वैज्ञानिकों ने एक नई संभावना पर चर्चा की है कि सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास मौजूद धूल और गैस की विशाल डिस्क भी ग्रह निर्माण का केंद्र हो सकती हैं। Active Galactic Nuclei (AGN) में मौजूद ये डिस्क करोड़ों ग्रह जैसे पिंडों के निर्माण के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकती हैं। आमतौर पर माना जाता है कि ग्रहों का जन्म युवा तारों के चारों ओर मौजूद गैस और धूल की प्रोटोप्लानेटरी डिस्क में होता है। लेकिन नए कंप्यूटर मॉडल संकेत देते हैं कि आकाशगंगाओं के केंद्र में मौजूद सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास की धूल भरी डिस्क भी ग्रह निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं।
वैज्ञानिकों ने एक नई संभावना पर चर्चा की है कि सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास मौजूद धूल और गैस की विशाल डिस्क भी ग्रह निर्माण का केंद्र हो सकती हैं। Active Galactic Nuclei (AGN) में मौजूद ये डिस्क करोड़ों ग्रह जैसे पिंडों के निर्माण के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकती हैं।
आमतौर पर माना जाता है कि ग्रहों का जन्म युवा तारों के चारों ओर मौजूद गैस और धूल की प्रोटोप्लानेटरी डिस्क में होता है। लेकिन नए कंप्यूटर मॉडल संकेत देते हैं कि आकाशगंगाओं के केंद्र में मौजूद सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास की धूल भरी डिस्क भी ग्रह निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं।
ब्लैक होल के आसपास कैसे बन सकते हैं ग्रह सुपरमैसिव ब्लैक होल के चारों ओर गैस, धूल और ऊर्जा से भरा विशाल क्षेत्र होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस क्षेत्र में मौजूद छोटे धूल कण समय के साथ आपस में जुड़ सकते हैं और बड़े समूह बना सकते हैं। गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से ये समूह आगे चलकर बड़े खगोलीय पिंडों में बदल सकते हैं।
इस प्रक्रिया को streaming instability से जोड़ा गया है। इसमें अंतरिक्ष में मौजूद धूल एक जगह जमा होकर ऐसे क्षेत्र बना सकती है, जहां नए ग्रहों या बड़े पिंडों के बनने की शुरुआत हो सकती है।
ग्रहों से लेकर तारों तक बन सकते हैं बड़े पिंड शोधकर्ताओं का अनुमान है कि AGN डिस्क में बड़ी संख्या में ग्रह जैसे पिंड मौजूद हो सकते हैं। इनमें से कुछ पिंड इतने विशाल हो सकते हैं कि वे सुपर-जुपिटर यानी बृहस्पति से भी बड़े गैसीय ग्रह बन जाएं।
कुछ बेहद बड़े पिंडों में इतना अधिक द्रव्यमान जमा हो सकता है कि उनमें हाइड्रोजन जलने की प्रक्रिया शुरू हो जाए और वे तारे का रूप ले सकें। इससे ग्रह निर्माण और तारा निर्माण के बीच की सीमा को नए तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।
ब्रह्मांड में तारे बनने की नई संभावना अब तक वैज्ञानिकों का मुख्य विचार था कि तारे बड़े गैस बादलों के गुरुत्वीय पतन से बनते हैं। लेकिन AGN मॉडल एक अलग प्रक्रिया की ओर संकेत करता है, जिसमें छोटे धूल कणों से शुरुआत होकर बड़े पिंड बन सकते हैं और आगे चलकर वे बहुत विशाल खगोलीय वस्तुओं में बदल सकते हैं।
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इस प्रक्रिया को bottom-up star formation यानी नीचे से ऊपर की ओर होने वाला तारा निर्माण कहा जा रहा है। ब्लैक होल और गुरुत्वीय तरंगों से संबंध यदि AGN डिस्क में बने बड़े पिंड समय के साथ ब्लैक होल की ओर बढ़ते हैं, तो वे आपस में टकरा सकते हैं। ऐसे टकराव से पैदा होने वाली gravitational waves को भविष्य की अंतरिक्ष वेधशालाएं जैसे LISA (Laser Interferometer Space Antenna) पहचान सकती हैं।
यह खोज ब्रह्मांड में ग्रहों, तारों और ब्लैक होल के निर्माण की प्रक्रियाओं को समझने के लिए एक नया रास्ता खोल सकती है। इससे यह संभावना भी बढ़ती है कि ग्रह निर्माण केवल तारों के आसपास ही नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के अन्य अत्यधिक ऊर्जा वाले क्षेत्रों में भी हो सकता है।
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