राजस्थान के जैसलमेर जिले में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत 28 किलोमीटर परिधि वाली एक बड़ी कृत्रिम झील तैयार की जा रही है। इस मानसून में झील में पानी भरना शुरू हो गया है। इस परियोजना का मकसद अतिरिक्त नहर के पानी को बचाकर जैसलमेर और बाड़मेर के लोगों को पूरे साल पीने का पानी और सिंचाई की सुविधा देना है।
राजस्थान का थार रेगिस्तान हमेशा से पानी की कमी के लिए जाना जाता है। यहां के कई गांवों में लोग सालों से पीने के पानी के लिए टैंकर, कुएं और बरसात के पानी पर निर्भर रहे हैं। गर्मियों के दिनों में पानी की समस्या और भी बढ़ जाती है। अब इस मुश्किल को कम करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी योजना पर काम शुरू किया है। जैसलमेर जिले के घंटियाली क्षेत्र में 28 किलोमीटर परिधि वाली एक विशाल कृत्रिम झील तैयार की जा रही है, जिससे इलाके के लाखों लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
यह झील इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत बनाई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक इस मानसून में झील में पानी भरना भी शुरू हो गया है। पहले नहर का अतिरिक्त पानी सीमा पार पाकिस्तान की ओर निकल जाता था, लेकिन अब उसी पानी को इस झील में जमा किया जाएगा। इससे पानी की बर्बादी कम होगी और राजस्थान के सूखे इलाकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
इस परियोजना को बुरजी 1356 एस्केप स्ट्रक्चर पर तैयार किया गया है। यहां ऐसा सिस्टम बनाया गया है जिससे अतिरिक्त पानी को झील तक पहुंचाया जा सके। इससे मानसून के समय आने वाला अतिरिक्त पानी सुरक्षित रहेगा और जरूरत पड़ने पर पूरे साल इस्तेमाल किया जा सकेगा।
सरकार ने इस झील के निर्माण पर करीब 242 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। झील के अंदर खास प्लास्टिक लाइनिंग लगाई गई है ताकि पानी जमीन में न रिसे और लंबे समय तक सुरक्षित रहे। इस तकनीक की मदद से बड़ी मात्रा में पानी को बचाया जा सकेगा।
जानकारी के अनुसार झील की गहराई करीब 33 फीट रखी गई है। इसकी पानी जमा करने की क्षमता 1,413 मिलियन घन मीटर से अधिक बताई जा रही है। इतनी बड़ी क्षमता होने के कारण यह झील लंबे समय तक इलाके की पानी की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकती है।
इस परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य जैसलमेर और बाड़मेर जिले के लोगों को साल भर पानी उपलब्ध कराना है। मानसून के दौरान जब नहर में ज्यादा पानी आता है, तब उसे इस झील में जमा किया जाएगा। बाद में यही पानी जरूरत के समय गांवों और कस्बों तक पहुंचाया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार झील में जमा पानी को पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा। इससे लोगों को गर्मियों में भी पानी की कमी का सामना कम करना पड़ेगा। कई गांवों में पहली बार नियमित पानी मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
इस योजना से किसानों को भी बड़ा फायदा हो सकता है। अभी कई खेत पानी की कमी के कारण खाली रह जाते हैं या खेती सीमित करनी पड़ती है। अगर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा तो किसान ज्यादा जमीन पर खेती कर सकेंगे। इससे फसल उत्पादन बढ़ने और किसानों की आय में सुधार की उम्मीद है। पीने के पानी की समस्या कम होने से गांवों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी आसान होगी। महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर से पानी लाने की परेशानी कम हो सकती है। गांवों में पानी की नियमित सप्लाई होने से लोगों का समय और मेहनत दोनों बचेंगे।
जल विशेषज्ञ इस परियोजना को थार रेगिस्तान में "ब्लू ओशन" बनाने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं। उनका मानना है कि अगर झील का सही तरीके से रखरखाव किया गया तो आने वाले समय में यह पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकती है।
इस झील से सिर्फ पानी की सुविधा ही नहीं बढ़ेगी बल्कि नए रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं। पानी उपलब्ध होने पर मछली पालन जैसी गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। साथ ही झील के आसपास पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकता है।
राजस्थान में कई इलाके ऐसे हैं जहां हर साल पानी की समस्या बनी रहती है। अगर यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में इसी तरह की योजना दूसरे सूखे इलाकों में भी लागू की जा सकती है। इससे राज्य के कई हिस्सों को लंबे समय तक पानी की सुविधा मिल सकती है।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना पहले से ही राजस्थान के कई जिलों के लिए जीवन रेखा मानी जाती है। अब इस नई झील के बनने से नहर का अतिरिक्त पानी भी लोगों के काम आएगा। इससे पानी बचाने और उसका सही उपयोग करने में मदद मिलेगी।
जैसलमेर और बाड़मेर जैसे सीमावर्ती इलाकों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से वहां रहने वाले लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सकता है। गांवों में पीने का पानी, खेती और दूसरी जरूरतों के लिए पानी मिलने से लोगों को राहत मिलेगी।
इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि पहले जो पानी बिना उपयोग के आगे निकल जाता था, अब उसे सुरक्षित रखा जाएगा। इससे पानी की एक-एक बूंद का बेहतर उपयोग संभव होगा।
यदि झील का रखरखाव, पाइपलाइन व्यवस्था और जल वितरण सही तरीके से किया जाता है, तो यह परियोजना राजस्थान के लिए एक सफल जल संरक्षण मॉडल बन सकती है। इससे आने वाले वर्षों में लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
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