सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी पुलिस कार्रवाई पर कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के साथ हिंसा नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने पुलिस को भी सुरक्षा उपकरण देने पर जोर दिया और कहा कि भीड़ नियंत्रण में संतुलित तरीके से कदम उठाने जरूरी हैं। पैलेट गन के इस्तेमाल और पुलिस कार्रवाई के नियमों को लेकर कोर्ट आगे सुनवाई करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन और आम लोगों के विरोध प्रदर्शन से निपटने के तरीके पर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि सरकार और पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ हिंसा नहीं करनी चाहिए, लेकिन भीड़ की स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को भी अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी साधन मिलने चाहिए।
मामला जुलाई में हुए एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और पैलेट से लगी चोटों को लेकर दायर याचिका से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन के अधिकार और कानून व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर जताई चिंता सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने छात्र आंदोलनों और सरकार की नीतियों के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों को लेकर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार है और ऐसे मामलों में पुलिस को हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कई बार शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कुछ गलत लोग शामिल होकर माहौल खराब कर सकते हैं। ऐसे में पुलिस को हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए और जरूरत के हिसाब से कदम उठाने चाहिए।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि पुलिसकर्मी भी इंसान होते हैं। उन्हें भीड़ को संभालते समय अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने सरकार से कहा कि पुलिस को ऐसे सुरक्षा उपकरण दिए जाने चाहिए, जिससे वे दबाव की स्थिति में भी सोच-समझकर फैसला ले सकें।
पुलिस को सुरक्षात्मक उपकरण देने पर जोर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पुलिस को केवल बल प्रयोग के साधनों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें हेलमेट, सुरक्षा कवच और दूसरे बचाव उपकरण मिलने चाहिए, ताकि किसी भी तनावपूर्ण स्थिति में वे खुद को सुरक्षित रखते हुए कार्रवाई कर सकें।
कोर्ट का कहना था कि अगर पुलिसकर्मी सुरक्षित महसूस करेंगे तो वे भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान जल्दबाजी में हिंसक कदम उठाने से बच सकते हैं।
पीठ ने कहा कि हर व्यक्ति की सुरक्षा जरूरी है, चाहे वह प्रदर्शनकारी हो या पुलिसकर्मी। भीड़ नियंत्रण के लिए तय नियमों के अनुसार ही कार्रवाई होनी चाहिए।
पैलेट से चोट लगने के मामले पर सुनवाई यह मामला उन लोगों की याचिका पर आधारित है, जिनका दावा है कि जुलाई में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में पैलेट लगने से उन्हें चोट आई थी। याचिका में कहा गया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए गए पैलेट हथियारों से लोगों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि आम लोगों के प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए ऐसे हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि ऐसे साधनों का इस्तेमाल लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पैलेट हथियारों पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला नहीं दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी हथियार के हर स्थिति में इस्तेमाल को गलत साबित करना जरूरी होगा।
कोर्ट देखेगा पुलिस कार्रवाई का तरीका सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह उन घटनाओं की जांच करेगा, जहां पुलिस ने भीड़ नियंत्रण के नियमों का पालन किया या नहीं। कोर्ट यह भी देखेगा कि कहीं बल का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा तो नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई कि प्रदर्शन वाले दिन की पुलिस कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। इसमें पुलिस की ड्यूटी से जुड़े रिकॉर्ड, हथियार और गोला-बारूद की जानकारी तथा अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल हैं। कोर्ट ने पहले ही घटना से जुड़े वीडियो रिकॉर्ड, कैमरों की फुटेज और दूसरी जानकारी सुरक्षित रखने का आदेश दिया था।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर जोर भारत के संविधान में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और प्रदर्शन करने का अधिकार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस अधिकार का सम्मान होना चाहिए, लेकिन साथ ही कानून व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।
कोर्ट ने कहा कि किसी भी प्रदर्शन को हिंसा में बदलने से रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके लिए पुलिस को सही प्रशिक्षण, नियम और सुरक्षा साधन उपलब्ध होने चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से पुलिस द्वारा भीड़ नियंत्रण के लिए अपनाए जाने वाले नियम और प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। अगर जरूरी हुआ तो कोर्ट इस मामले में नए दिशा-निर्देश भी तय कर सकता है।
मामले में आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जरूरी जानकारी मांगी है। कोर्ट यह देखेगा कि पुलिस कार्रवाई तय नियमों के अनुसार हुई थी या नहीं। फिलहाल मामला विचाराधीन है और कोर्ट आगे की सुनवाई में पुलिस के तरीके, इस्तेमाल किए गए साधनों और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों से जुड़े पहलुओं पर विचार करेगा।
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