इराक पश्चिम एशिया का एक ऐतिहासिक देश है, जिसकी राजधानी बगदाद और मुद्रा इराकी दीनार है। टिगरिस और यूफ्रेट्स नदियों के बीच स्थित इराक प्राचीन मेसोपोटामिया सभ्यता का केंद्र रहा है और आज तेल, कृषि, धर्म, संस्कृति और समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। देश में अरबी और कुर्दी प्रमुख भाषाएं हैं, जबकि इस्लाम मुख्य धर्म है; इराकी खान-पान, पारंपरिक पहनावा, फुटबॉल और धार्मिक स्थलों की भी अपनी खास पहचान है।
मध्य-पूर्व का देश इराक दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक का केंद्र रहा है। टिगरिस और यूफ्रेट्स नदियों के बीच बसा यह इलाका प्राचीन मेसोपोटामिया के नाम से जाना जाता था और मानव सभ्यता के शुरुआती शहरों, कृषि व्यवस्था और प्रशासनिक प्रणालियों के विकास में इसकी बड़ी भूमिका रही है। आज का इराक तेल के विशाल भंडार, समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, विविध धार्मिक-सामुदायिक संरचना और लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संघर्षों के कारण दुनिया के महत्वपूर्ण देशों में शामिल है।
इराक एक नजर में देश का नाम: इराक गणराज्य राजधानी: बगदाद क्षेत्रफल: लगभग 4,38,317 वर्ग किलोमीटर जनसंख्या: करीब 4.
7 करोड़, 2025 के विश्व बैंक के आंकड़े के अनुसार मुद्रा: इराकी दीनार मुख्य भाषाएं: अरबी और कुर्दी मुख्य धर्म: इस्लाम प्रमुख नदियां: टिगरिस और यूफ्रेट्स प्रमुख आर्थिक संसाधन: कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस वर्तमान प्रधानमंत्री: अली अल-ज़ैदी सरकारी व्यवस्था: संघीय गणराज्य विश्व बैंक के अनुसार इराक की मुद्रा इराकी दीनार है। 2025 में देश की आबादी करीब 4.
70 करोड़ थी।
इराक कहां स्थित है? इराक पश्चिमी एशिया यानी मध्य-पूर्व में स्थित है। इसकी सीमाएं ईरान, तुर्की, सीरिया, जॉर्डन, सऊदी अरब और कुवैत से लगती हैं। दक्षिण में इसकी छोटी-सी समुद्री सीमा फारस की खाड़ी से जुड़ती है। देश का कुल क्षेत्रफल करीब 4.
38 लाख वर्ग किलोमीटर है। इराक का बड़ा हिस्सा मैदानी और रेगिस्तानी है, जबकि उत्तर और उत्तर-पूर्व में पहाड़ी इलाके पाए जाते हैं। तुर्की और ईरान की सीमा के पास ऊंचे पहाड़ हैं। इराक की भौगोलिक पहचान में टिगरिस और यूफ्रेट्स नदियों की सबसे बड़ी भूमिका है। दोनों नदियां देश के कृषि, इतिहास और मानव बस्तियों के विकास से गहराई से जुड़ी रही हैं।
राजधानी बगदाद बगदाद इराक की राजधानी और सबसे महत्वपूर्ण शहर है। यह टिगरिस नदी के किनारे बसा हुआ है और सदियों से राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। अब भी बगदाद देश की सरकार, संसद, प्रशासन और प्रमुख संस्थानों का मुख्य केंद्र है। आधुनिक बगदाद में पुराने ऐतिहासिक इलाकों के साथ-साथ बड़े बाजार, विश्वविद्यालय, सरकारी कार्यालय और आधुनिक शहरी क्षेत्र भी मौजूद हैं।
इराक के वर्तमान प्रधानमंत्री कौन हैं? अगस्त 2026 तक उपलब्ध नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी हैं। मई 2026 में इराकी संसद ने उनके नेतृत्व वाली सरकार के 14 मंत्रियों को मंजूरी दी थी, हालांकि उस समय कुछ महत्वपूर्ण मंत्रालयों पर सहमति नहीं बन सकी थी। अली अल-ज़ैदी की सरकार के सामने सुरक्षा, भ्रष्टाचार, अर्थव्यवस्था, तेल पर निर्भरता और क्षेत्रीय तनाव जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इराक की राजनीति में शिया, सुन्नी और कुर्द राजनीतिक समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण है। देश को क्षेत्रीय संघर्षों से दूर रखने और उसकी संप्रभुता बनाए रखने का मुद्दा भी सरकार के लिए अहम है।
