नई स्टडी में सामने आया है कि खान-पान की कुछ आदतें क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से जुड़े वैश्विक बोझ में अहम भूमिका निभा रही हैं। इनमें सबसे प्रमुख कम फल और सब्जियां खाना तथा ज्यादा सोडियम यानी नमक का सेवन है। अध्ययन में 1990 से 2021 तक 204 देशों और क्षेत्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। क्रॉनिक किडनी डिजीज यानी CKD में समय के साथ किडनी की काम करने की क्षमता कम होती जाती है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। नई स्टडी ने यह समझने की कोशिश की कि डाइट से जुड़े जोखिमों का CKD के वैश्विक बोझ पर कितना असर है।
नई स्टडी में सामने आया है कि खान-पान की कुछ आदतें क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से जुड़े वैश्विक बोझ में अहम भूमिका निभा रही हैं। इनमें सबसे प्रमुख कम फल और सब्जियां खाना तथा ज्यादा सोडियम यानी नमक का सेवन है। अध्ययन में 1990 से 2021 तक 204 देशों और क्षेत्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
क्रॉनिक किडनी डिजीज यानी CKD में समय के साथ किडनी की काम करने की क्षमता कम होती जाती है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। नई स्टडी ने यह समझने की कोशिश की कि डाइट से जुड़े जोखिमों का CKD के वैश्विक बोझ पर कितना असर है।
कम फल खाना सबसे बड़ा आहार जोखिम शोधकर्ताओं ने Global Burden of Disease (GBD) Study 2021 के आंकड़ों के आधार पर CKD से जुड़े अलग-अलग आहार जोखिमों का अध्ययन किया। 2021 में दुनियाभर में डाइट से जुड़े CKD का उम्र-मानकीकृत DALY रेट 93.52 प्रति 1 लाख आबादी रहा, जबकि 1990 में यह 84.12 था।
इन आहार जोखिमों में सबसे बड़ा योगदान कम फल खाने का रहा। कम फल खाने से जुड़ा DALY रेट 38.68 प्रति 1 लाख था। इसके बाद कम सब्जियों का सेवन 30.84 प्रति 1 लाख और ज्यादा सोडियम का सेवन 19.81 प्रति 1 लाख रहा। इससे पता चलता है कि CKD से जुड़े आहार जोखिमों में सिर्फ नमक ही नहीं, बल्कि फल और सब्जियों की कमी भी महत्वपूर्ण है।
पूरी डाइट की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण अध्ययन में समय के साथ कम साबुत अनाज खाने से जुड़े CKD बोझ में भी बढ़ोतरी देखी गई। इसके अलावा प्रोसेस्ड मीट, रेड मीट और मीठे पेय पदार्थों से जुड़े जोखिम भी बढ़े।
इसका मतलब यह है कि CKD के जोखिम को केवल नमक के सेवन तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। खाने में फल, सब्जियां और साबुत अनाज की पर्याप्त मात्रा तथा प्रोसेस्ड मीट और मीठे पेय पदार्थों का सीमित सेवन भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
65 साल की उम्र के बाद बढ़ा बोझ स्टडी के मुताबिक, डाइट से जुड़े CKD का बोझ उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता गया। खासकर 65 वर्ष की उम्र के बाद DALY रेट में तेज बढ़ोतरी देखी गई।
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95 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में कम फल खाने से जुड़े DALY रेट पुरुषों में 920.46 और महिलाओं में 840.16 प्रति 1 लाख तक पहुंच गए। कुल मिलाकर पुरुषों में आहार से जुड़े CKD बोझ की दर महिलाओं की तुलना में ज्यादा रही।
Central Sub-Saharan Africa में सबसे ज्यादा बोझ अध्ययन में अलग-अलग क्षेत्रों के बीच भी बड़ा अंतर सामने आया। Central Sub-Saharan Africa में आहार से जुड़े CKD का कुल DALY रेट 229.23 प्रति 1 लाख था, जो अध्ययन में सबसे ज्यादा रहा। इसके मुकाबले Eastern Europe में यह दर 38.27 प्रति 1 लाख थी। यानी दोनों क्षेत्रों के बीच आहार से जुड़े CKD बोझ में करीब छह गुना अंतर देखा गया।
