अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले लगाए गए टैरिफ को अवैध करार देने के बाद Donald Trump ने नया 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। कोर्ट ने 6-3 के फैसले में कहा कि IEEPA के तहत राष्ट्रपति बड़े पैमाने पर टैरिफ नहीं लगा सकते, क्योंकि यह अधिकार कांग्रेस के पास है। ट्रंप ने फैसले को निराशाजनक बताते हुए कुछ जजों की आलोचना की, जबकि Clarence Thomas, Samuel Alito और Brett Kavanaugh की सराहना की। उन्होंने अब Trade Act of 1974 के तहत नया टैरिफ लगाने और सख्त कदम उठाने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले लगाए गए टैरिफ को अवैध करार देने के बाद Donald Trump ने नए 10% ग्लोबल टैरिफ की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह शुल्क एक अलग कानून के तहत लगाया जाएगा। फैसले के बाद व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कोर्ट के फैसले को “बेहद निराशाजनक” बताया और कुछ जजों पर विदेशी हितों से प्रभावित होने का आरोप लगाया। ट्रंप ने कुछ जजों को “मूर्ख और लैपडॉग्स” तक कह दिया। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ नाम के रिपब्लिकन (RINOs) हैं और रेडिकल लेफ्ट डेमोक्रेट्स के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यह फैसला हमारे देश के लिए बहुत निराशाजनक है। कोर्ट के कुछ सदस्यों के पास देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है।” ट्रंप ने आरोप लगाया कि कोर्ट विदेशी हितों से प्रभावित हो गया है और संविधान के प्रति वफादार नहीं है।
तीन जजों की तारीफ ट्रंप ने उन तीन जजों की सराहना की जिन्होंने बहुमत के फैसले से असहमति जताई थी — Clarence Thomas
Samuel Alito
Brett Kavanaugh
ट्रंप ने उनकी “ताकत और बुद्धिमत्ता” की तारीफ की और खासकर कवनॉ को “जीनियस” बताया। वहीं, ट्रंप के पहले कार्यकाल में नियुक्त दो जज — Neil Gorsuch
Amy Coney Barrett
— भी बहुमत में शामिल रहे और उन्होंने ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ वोट दिया।
“और सख्त रास्ता अपनाएंगे” ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अमेरिका के ट्रेडिंग पार्टनर्स को खुश करेगा, लेकिन वे ज्यादा देर खुश नहीं रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अब और मजबूत कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने दावा किया, “मैं किसी देश से पूरा व्यापार खत्म कर सकता हूं, एम्बार्गो लगा सकता हूं। मेरे पास और मजबूत विकल्प हैं। अब हम और सख्त दिशा में जाएंगे।”
ट्रंप ने कहा कि वे Trade Act of 1974 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लगाएंगे। यह पहले से लगे टैरिफ के ऊपर होगा। उनका कहना है कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अलग है और इसके तहत टैरिफ वैध होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में कहा कि International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति बड़े पैमाने पर टैरिफ नहीं लगा सकते, क्योंकि टैरिफ और टैक्स लगाने का अधिकार अमेरिकी संविधान के अनुसार कांग्रेस के पास है।
चीफ जस्टिस John Roberts ने लिखा कि राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने जैसी असाधारण शक्ति के लिए कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी दिखानी होगी, जो इस मामले में मौजूद नहीं थी।
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ की नीति अपनाई थी। 2 अप्रैल 2025 को उन्होंने इसे “लिबरेशन डे” कहकर घोषित किया था। इसमें ज्यादातर देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ और चीन, कनाडा, मैक्सिको जैसे कुछ देशों पर ज्यादा टैरिफ लगाए गए थे।
ट्रंप ने व्यापार घाटा, फेंटेनिल तस्करी और अन्य मुद्दों को राष्ट्रीय आपातकाल बताते हुए IEEPA के तहत टैरिफ लगाए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि IEEPA इकोनॉमिक पावर देता है, टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं।
कोर्ट ने “मेजर क्वेश्चंस डॉक्ट्रिन” का भी हवाला दिया, जिसके मुताबिक बड़े आर्थिक असर वाली नीतियों के लिए कांग्रेस की साफ मंजूरी जरूरी होती है।
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