इराक की राजनीति और शासन व्यवस्था इराक एक संघीय गणराज्य है। यहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और संसद की अलग-अलग भूमिकाएं हैं। प्रधानमंत्री सरकार और कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं। राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक भूमिका निभाता है, जबकि संसद कानून बनाने और सरकार की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इराक की राजनीति पर धार्मिक और सामुदायिक समीकरणों का भी प्रभाव रहा है। शिया और सुन्नी अरब समुदायों के साथ कुर्द समुदाय देश की राजनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इराक का धर्म इराक एक मुस्लिम बहुल देश है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश की करीब 95 से 98 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। इनमें शिया और सुन्नी दोनों समुदाय शामिल हैं। इसके अलावा ईसाई, यजीदी, साबेअन-मंदाई और अन्य छोटे धार्मिक समुदाय भी इराक में मौजूद हैं। इराक में शिया इस्लाम के कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। नजफ और कर्बला विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कर्बला शिया मुसलमानों के लिए दुनिया के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है। नजफ भी शिया इस्लामी शिक्षा और धार्मिक अध्ययन का बड़ा केंद्र है।
इराक की भाषाएं इराक की दो प्रमुख आधिकारिक भाषाएं अरबी और कुर्दी हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में तुर्कमेन और अरामाइक/सिरिएक जैसी भाषाएं बोलने वाले समुदाय भी हैं। अरबी देश के बड़े हिस्से में इस्तेमाल होती है, जबकि उत्तरी इराक और कुर्दिस्तान क्षेत्र में कुर्दी का व्यापक इस्तेमाल होता है।
इराक का प्राचीन इतिहास इराक का इतिहास हजारों साल पुराना है। आज के इराक का बड़ा हिस्सा प्राचीन मेसोपोटामिया का क्षेत्र था। मेसोपोटामिया शब्द का अर्थ लगभग "दो नदियों के बीच की भूमि" है और यह टिगरिस तथा यूफ्रेट्स नदियों के बीच के क्षेत्र के लिए इस्तेमाल होता था। सुमेर, अक्कद, बेबीलोन और असीरिया जैसी महान सभ्यताओं और साम्राज्यों का विकास इसी क्षेत्र में हुआ। प्राचीन मेसोपोटामिया में शहरों का विकास, सिंचाई आधारित कृषि, लेखन और प्रशासनिक व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां देखने को मिलीं। गिर्सू जैसे प्राचीन सुमेरियन स्थलों से मिले हजारों साल पुराने प्रशासनिक दस्तावेज इस क्षेत्र में विकसित सरकारी और आर्थिक व्यवस्था की जानकारी देते हैं। बेबीलोन और हम्मुराबी प्राचीन इराक का बेबीलोन शहर विशेष रूप से प्रसिद्ध रहा है। बेबीलोन के राजा हम्मुराबी का कानून इतिहास की शुरुआती लिखित कानूनी व्यवस्थाओं में गिना जाता है। बेबीलोन के अलावा निनेवे, उर और उरुक जैसे प्राचीन शहर भी इराक के इतिहास में महत्वपूर्ण हैं।
