भारत में बैंकिंग से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है। राज्यसभा ने एक बिल पास किया है, जिसके बाद डिजिटल बैंक रिकॉर्ड को कानूनी सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसका फायदा ऑनलाइन बैंकिंग, UPI और डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों को मिल सकता है।
भारत में बैंकिंग से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है। राज्यसभा ने एक बिल पास किया है, जिसके बाद डिजिटल बैंक रिकॉर्ड को कानूनी सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसका फायदा ऑनलाइन बैंकिंग, UPI और डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों को मिल सकता है।
क्या बदलेगा? अब बैंक का ई-स्टेटमेंट, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की जानकारी और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड कानूनी मामलों में काम आ सकेंगे। अगर किसी व्यक्ति के बैंक खाते से जुड़ा कोई विवाद होता है, तो सही और प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड को सबूत के तौर पर पेश किया जा सकेगा। इससे पहले डिजिटल रिकॉर्ड और कागजी दस्तावेजों को लेकर कई मामलों में अलग स्थिति रहती थी। अब डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी तौर पर ज्यादा मजबूती मिलने की उम्मीद है।
UPI और ऑनलाइन बैंकिंग वालों के लिए क्यों जरूरी? आज ज्यादातर लोग पैसे भेजने के लिए UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं। हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का एक डिजिटल रिकॉर्ड बनता है। अगर किसी पेमेंट को लेकर विवाद होता है, तो यही रिकॉर्ड यह दिखाने में मदद कर सकता है कि कब, कितने पैसे और किस खाते से ट्रांजैक्शन हुआ था। हालांकि, रिकॉर्ड सही और प्रमाणित होना जरूरी होगा।
बैंक फ्रॉड की जांच में भी मदद डिजिटल बैंक रिकॉर्ड को कानूनी सबूत मानने से ऑनलाइन फ्रॉड और बैंकिंग धोखाधड़ी की जांच में भी मदद मिल सकती है। जांच के दौरान किसी ट्रांजैक्शन का डिजिटल रिकॉर्ड देखा जा सकेगा और पैसे के लेनदेन की जानकारी समझने में आसानी हो सकती है।
आम लोगों को क्या करना चाहिए? अगर आप ऑनलाइन बैंकिंग या UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो अपने जरूरी बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और बैंक से मिलने वाले डिजिटल मैसेज संभालकर रखना बेहतर है।किसी विवाद की स्थिति में ये रिकॉर्ड काम आ सकते हैं। हालांकि, हर स्क्रीनशॉट या मैसेज अपने आप कानूनी सबूत नहीं बन जाएगा। रिकॉर्ड की सही और प्रमाणित होना जरूरी है।
पेपरलेस बैंकिंग को मिलेगा बढ़ावा इस बदलाव से बैंकिंग के ज्यादा डिजिटल और पेपरलेस होने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सकता है। आने वाले समय में डिजिटल KYC, ऑनलाइन लोन, ई-सिग्नेचर और डिजिटल दस्तावेजों का इस्तेमाल और बढ़ सकता है।कुल मिलाकर, डिजिटल बैंक रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता मिलने से ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे बैंकिंग से जुड़े विवादों में डिजिटल रिकॉर्ड की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
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