कम और ज्यादा आय वाले क्षेत्रों में अलग जोखिम अध्ययन के अनुसार, अलग-अलग आय वाले क्षेत्रों में CKD से जुड़े आहार जोखिम भी अलग दिखाई दिए। कम SDI वाले क्षेत्रों, खासकर सब-सहारा अफ्रीका में, फल, सब्जियों और साबुत अनाज की कम मात्रा तथा ज्यादा सोडियम का सेवन प्रमुख जोखिमों में रहा। इसका संबंध खास तौर पर हाई ब्लड प्रेशर के कारण होने वाले CKD से देखा गया।
वहीं, उच्च SDI वाले क्षेत्रों में प्रोसेस्ड मीट, रेड मीट और मीठे पेय पदार्थों से जुड़े जोखिम ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाई दिए। इन क्षेत्रों में डाइट से जुड़े CKD बोझ का एक बड़ा हिस्सा टाइप-2 डायबिटीज से जुड़ा पाया गया।
कुछ क्षेत्रों में हाई सोडियम का जोखिम बढ़ा High-income North America में 1990 से 2021 के बीच हाई सोडियम से जुड़े CKD बोझ में 188.63 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी अवधि में हाई शुगर-स्वीटेंड बेवरेज से जुड़े बोझ में 181.85 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
इसके उलट High-income Asia Pacific में अध्ययन किए गए सभी आहार जोखिमों में कमी देखी गई। इस क्षेत्र में हाई सोडियम से जुड़े CKD बोझ में 51.46 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
CKD की रोकथाम में डाइट की भूमिका CKD का संबंध डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों से है। ये दोनों स्वास्थ्य समस्याएं खान-पान और जीवनशैली से भी प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए CKD के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए रोकथाम पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो सकता है।
स्टडी के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि फल, सब्जियों और साबुत अनाज का पर्याप्त सेवन तथा ज्यादा सोडियम, प्रोसेस्ड मीट, रेड मीट और मीठे पेय पदार्थों से सावधानी CKD की रोकथाम की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
हालांकि, यह अध्ययन किसी व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत डाइट प्लान नहीं देता। CKD वाले व्यक्ति के लिए खान-पान में बदलाव बीमारी की स्थिति और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के अनुसार अलग हो सकते हैं।
अलग क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति की जरूरत अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि CKD का आहार संबंधी बोझ हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं है। कम आय वाले क्षेत्रों में पौष्टिक खाद्य पदार्थों की कमी और ज्यादा सोडियम प्रमुख चिंता हो सकती है, जबकि ज्यादा आय वाले क्षेत्रों में प्रोसेस्ड मीट और मीठे पेय पदार्थों से जुड़े जोखिम अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसलिए CKD का बोझ कम करने के लिए क्षेत्र, आय और स्थानीय खान-पान की परिस्थितियों के अनुसार पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियां तैयार करना जरूरी हो सकता है।
अध्ययन की कुछ सीमाएं भी हैं। इसमें शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा, धूम्रपान और दवाओं के इस्तेमाल जैसे गैर-आहार जोखिमों के साथ संभावित आपसी प्रभावों को पूरी तरह शामिल नहीं किया गया। इसलिए CKD में आहार की वास्तविक भूमिका इन आंकड़ों से कुछ अलग हो सकती है।
कुल मिलाकर, स्टडी में कम फल और सब्जियों का सेवन तथा ज्यादा सोडियम को वैश्विक स्तर पर CKD से जुड़े प्रमुख आहार जोखिमों में बताया गया है। साथ ही प्रोसेस्ड मीट, रेड मीट और मीठे पेय पदार्थों से जुड़े जोखिम भी कई क्षेत्रों में बढ़ते दिखाई दिए हैं।
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