वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए आयकर विभाग ने ITR फॉर्म में कई नए डिस्क्लोजर अनिवार्य किए हैं। अब HRA, होम लोन ब्याज, सेक्शन 80C, 80D, 80G और 80GGC के तहत टैक्स छूट का दावा करने वाले करदाताओं को पहले से अधिक विस्तृत जानकारी देनी होगी। गलत या अधूरी जानकारी देने पर टैक्स छूट खारिज होने, स्क्रूटनी, डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस और दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए आयकर रिटर्न (ITR) फॉर्म में कई नए खुलासे (Disclosure) अनिवार्य कर दिए हैं। अब टैक्सपेयर्स को HRA, होम लोन ब्याज, सेक्शन 80C, 80D और 80G जैसी टैक्स छूट एवं कटौती के दावों के समर्थन में पहले से अधिक विस्तृत जानकारी देनी होगी। इन जानकारियों का मिलान Form 16, AIS, Form 26AS, लेंडर रिकॉर्ड और आयकर विभाग की AI आधारित जांच प्रणाली से किया जाएगा।
आयकर विभाग का उद्देश्य गलत दावों को रोकना, टैक्स रिटर्न की सटीक जांच करना और रिटर्न प्रोसेसिंग को अधिक पारदर्शी बनाना है। यदि कोई जानकारी अधूरी, गलत या रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है तो टैक्स छूट का दावा खारिज हो सकता है और करदाता को अतिरिक्त जांच या डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस का सामना करना पड़ सकता है। आयकर विशेषज्ञ सुरेश सुराना के अनुसार, नए डिस्क्लोजर नियमों से रिटर्न प्रोसेसिंग के दौरान टैक्स छूट और कटौती के दावों का अधिक सटीक सत्यापन किया जा सकेगा।
HRA (House Rent Allowance) क्लेम के लिए क्या-क्या जानकारी देनी होगी? यदि कोई कर्मचारी HRA छूट का दावा करता है तो अब उसे निम्नलिखित जानकारी देनी होगी— निवास का स्थान (City) प्राप्त HRA की राशि चुकाया गया किराया वेतन संबंधी विवरण सुरेश सुराना के अनुसार, HRA का दावा Form 16 और किराए के रिकॉर्ड से मेल खाना चाहिए। केवल वही व्यक्ति HRA छूट का दावा कर सकता है जो वास्तव में किराए के मकान में रहता हो और किराया चुका रहा हो।
इसके अलावा यह भी सही तरीके से बताना होगा कि मकान मेट्रो शहर में है या नॉन-मेट्रो शहर में, क्योंकि इसी आधार पर 50% या 40% वेतन की सीमा लागू होती है। यदि सालाना किराया ₹1 लाख से अधिक है तो मकान मालिक का PAN देना अनिवार्य होगा। ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन के अनुसार— यदि वेतन में HRA शामिल नहीं है तो HRA छूट नहीं मिलेगी। स्वयं-रोजगार (Self-employed) व्यक्ति HRA नहीं ले सकते। वे चाहें तो Section 80GG के तहत राहत का दावा कर सकते हैं। अपने स्वयं के घर में रहने पर HRA क्लेम नहीं किया जा सकता। नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) अपनाने वाले करदाता HRA छूट का लाभ नहीं ले सकते।
होम लोन ब्याज (Section 24(b)) पर क्या जानकारी देनी होगी? होम लोन ब्याज पर टैक्स छूट लेने के लिए अब निम्नलिखित विवरण देना अनिवार्य होगा— लोन बैंक से लिया गया है या किसी अन्य संस्था से लेंडर का नाम लोन अकाउंट नंबर लोन स्वीकृति (Sanction) की तारीख कुल लोन राशि बकाया लोन राशि ब्याज की दावा की गई राशि चांदनी आनंदन के अनुसार, यह दावा लेंडर द्वारा जारी ब्याज प्रमाणपत्र (Interest Certificate) से मेल खाना चाहिए। सुरेश सुराना का कहना है कि संपत्ति स्वयं के उपयोग (Self Occupied), किराए पर (Let Out) या Deemed Let Out है, इसकी सही जानकारी देना जरूरी है क्योंकि प्रत्येक स्थिति में टैक्स नियम अलग-अलग लागू होते हैं। आयकर विभाग इन दावों का मिलान— Form 16 Annual Information Statement (AIS) Form 26AS बैंक एवं लेंडर रिकॉर्ड से करेगा। इसलिए सभी दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है।