इस्लामी दौर और बगदाद का महत्व 7वीं सदी में इस क्षेत्र में इस्लामी शासन स्थापित हुआ। बाद में अब्बासी खिलाफत के दौरान बगदाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और बौद्धिक केंद्रों में शामिल हो गया। अब्बासी काल में बगदाद में विज्ञान, गणित, चिकित्सा, दर्शन, साहित्य और अनुवाद के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम हुआ। इस दौर में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से विद्वान बगदाद पहुंचे। इसके बाद इराक पर कई अलग-अलग साम्राज्यों और राजवंशों का प्रभाव रहा। बाद के दौर में यह ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा बना।
आधुनिक इराक का निर्माण प्रथम विश्व युद्ध के बाद इराक पर ब्रिटेन का प्रभाव बढ़ा। 1920 में यह क्षेत्र ब्रिटिश प्रशासन के अधीन लीग ऑफ नेशंस के मैंडेट में आया। इराक को 1932 में स्वतंत्रता मिली और वह एक राजशाही बना। 1958 में राजशाही समाप्त करके इराक को गणराज्य घोषित किया गया। इसके बाद कई दशकों तक देश में राजनीतिक अस्थिरता और सैन्य तथा राजनीतिक सत्ता संघर्ष चलता रहा। 2003 में सद्दाम हुसैन की सरकार गिरने के बाद इराक में बड़ा राजनीतिक बदलाव आया। इसके बाद देश में नई राजनीतिक व्यवस्था बनी, लेकिन लंबे समय तक हिंसा, आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता की समस्या बनी रही।
इराक की अर्थव्यवस्था इराक की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार तेल है। देश के पास दुनिया के बड़े तेल भंडारों में से एक है और सरकारी आय तथा निर्यात में तेल की भूमिका बहुत बड़ी है। विश्व बैंक के अनुसार 2025 में तेल इराक के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद का अनुमानित 53 प्रतिशत, सरकारी राजस्व का 88 प्रतिशत और वस्तु निर्यात का करीब 91 प्रतिशत था। यही तेल पर निर्भरता इराक की अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती भी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत या उत्पादन में बदलाव का सीधा असर सरकारी आय और आर्थिक विकास पर पड़ता है। सरकार अर्थव्यवस्था को तेल से आगे बढ़ाकर कृषि, उद्योग और निजी क्षेत्र में विविध बनाने की कोशिश कर रही है।
इराक की कृषि तेल के बावजूद कृषि इराक के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। टिगरिस और यूफ्रेट्स नदियों की वजह से यहां हजारों साल से सिंचाई आधारित कृषि की परंपरा रही है। गेहूं और जौ देश की प्रमुख फसलों में शामिल हैं। इसके अलावा चावल, मक्का, सब्जियां, कपास, अंगूर और खजूर भी उगाए जाते हैं। इराक विशेष रूप से खजूर के उत्पादन के लिए जाना जाता है। देश में खजूर की खेती का लंबा इतिहास है और यह कृषि तथा स्थानीय खान-पान दोनों में महत्वपूर्ण है। हाल के वर्षों में पानी की कमी कृषि के सामने बड़ी चुनौती बनी है। FAO के अनुसार 2026 में गेहूं और जौ की खेती पर शुरुआती सूखे और पानी की कमी का असर पड़ा। सरकार को सतही जल से सिंचाई वाले क्षेत्र को सीमित करना पड़ा। पानी की कमी के पीछे जलवायु परिवर्तन, कम वर्षा और टिगरिस-यूफ्रेट्स नदी प्रणाली में पानी के प्रवाह से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दे महत्वपूर्ण कारण हैं।
इराक में क्या खाया जाता है? इराकी खान-पान पर अरब, कुर्द, मेसोपोटामियाई और आसपास के देशों की पाक परंपराओं का प्रभाव दिखाई देता है। यहां चावल, गेहूं, मांस, सब्जियां, दालें, खजूर और मसालों का इस्तेमाल आम है। कुछ लोकप्रिय इराकी व्यंजन हैं: मसगूफ: मछली को खास तरीके से पकाने वाला प्रसिद्ध इराकी व्यंजन। टिगरिस नदी क्षेत्र से इसका खास संबंध माना जाता है। कुब्बा: मांस और अनाज से बनने वाला लोकप्रिय व्यंजन, जिसकी अलग-अलग किस्में मिलती हैं। डोलमा: