अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब लंबे संघर्ष का रूप लेता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार 22 जुलाई की रात 10:30 बजे (ईटी) ईरान पर लगातार 12वीं रात हवाई हमले किए गए। इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज, समुद्री सैन्य क्षमता (मरीटाइम कैपेबिलिटी) और एयर डिफेंस से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। Reuters और NPR की रिपोर्टों के अनुसार इन सैन्य अभियानों का घोषित उद्देश्य हॉरमुज़ जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों और व्यापारी जहाज़ों पर संभावित ईरानी हमलों की क्षमता को काफी हद तक कम करना बताया गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब लंबे संघर्ष का रूप लेता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार 22 जुलाई की रात 10:30 बजे (ईटी) ईरान पर लगातार 12वीं रात हवाई हमले किए गए। इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज, समुद्री सैन्य क्षमता (मरीटाइम कैपेबिलिटी) और एयर डिफेंस से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। Reuters और NPR की रिपोर्टों के अनुसार इन सैन्य अभियानों का घोषित उद्देश्य हॉरमुज़ जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों और व्यापारी जहाज़ों पर संभावित ईरानी हमलों की क्षमता को काफी हद तक कम करना बताया गया है।
मध्य पूर्व में बढ़ते इस तनाव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हॉरमुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ती अस्थिरता का प्रभाव वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग उद्योग और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
लगातार 12वीं रात तक जारी रहे अमेरिकी हमले CENTCOM की आधिकारिक जानकारी के अनुसार अमेरिकी सेना ने लगातार 12वीं रात ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की। इन अभियानों में मिसाइल भंडारण केंद्र, ड्रोन स्टोरेज, समुद्री सैन्य संसाधन और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल तेल टैंकरों, व्यापारी जहाज़ों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमलों के लिए किया जा सकता है।
हॉरमुज़ जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण? हॉरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
CENTCOM के अनुसार पिछले कुछ महीनों में ईरान पर 30 से अधिक कमर्शियल जहाज़ों पर हमले करने या उन्हें रोकने की कोशिश करने के आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन घटनाओं से सैकड़ों नाविकों की सुरक्षा खतरे में पड़ी और अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही यानी "फ्रीडम ऑफ नेविगेशन" प्रभावित हुई।
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किन सैन्य ठिकानों को बनाया गया निशाना? NPR की रिपोर्ट के अनुसार हालिया हमलों में ईरान के मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, मरीटाइम लॉजिस्टिक्स, ड्रोन स्टोरेज और एयरक्राफ्ट हैंगर को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका का उद्देश्य ईरान की जवाबी सैन्य क्षमता को सीमित करना है ताकि वह जहाज़ों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले करने की स्थिति में न रहे।
अमेरिकी सेना का कहना है कि अभियान का फोकस सैन्य ढांचे पर रहा और रणनीतिक संसाधनों को निशाना बनाया गया। ईरान की जवाबी कार्रवाई की भी रिपोर्ट NPR की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने भी जॉर्डन और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जॉर्डन ने दावा किया है कि उसने छह मिसाइलों को बीच रास्ते में इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है। दोनों देशों के बीच जारी सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
युद्ध की बढ़ती लागत Democracy Now और NPR की रिपोर्टों के अनुसार इस संघर्ष की कुल अनुमानित लागत 37 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुकी है। रिपोर्टों के मुताबिक क्षेत्र में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। बढ़ते सैन्य अभियान के कारण रक्षा खर्च लगातार बढ़ रहा है और लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की आशंकाएं भी बनी हुई हैं।
जहाज़ों की आवाजाही पर पड़ा असर BBC World की रिपोर्ट के अनुसार हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद हॉरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज़ों की संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई है।
समुद्री मार्ग पर बढ़ते जोखिम के कारण कई शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपना रही हैं। जहाज़ों की आवाजाही कम होने से तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। ऊर्जा बाजार में किसी भी प्रकार की बाधा का असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
नौ जहाज़ों का रूट बदला गया Reuters की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने नौ कमर्शियल जहाज़ों का रूट बदल दिया ताकि वे संभावित जोखिम वाले क्षेत्र से दूर रह सकें। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक जहाज़ को इस तरह निष्क्रिय (डिसेबल) किया गया कि वह ईरानी बंदरगाह में प्रवेश न कर सके। इन कदमों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा बनाए रखना और संभावित जोखिम को कम करना बताया गया है।
भारत पर क्या हो सकता है असर? भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में यदि हॉरमुज़ जलडमरूमध्य में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। यदि वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही महंगाई और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना भी बढ़ सकती है। मध्य पूर्व में काम कर रहे भारतीय प्रवासी और शिपिंग उद्योग से जुड़े लोगों के लिए भी सुरक्षा और रोजगार को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
आगे की स्थिति पर दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य कार्रवाई फिलहाल क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई है। दोनों देशों की गतिविधियों पर दुनिया की नजर है क्योंकि इस संघर्ष का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी CENTCOM की आधिकारिक प्रेस रिलीज़ तथा Reuters, NPR, Democracy Now और BBC World की रिपोर्टों पर आधारित है। क्षेत्र में हालात लगातार बदल रहे हैं और आगे की स्थिति संबंधित आधिकारिक अपडेट और घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। desclaimer :
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