Section 80C में अब किन जानकारियों की जरूरत होगी? Section 80C के तहत अलग-अलग निवेशों के लिए अलग-अलग विवरण देना होगा। सुरेश सुराना के अनुसार— Life Insurance के लिए पॉलिसी नंबर Public Provident Fund (PPF) के लिए संबंधित अकाउंट विवरण Equity Linked Savings Scheme (ELSS) के लिए निवेश संदर्भ National Savings Certificate (NSC) का विवरण बच्चों की ट्यूशन फीस के दस्तावेज होम लोन प्रिंसिपल भुगतान से जुड़े संदर्भ नंबर इन सभी निवेशों के प्रमाण सुरक्षित रखना आवश्यक होगा।
Section 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा क्लेम में क्या जरूरी होगा? Section 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर टैक्स छूट लेने के लिए निम्नलिखित जानकारी तैयार रखनी होगी— बीमित व्यक्ति का विवरण बीमा कंपनी का नाम पॉलिसी नंबर प्रीमियम राशि भुगतान का माध्यम भुगतान का प्रमाण BDO India की टैक्स एवं रेगुलेटरी एडवाइजरी पार्टनर दीपाश्री शेट्टी के अनुसार— स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम का भुगतान नकद के अलावा अन्य माध्यम से होना चाहिए। केवल Preventive Health Check-up के लिए नकद भुगतान की अनुमति है। निर्धारित टैक्स सीमा के भीतर ही कटौती मिलेगी। स्वयं, जीवनसाथी और आश्रित बच्चों के लिए लिया गया बीमा पात्र होगा। माता-पिता के लिए अलग कटौती सीमा उपलब्ध है। Registered Insurer की Top-up और Super Top-up पॉलिसियां भी पात्र हैं।
Section 80G और 80GGC में क्या नया है? धार्मिक या चैरिटेबल संस्थाओं को दिए गए दान पर Section 80G के तहत टैक्स छूट लेने के लिए अब अतिरिक्त जानकारी देनी होगी। इनमें शामिल हैं— ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर बैंक का IFSC दान की रसीद भुगतान का माध्यम संस्था का Section 80G रजिस्ट्रेशन सत्यापन Tax Connect Advisory Services के पार्टनर विवेक जालान के अनुसार, नए ITR फॉर्म में दानदाता का PAN, पता, भुगतान का माध्यम और Acknowledgement Number भी देना होगा, जिससे केवल सत्यापित और पारदर्शी दान पर ही टैक्स छूट मिल सके। Section 80GGC के तहत राजनीतिक दल को दिए गए योगदान के लिए— राजनीतिक दल का नाम PAN देना अनिवार्य होगा। नकद दान पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी।
किन गलतियों से बचना चाहिए? टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार करदाताओं को निम्नलिखित गलतियों से बचना चाहिए— गलत PAN दर्ज करना गलत ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर भरना बिना दस्तावेज के टैक्स छूट का दावा करना एक ही कटौती का दो बार दावा करना अधूरी जानकारी देना विवेक जालान के अनुसार, आयकर विभाग की AI आधारित प्रणाली AIS, Taxpayer Information Summary (TIS) और दान प्राप्त करने वाली संस्थाओं की फाइलिंग से सभी दावों का मिलान करती है। यदि Section 80D, 80G या 80GGC से जुड़ी जानकारी अधूरी या गलत पाई जाती है तो टैक्स छूट अस्वीकार की जा सकती है।
गलत जानकारी देने पर क्या हो सकता है? यदि ITR में जानकारी अधूरी, गलत या रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है तो करदाता को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। संभावित परिणाम— टैक्स कटौती या छूट का दावा खारिज हो सकता है। रिटर्न प्रोसेसिंग के दौरान समायोजन (Adjustment) किया जा सकता है। आयकर विभाग अतिरिक्त जांच (Scrutiny) शुरू कर सकता है। डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस जारी हो सकता है। आय कम दिखाने या गलत जानकारी देने पर दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। इसलिए ITR दाखिल करने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान Form 16, AIS, Form 26AS और संबंधित रिकॉर्ड से अवश्य कर लें, ताकि रिटर्न बिना किसी परेशानी के प्रोसेस हो सके।
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