राजस्थान के जोधपुर में नागोरी सिलावटों का बास इलाके में एक जर्जर मकान की छत गिरने से 8 साल की बच्ची अलसिफा की मौत हो गई, जबकि उसके परिवार के तीन सदस्य घायल हो गए। हादसे के बाद नगर निगम ने मकान को सील कर आसपास के पुराने और खतरनाक भवनों का सर्वे शुरू कर दिया है।
राजस्थान के जोधपुर में सोमवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ। शहर के नागोरी सिलावटों का बास इलाके में एक पुराने मकान की छत गिरने से 8 साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसके परिवार के तीन लोग घायल हो गए। हादसे के बाद नगर निगम ने आसपास के पुराने और जर्जर मकानों की जांच शुरू कर दी है।
जोधपुर के पुराने शहर में सोमवार सुबह हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को हिला दिया। नागोरी सिलावटों का बास इलाके में एक दो मंजिला पुराने मकान की छत अचानक गिर गई। हादसे में 8 साल की बच्ची अलसिफा की मौत हो गई, जबकि उसके पिता मोहम्मद इरफान, मां और दो साल की छोटी बहन गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।
जानकारी के अनुसार यह हादसा सुबह करीब 5:30 बजे हुआ। उस समय परिवार दूसरी मंजिल पर सो रहा था। अचानक मकान की छत की कई स्लैब एक साथ टूटकर नीचे गिर गईं। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और तुरंत मलबा हटाने का काम शुरू किया।
स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए परिवार के लोगों को मलबे से बाहर निकाला। इसके बाद सभी को इलाज के लिए महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद 8 साल की अलसिफा को मृत घोषित कर दिया। बाकी तीन घायलों का इलाज जारी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह मकान काफी पुराना और जर्जर था। पिछले कुछ दिनों से जोधपुर में लगातार बारिश हो रही थी। माना जा रहा है कि बारिश की वजह से मकान की छत और दीवारें कमजोर हो गई थीं। इसी कारण छत अचानक गिर गई। हालांकि हादसे की सही वजह का पता लगाने के लिए पुलिस और नगर निगम की जांच जारी है।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंच गई। सबसे पहले पूरे इलाके को सुरक्षित किया गया, ताकि कोई और हादसा न हो। इसके बाद मकान को सील कर दिया गया और आसपास के भवनों की जांच शुरू कर दी गई।
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इलाके में कई पुराने मकान हैं। इसलिए अब विशेष अभियान चलाकर ऐसे भवनों की पहचान की जा रही है जो लोगों के रहने के लिए सुरक्षित नहीं हैं। जिन मकानों की हालत खराब मिलेगी, उनके मालिकों को नोटिस जारी किया जाएगा और जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
जोधपुर का पुराना शहर अपनी ऐतिहासिक इमारतों और पुराने मकानों के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में कई दशक पुराने घर हैं। समय के साथ इन मकानों की हालत कमजोर होती जाती है। अगर समय पर उनकी मरम्मत नहीं कराई जाए तो बारिश के मौसम में हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
हर साल मानसून के दौरान कई पुराने मकानों में दरारें आने और छत का हिस्सा गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इसलिए पुराने भवनों की समय-समय पर जांच और मरम्मत जरूरी मानी जाती है। इससे ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
इस हादसे के बाद इलाके के लोगों में डर का माहौल है। कई परिवार अपने मकानों की हालत को लेकर चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि नगर निगम को पुराने शहर के सभी जर्जर मकानों की जांच करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
नगर निगम का कहना है कि सर्वे पूरा होने के बाद जिन भवनों को खतरनाक माना जाएगा, उनके खिलाफ नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लोगों से भी अपील की जा रही है कि अगर किसी मकान में बड़ी दरारें या छत कमजोर दिखाई दे तो इसकी जानकारी तुरंत नगर निगम को दें।
फिलहाल पुलिस हादसे की जांच कर रही है। नगर निगम भी पूरे इलाके का सर्वे कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है और पुराने भवनों की जांच का काम लगातार जारी रहेगा।
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