने 2029-30 तक देश में ₹3 लाख करोड़ का रक्षा उत्पादन और ₹50,000 करोड़ का रक्षा निर्यात करने का लक्ष्य रखा है। 405 रक्षा वस्तुओं पर चरणबद्ध आयात रोक इसी योजना का हिस्सा है। इसका मकसद भारतीय कंपनियों को ज्यादा काम देना, देश में नए निवेश और तकनीक को बढ़ावा देना और रक्षा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करना है।
भारत रक्षा आयात प्रतिबंध, 405 रक्षा वस्तुएं, रक्षा उत्पादन, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, आत्मनिर्भर भारत, रक्षा मंत्रालय Bharat raksha aayat pratibandh, 405 raksha vastuen, raksha utpadan, swadeshi raksha utpadan, Atmanirbhar Bharat भारत 405 रक्षा वस्तुओं पर आयात प्रतिबंध, 2026 रक्षा वस्तुओं का स्वदेशी उत्पादन, India 405 defence items import ban भारत समाचार, रक्षा समाचार, रक्षा मंत्रालय, रक्षा उत्पादन, आत्मनिर्भर भारत, रक्षा उद्योग NetGramNews
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI. इस लेख में इस्तेमाल की गई तस्वीरें सिर्फ समझाने के लिए हैं। कुछ तस्वीरों को AI की मदद से एडिट किया गया है।
Published by: Ishrat. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.