गुजरात में मानसून के दौरान चांदीपुरा वायरस के मामले बढ़ रहे हैं। अब तक 22 बच्चों की मौत हो चुकी है और 35 बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को सतर्क रहने और प्रभावित इलाकों में कीटनाशक छिड़काव तेज करने के निर्देश दिए हैं।
गुजरात में मानसून के दौरान चांदीपुरा वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक 22 बच्चों की मौत हो चुकी है और 35 बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग इलाज के साथ-साथ वायरस को रोकने के लिए प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहा है। गुजरात में इस बार मानसून के दौरान चांदीपुरा वायरस ने चिंता बढ़ा दी है। राज्य सरकार के अनुसार, अब तक इस वायरस की वजह से 22 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं 7 बच्चों का अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। सभी बीमार बच्चे 15 साल से कम उम्र के हैं।
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने बताया कि राज्य में अब तक 184 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से 35 बच्चों में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हो चुकी है। वहीं 11 बच्चों की जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। बाकी मामलों की जांच और निगरानी लगातार की जा रही है। संक्रमित बच्चों का इलाज गांधीनगर, हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट और भावनगर के सिविल अस्पतालों में किया जा रहा है। डॉक्टर बच्चों की लगातार निगरानी कर रहे हैं और जरूरत के अनुसार इलाज दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह संक्रमण किसी एक जिले या गांव तक सीमित नहीं है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से मामले सामने आए हैं। इसी वजह से विभाग पूरी सावधानी के साथ काम कर रहा है।
वायरस को फैलने से रोकने के लिए प्रभावित इलाकों में कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है। खासकर उन जगहों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है जहां पशुपालन होता है। माना जाता है कि सैंडफ्लाई नाम का छोटा कीड़ा इस वायरस को फैलाने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए इन कीड़ों को खत्म करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
सरकार ने सभी सरकारी और निजी बच्चों के अस्पतालों को भी जरूरी निर्देश दिए हैं। अगर किसी बच्चे में संक्रमण के गंभीर लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत आईसीयू में भर्ती किया जाए। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की सुविधा भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
चांदीपुरा वायरस एक ऐसा संक्रमण है जो दिमाग को प्रभावित कर सकता है। गंभीर हालत में यह तेजी से बच्चे की तबीयत बिगाड़ सकता है। इस वायरस की पहचान पहली बार साल 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में हुई थी। उसी गांव के नाम पर इस वायरस का नाम रखा गया।
डॉक्टरों के अनुसार, यह वायरस बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है। इसलिए छोटे बच्चों में किसी भी तरह के गंभीर लक्षण दिखने पर देर नहीं करनी चाहिए और तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। चांदीपुरा वायरस से संक्रमित बच्चों में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, दौरे पड़ना, ज्यादा सुस्ती, बेहोशी और सोचने-समझने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में दिमाग में सूजन भी आ सकती है, जिससे हालत गंभीर हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बच्चों को साफ-सफाई वाले माहौल में रखें। घर और आसपास पानी जमा न होने दें और कीड़ों से बचाव के लिए जरूरी सावधानी रखें। अगर बच्चे को तेज बुखार या कोई गंभीर लक्षण दिखाई दे तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच कराएं। सरकार का कहना है कि अस्पतालों में इलाज की पूरी व्यवस्था की गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में काम कर रही हैं ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।
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