सब्जियों या पत्तियों में चावल और मांस का मिश्रण भरकर बनाया जाने वाला व्यंजन। ताशरीब: रोटी या ब्रेड के साथ मांस और शोरबे से बनाया जाने वाला पारंपरिक भोजन। क्लेचा: खजूर या अन्य भरावन से बनाई जाने वाली पारंपरिक मीठी पेस्ट्री, जिसे विशेष अवसरों पर भी खाया जाता है। चावल और मांस से बने व्यंजन भी इराकी भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इराक के लोगों का पहनावा इराक में पहनावे पर क्षेत्र, धर्म, समुदाय और मौसम का असर दिखाई देता है। पुरुषों में पारंपरिक रूप से लंबा ढीला वस्त्र दिशदाशा या थोब पहना जाता है। इसके साथ सिर पर अलग-अलग प्रकार की पगड़ी या पारंपरिक सिर ढकने वाले कपड़े पहने जा सकते हैं। कुर्द क्षेत्रों में पारंपरिक कुर्द पोशाक की अपनी अलग पहचान है। पुरुषों और महिलाओं दोनों के पारंपरिक कपड़ों में रंगीन कपड़े और विशेष डिजाइनों का इस्तेमाल देखने को मिलता है। शहरों में आधुनिक पश्चिमी शैली के कपड़े भी आम हैं। युवा वर्ग में शर्ट, टी-शर्ट, जींस और अन्य आधुनिक कपड़ों का इस्तेमाल काफी सामान्य है।
इराक का रहन-सहन इराक में जीवनशैली क्षेत्र के हिसाब से काफी अलग हो सकती है। बड़े शहरों जैसे बगदाद, बसरा, एरबिल और मोसुल में आधुनिक शहरी जीवन दिखाई देता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और पारंपरिक जीवनशैली का प्रभाव अधिक है। गर्मियों में देश के कई हिस्सों में तापमान काफी अधिक हो जाता है। इसलिए हल्के और ढीले कपड़ों का इस्तेमाल सुविधाजनक माना जाता है। परिवार इराकी समाज की महत्वपूर्ण इकाई है। पारिवारिक और सामाजिक संबंधों को काफी महत्व दिया जाता है। धार्मिक त्योहार, विवाह और पारिवारिक समारोह सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इराक में शिक्षा इराक में शिक्षा व्यवस्था का इतिहास भी काफी पुराना है। आधुनिक दौर में देश में स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का बड़ा नेटवर्क विकसित हुआ है। बगदाद, नजफ, बसरा, मोसुल और एरबिल जैसे शहर उच्च शिक्षा के प्रमुख केंद्र हैं। युद्धों और राजनीतिक अस्थिरता ने कई वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया। इसके बावजूद देश में शिक्षा और मानव संसाधन विकास को आर्थिक पुनर्निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। विश्व बैंक के अनुसार इराक में सरकार बुनियादी सेवाओं को बहाल करने, मानव पूंजी मजबूत करने और संस्थागत सुधारों पर भी काम कर रही है।
इराक में लोकप्रिय खेल इराक में सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल है। राष्ट्रीय टीम के मैचों में लोगों की बड़ी दिलचस्पी रहती है। इराक ने एशियाई फुटबॉल में भी अपनी पहचान बनाई है। देश की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने 2007 में एएफसी एशियन कप जीता था, जो इराकी फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। फुटबॉल के अलावा बास्केटबॉल, कुश्ती, भारोत्तोलन और अन्य खेल भी खेले जाते हैं।
इराक की प्रमुख जगहें इराक में ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। बगदाद: राजधानी और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक केंद्र। बेबीलोन: प्राचीन मेसोपोटामिया की महान सभ्यता से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल। उर: प्राचीन सुमेरियन सभ्यता का महत्वपूर्ण शहर। नजफ: शिया इस्लाम का प्रमुख धार्मिक केंद्र। कर्बला: शिया मुस्लिमों का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक शहर। एरबिल: कुर्दिस्तान क्षेत्र का प्रमुख शहर और प्राचीन इतिहास वाला इलाका। मोसुल: ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तरी शहर, जो लंबे समय तक व्यापार और संस्कृति का केंद्र रहा है।
