भारत ने 300 गीगावॉट से ज्यादा नॉन-फॉसिल बिजली क्षमता हासिल कर ली है। इसमें सोलर, विंड और हाइड्रो पावर की बड़ी भूमिका है। अब देश का लक्ष्य 2030 तक 500 GW से ज्यादा नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में 300 गीगावॉट से ज्यादा नॉन-फॉसिल बिजली क्षमता हासिल कर ली है। इसमें सोलर, विंड और हाइड्रो पावर की बड़ी हिस्सेदारी है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 GW से ज्यादा नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता तैयार करना है।
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश में नॉन-फॉसिल बिजली क्षमता 300 गीगावॉट से ज्यादा हो गई है। यह देश की कुल बिजली क्षमता का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा है। नॉन-फॉसिल ऊर्जा में सोलर, विंड और हाइड्रो पावर जैसे स्रोत शामिल हैं। इनमें सोलर पावर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। पिछले कुछ सालों में देश में सोलर और विंड प्रोजेक्ट तेजी से लगाए गए हैं।
सोलर पावर का बढ़ा योगदान भारत में नॉन-फॉसिल बिजली क्षमता बढ़ाने में सोलर पावर की बड़ी भूमिका रही है। इसके बाद विंड और हाइड्रो पावर का योगदान है। देश में सोलर उपकरण बनाने का काम भी बढ़ रहा है। इससे भारत में ही उपकरण तैयार करने को बढ़ावा मिल सकता है और बाहर से सामान मंगाने पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे रोजगार के नए मौके भी बन सकते हैं।
अर्थव्यवस्था को भी फायदा स्वच्छ ऊर्जा में बढ़ते निवेश का असर केवल बिजली और पर्यावरण तक सीमित नहीं है। सोलर, विंड और दूसरे ऊर्जा प्रोजेक्ट में निवेश बढ़ने से कई दूसरे कामों को भी बढ़ावा मिल सकता है। पावर प्लांट, मशीनरी, निर्माण, तकनीक और सर्विस से जुड़े क्षेत्रों में काम बढ़ सकता है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। Deloitte की India Economic Outlook रिपोर्ट में भी ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और क्षमता बढ़ने को भारत की आर्थिक बढ़त के लिए अहम बताया गया है।
आम लोगों पर क्या असर होगा? स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने से लंबे समय में बिजली व्यवस्था को फायदा मिल सकता है। सोलर और विंड जैसे स्रोतों से बिजली बनाने पर कोयला और दूसरे ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
इससे प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है। हालांकि सोलर और विंड से मिलने वाली बिजली मौसम पर निर्भर रहती है। इस वजह से बिजली को स्टोर करने के लिए बैटरी, पानी से बिजली जमा करने वाली व्यवस्था और बेहतर बिजली लाइन की जरूरत बढ़ेगी। इसके लिए आने वाले समय में बड़े निवेश की जरूरत होगी।
2030 तक 500 GW का लक्ष्य भारत ने 2030 तक 500 GW से ज्यादा नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। 300 GW का आंकड़ा पार होना इस लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अब आगे की चुनौती केवल बिजली बनाने की क्षमता बढ़ाना नहीं है। इसके साथ बिजली को लोगों और उद्योगों तक लगातार पहुंचाने के लिए मजबूत ग्रिड और स्टोरेज व्यवस्था तैयार करना भी जरूरी होगा। अगर सोलर, विंड और हाइड्रो पावर की क्षमता बढ़ती रही तो आने वाले वर्षों में देश में ग्रीन एनर्जी से जुड़े रोजगार और कारोबार के मौके भी बढ़ सकते हैं।
भारत में बढ़ रहा क्लीन एनर्जी पर जोर 300 GW से ज्यादा नॉन-फॉसिल बिजली क्षमता भारत में स्वच्छ ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल को दिखाती है। देश अब 2030 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।
आने वाले समय में बिजली की बढ़ती जरूरत को पूरा करने के साथ यह भी जरूरी होगा कि बिजली सस्ती, भरोसेमंद और लगातार उपलब्ध रहे। इसके लिए उत्पादन के साथ बिजली की लाइन, स्टोरेज और वितरण व्यवस्था को मजबूत करना अहम रहेगा।
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