झारखंड सरकार ने छात्रों के विरोध के बीच 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के साथ 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाएं भी रद्द करने पर सहमति दी है। हालांकि, छात्र JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग पर अब भी अड़े हैं। छात्रों ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा तक मार्च निकालने का ऐलान किया है, जबकि JPSC के तीनों सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है।
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का विरोध अभी जारी है। सरकार ने 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही 2023 और 2025 में हुई JPSC की बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद्द करने पर सहमति बनी है। यह फैसला रविवार को सरकार और प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों के बीच करीब छह घंटे चली बातचीत के बाद सामने आया।
JPSC की परीक्षा रद्द होने के बाद भी छात्रों ने अपना आंदोलन खत्म नहीं किया है। उनकी बड़ी मांग JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की CBI से जांच कराने की है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक इस मांग पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द छात्रों के विरोध के बीच सरकार ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया है। इसके अलावा 2023 और 2025 में आयोजित JPSC की बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद्द करने पर सहमति बनी है।
यह फैसला सरकार और छात्र संगठनों के बीच हुई लंबी बातचीत के बाद लिया गया। रविवार को दोनों पक्षों के बीच करीब छह घंटे तक बातचीत चली। बैठक में छात्रों की ओर से उठाए जा रहे भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
इन परीक्षाओं के रद्द होने के बाद आगे की प्रक्रिया क्या होगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। नई परीक्षा कब होगी या भर्ती प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई तारीख नहीं दी गई है।
JSSC-CGL की CBI जांच की मांग JPSC परीक्षा रद्द होने के बावजूद छात्रों का मुख्य विरोध JSSC-CGL को लेकर बना हुआ है। छात्र इस परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराने की मांग कर रहे हैं।
छात्र संगठनों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उनका मानना है कि JSSC-CGL को लेकर उठे सवालों का जवाब जांच के जरिए सामने आना चाहिए। यही मांग अब आंदोलन का बड़ा मुद्दा बन गई है। छात्रों ने कहा है कि जब तक CBI जांच को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे आंदोलन वापस नहीं लेंगे।
10 अगस्त को विधानसभा मार्च छात्र संगठनों ने सोमवार, 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। इस मार्च के जरिए छात्र अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने की तैयारी में हैं।
JSSC-CGL की जांच के अलावा छात्र भर्ती प्रक्रिया में सुधार की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियों की भर्ती से जुड़ी परीक्षाओं में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे अभ्यर्थियों के बीच किसी तरह का सवाल न उठे। विधानसभा मार्च के बाद आंदोलन की अगली दिशा क्या होगी, यह आगे के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
JPSC के तीनों सदस्यों ने दिया इस्तीफा इसी विवाद के बीच JPSC के तीनों सदस्यों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के साथ यह भी इस पूरे मामले का एक अहम घटनाक्रम है। JPSC झारखंड में सरकारी सेवाओं के लिए भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है। ऐसे में आयोग के सदस्यों के इस्तीफे के बाद आगे की व्यवस्था पर भी ध्यान रहेगा। हालांकि, इस्तीफे के बाद आयोग में आगे क्या व्यवस्था होगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिया भरोसा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को भरोसा दिया है कि मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय किया जाएगा। सरकार और छात्रों के बीच हुई बातचीत के बाद JPSC की तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बनी। इससे छात्रों की JPSC से जुड़ी मांगों में एक बड़ा फैसला सामने आया है। लेकिन JSSC-CGL की CBI जांच पर अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। इसी वजह से छात्रों ने अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्र प्रदर्शन के दौरान कई छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। छात्र भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं।
उनकी मांगों में JSSC-CGL समेत दूसरी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच शामिल है। इसके साथ ही वे भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार चाहते हैं। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया साफ और भरोसेमंद होनी चाहिए।
सिर्फ JPSC तक सीमित नहीं है मामला झारखंड में चल रहा यह विरोध केवल JPSC परीक्षा तक सीमित नहीं है। छात्रों ने JSSC-CGL और दूसरी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को भी मुद्दा बनाया है। इसी कारण 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द होने के बाद भी प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ। छात्रों की मांग अब भर्ती परीक्षाओं की जांच और पूरी व्यवस्था में सुधार से जुड़ी हुई है। छात्र संगठनों की ओर से कहा गया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
अभ्यर्थियों के लिए आगे की चुनौती JPSC की तीन परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले का असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा जो इन परीक्षाओं से जुड़े हुए थे। परीक्षा रद्द होने के बाद अब उन्हें आगे की प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। फिलहाल यह जानकारी सामने नहीं आई है कि रद्द की गई परीक्षाओं की जगह नई परीक्षाएं कब आयोजित होंगी। ऐसे में अभ्यर्थियों के लिए अगली घोषणा का इंतजार महत्वपूर्ण होगा। दूसरी ओर, JSSC-CGL को लेकर छात्रों की CBI जांच की मांग पर फैसला होना भी बाकी है। यही मुद्दा आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा तय कर सकता है।
सरकार के सामने अब दो बड़े मुद्दे रविवार की बातचीत के बाद JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा और 2023 व 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला हो चुका है। JPSC के तीनों सदस्यों के इस्तीफे की जानकारी भी सामने आ गई है।
अब सरकार के सामने छात्रों की बाकी मांगों पर फैसला लेने की चुनौती है। इनमें सबसे अहम JSSC-CGL परीक्षा की CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग है। 10 अगस्त को होने वाला विधानसभा मार्च इसी मुद्दे को लेकर छात्रों के आगे के रुख को सामने लाएगा।
फिलहाल झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। JPSC की परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला हो चुका है, लेकिन JSSC-CGL की जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार को लेकर छात्रों की मांग अभी बनी हुई है। सोमवार के विधानसभा मार्च के बाद इस मामले में आगे की स्थिति और साफ होने की उम्मीद है।
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