इराक की संस्कृति इराकी संस्कृति में अरब, कुर्द, तुर्कमेन, असीरियन और अन्य समुदायों की परंपराओं का मेल दिखाई देता है। संगीत, कविता, अरबी साहित्य, पारंपरिक हस्तशिल्प और धार्मिक परंपराएं यहां की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं। प्राचीन मेसोपोटामिया की विरासत आज भी इराक की राष्ट्रीय पहचान में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
इराक की सबसे बड़ी चुनौतियां आज इराक के सामने कई आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती तेल पर अत्यधिक निर्भरता है। विश्व बैंक के अनुसार तेल पर निर्भर आर्थिक मॉडल देश को वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय संघर्षों से जुड़े आर्थिक जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाता है। दूसरी बड़ी चुनौती पानी की कमी है। टिगरिस और यूफ्रेट्स पर निर्भर कृषि व्यवस्था के लिए पानी की उपलब्धता लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। 2026 में FAO ने भी पानी की कमी और शुरुआती सूखे के कारण फसलों पर दबाव की जानकारी दी है। इसके अलावा युवाओं के लिए रोजगार, बिजली और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार, भ्रष्टाचार से निपटना और क्षेत्रीय संघर्षों से देश को सुरक्षित रखना भी प्रमुख मुद्दे हैं।
इराक क्यों महत्वपूर्ण है? इराक का महत्व सिर्फ उसके तेल भंडारों की वजह से नहीं है। यह देश मानव इतिहास के उन क्षेत्रों में से है जहां शुरुआती शहरों, कृषि, लेखन और संगठित प्रशासन का विकास हुआ। भौगोलिक रूप से भी इराक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ईरान, तुर्की, सीरिया, जॉर्डन, सऊदी अरब और कुवैत के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी से भी जुड़ा है। आज का इराक एक तरफ प्राचीन सभ्यता की विरासत संभाले हुए है, तो दूसरी तरफ आधुनिक अर्थव्यवस्था, राजनीतिक स्थिरता, रोजगार, पानी और बुनियादी सेवाओं जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। निष्कर्ष इराक को केवल युद्ध और तेल के लिए पहचानना उसके इतिहास और समाज की पूरी तस्वीर नहीं बताता। यह वह भूमि है जहां मेसोपोटामिया जैसी प्राचीन सभ्यताओं ने जन्म लिया और जहां मानव समाज के शुरुआती संगठित रूपों का विकास हुआ। आज इराक की अर्थव्यवस्था तेल पर काफी निर्भर है, लेकिन कृषि, उद्योग और निजी क्षेत्र को विकसित करने की जरूरत बढ़ रही है। टिगरिस और यूफ्रेट्स नदियां अब भी देश के जीवन और कृषि के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, हालांकि पानी की कमी नई चुनौती बन चुकी है। धर्म, इतिहास, भोजन, पहनावा, परिवार, साहित्य और खेल—इन सभी क्षेत्रों में इराक की अपनी विशिष्ट पहचान है। आने वाले वर्षों में देश की स्थिरता, आर्थिक विविधीकरण, जल प्रबंधन और रोजगार के अवसर यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि इराक अपनी विशाल ऐतिहासिक विरासत के साथ आधुनिक विकास की दिशा में कितना आगे बढ़ पाता है।
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