Hexagon AB का ज़्यादातर software intelligence हैदराबाद में तैयार हो रहा है। कंपनी का सबसे बड़ा R&D सेंटर भी यहीं है, जहाँ करीब 2,200 लोग काम करते हैं। FY2025 में कंपनी ने 6 अरब डॉलर से ज्यादा का revenue कमाया। हैदराबाद की टीमें ऐसा software backbone बनाती हैं जो sensors को cloud से जोड़कर geospatial और manufacturing data को process करता है। Hexagon physical दुनिया को digital twin में बदलने पर फोकस करता है, ताकि AI असली दुनिया को समझ सके और उस पर action ले सके। कंपनी ने Nvidia के साथ मिलकर “physical AI” पर काम तेज़ किया है। हाल ही में Hexagon ने industrial कामों के लिए humanoid robot भी पेश किया, जो inspection और precision tasks कर सकता है। कंपनी का लक्ष्य “lights-out manufacturing” है — यानी ऐसी factories जो अपने आप चलें और AI की मदद से खुद फैसले लें।
Sweden की industrial tech कंपनी Hexagon का ज़्यादातर software intelligence हैदराबाद में तैयार हो रहा है। कंपनी का सबसे बड़ा R&D सेंटर भी यहीं है, जहाँ करीब 2,200 लोग काम करते हैं — जो Switzerland जैसे उसके पुराने engineering hub से भी ज़्यादा है।
वित्त वर्ष 2025 में कंपनी ने 6 अरब डॉलर से ज़्यादा का revenue कमाया। हैदराबाद की टीमें वह software backbone बनाती हैं जो Hexagon के hardware sensors को cloud platforms से जोड़ता है।
ये सिस्टम भारी मात्रा में geospatial और manufacturing data को process करके CTO Burkhard Boeckem के शब्दों में “पूरी value chain” तैयार करता है। इंजीनियर अलग-अलग divisions में काम करते हैं — geospatial mapping से लेकर manufacturing intelligence तक — और आपस में ideas का अच्छा आदान-प्रदान होता है।
Core technologies को अलग-अलग industries के हिसाब से ढाला जाता है, जिससे innovation तेज़ होता है। इसी मेल ने Hexagon को medical aesthetics तक पहुँचा दिया, जहाँ पहले ज़मीन और इमारतों को scan करने वाली systems अब इंसानी चेहरे का analysis कर रही हैं।
पिछले दो दशकों से Hexagon physical और digital दुनिया के बीच एक मजबूत पुल बना रहा है। Laser scanners से लेकर airborne sensors तक, precision measurement tools के लिए जानी जाने वाली यह कंपनी खुद को “age of intelligence” के दौर में आगे मानती है।
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“पिछले 20 सालों से Hexagon physical दुनिया को हमारी measurement technology से digital twin में बदलता आया है,” Boeckem ने New Delhi में India AI Summit के दौरान TOI से कहा। Digital twin असल दुनिया की किसी वस्तु, इमारत या पूरे शहर की एक बेहद सटीक virtual copy होती है।
Hexagon के tools हवाई जहाज़ों से शहरों को scan करते हैं, सड़कों और इमारतों का नक्शा बनाते हैं, और factory के हिस्सों की microscopic स्तर तक जाँच करते हैं। कंपनी ने 2012 से ही अपने products में machine learning जोड़ना शुरू कर दिया था।
जब generative AI आम हुआ, तो ग्राहकों ने पूछा: अगर दुनिया machine readable है, तो क्या हम उससे सवाल कर सकते हैं? इस सवाल के practical मायने हैं। अगर किसी शहर का पूरा digital map हो, तो AI surfaces की पहचान कर सकता है और यह भी बता सकता है कि solar panels के लिए कितनी छत की जगह उपलब्ध है।
कई शहर sustainability के लिए ऐसी insights का इस्तेमाल कर रहे हैं। तीन साल पहले Hexagon ने Nvidia के साथ partnership कर “physical AI” में कदम और तेज़ कर दिया। मकसद सिर्फ दुनिया का analysis करना नहीं, बल्कि उसमें action लेना भी है।
“अगर कोई robot अपने आसपास को महसूस कर सके, समझ सके और तय कर सके कि उसे क्या करना है, तो हम उसे असल दुनिया में काम करने भेज सकते हैं। यही physical AI का सार है,” Boeckem ने कहा। पिछले साल जून में Hexagon ने industrial कामों के लिए एक humanoid robot पेश किया — जो inspection, handling और manipulation पर फोकस करता है।
Las Vegas में launch के दौरान चार robots ने मिलकर एक car door को millimetre स्तर की सटीकता से scan किया। शुरुआती ग्राहकों में automotive और aerospace कंपनियाँ शामिल हैं। Tesla जैसी कंपनियाँ अपने plants में Hexagon की inspection technologies का इस्तेमाल करती हैं।
कंपनी की industrial पहुँच काफी बड़ी है। “दुनिया के लगभग 90% smartphones किसी न किसी रूप में Hexagon technology से जुड़े हैं,” Boeckem ने कहा। कार निर्माण में जो quality checks पहले अलग कमरों में होते थे, अब वे real time में हो रहे हैं।
अंतिम लक्ष्य है “lights-out manufacturing” — यानी ऐसी factories जो अपने आप चलें और गड़बड़ी होने पर खुद फैसला लें। Boeckem के लिए precision पर कोई समझौता नहीं है। AI models को हकीकत से जुड़ा होना चाहिए, ताकि “dimensional hallucinations” से बचा जा सके।
सटीक spatial data ही digital insights को सुरक्षित तरीके से असली दुनिया में लागू करने में मदद करता है। “AI तब सच में ताकतवर बनता है, जब वह सिर्फ स्क्रीन तक सीमित न रहकर असली दुनिया में काम करे,” उन्होंने कहा। “अगर robot सही measurement data के आधार पर महसूस, समझ और सोच सके, तो वह पूरी सटीकता से काम कर सकता है।
Digital intelligence और physical execution के बीच यही पुल physical AI है।”