करीब 650 दिनों तक प्रतियोगिताओं से दूर रहने के बाद भारतीय लॉन्ग जंपर श्रीशंकर मुरली ने शानदार वापसी की है। Reliance Foundation Sports की डॉक्यूमेंट्री में उन्होंने बताया है कि गंभीर चोट के कारण उन्हें लंबे समय तक खेल से दूर रहना पड़ा, लेकिन परिवार, कोच और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने फिर से ट्रैक पर वापसी की।
करीब 650 दिनों तक प्रतियोगिताओं से दूर रहने के बाद भारतीय लॉन्ग जंपर श्रीशंकर मुरली ने शानदार वापसी की है। Reliance Foundation Sports की डॉक्यूमेंट्री में उन्होंने बताया है कि गंभीर चोट के कारण उन्हें लंबे समय तक खेल से दूर रहना पड़ा, लेकिन परिवार, कोच और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने फिर से ट्रैक पर वापसी की।
आज श्रीशंकर भारत के प्रमुख लॉन्ग जंप खिलाड़ियों में शामिल हैं और ग्लासगो 2026 जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए देश की उम्मीद माने जा रहे हैं। खेल की दुनिया में जीत और हार दोनों का सामना करना पड़ता है, लेकिन किसी खिलाड़ी के लिए सबसे कठिन समय तब होता है जब चोट उसके करियर की रफ्तार रोक देती है। भारतीय लॉन्ग जंपर श्रीशंकर मुरली की कहानी इसी संघर्ष, धैर्य और मजबूत इरादों की मिसाल है।
लगभग दो साल तक ट्रैक से दूर रहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते हुए दोबारा अपनी जगह बनाई। Reliance Foundation Sports की डॉक्यूमेंट्री में श्रीशंकर ने अपने जीवन के उस दौर को साझा किया है, जब एक गंभीर चोट ने उन्हें प्रतियोगिताओं से पूरी तरह दूर कर दिया था। यह समय केवल शारीरिक दर्द का नहीं था, बल्कि मानसिक रूप से भी उनके लिए बड़ी परीक्षा साबित हुआ। इसके बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और धीरे-धीरे अपने सपनों की ओर फिर कदम बढ़ाए।
बचपन से खेल रहा जीवन का हिस्सा श्रीशंकर मुरली का खेलों से रिश्ता बचपन से ही रहा है। उनके परिवार में खेलों का अच्छा माहौल था और शुरुआती दिनों से ही उन्हें अपने पिता का मार्गदर्शन मिला। इसी समर्थन ने उन्हें एथलेटिक्स में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।
लगातार मेहनत और बेहतर प्रदर्शन के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उनकी लंबी छलांग ने भारत को कई प्रतियोगिताओं में गौरवान्वित किया और वे देश के उभरते हुए लॉन्ग जंप खिलाड़ियों में गिने जाने लगे। लेकिन हर खिलाड़ी की तरह उनके करियर में भी एक ऐसा समय आया जब चोट ने उनकी पूरी यात्रा को रोक दिया।
गंभीर चोट के बाद बदल गई जिंदगी डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, चोट लगने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें लंबे समय तक आराम करने की सलाह दी। शुरुआत में यह समझना उनके लिए आसान नहीं था कि वे दोबारा पहले जैसी फिटनेस हासिल कर पाएंगे या नहीं। प्रतियोगिताओं से दूर रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन होता है। लंबे समय तक मैदान से बाहर रहने के कारण उन्हें केवल खेल ही नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की जीवनशैली में भी बड़े बदलाव करने पड़े। करीब 650 दिनों तक वे किसी बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सके। यह इंतजार उनके लिए धैर्य और मानसिक मजबूती की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया।
शारीरिक नहीं, मानसिक लड़ाई भी थी श्रीशंकर ने बताया कि चोट से उबरना केवल फिजियोथेरेपी या इलाज तक सीमित नहीं था। यह मानसिक रूप से भी खुद को मजबूत बनाए रखने की चुनौती थी।
कई बार उन्हें लगा कि शायद वे फिर कभी अपनी सर्वश्रेष्ठ छलांग नहीं लगा पाएंगे। लेकिन ऐसे समय में परिवार का विश्वास और कोच की योजनाबद्ध रीहैब प्रक्रिया उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बनी। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी फिटनेस पर काम शुरू किया। शुरुआत में केवल शरीर को मजबूत बनाने वाले अभ्यास किए गए। इसके बाद छोटी-छोटी जंप्स की प्रैक्टिस शुरू हुई और फिर धीरे-धीरे प्रतियोगिता स्तर की ट्रेनिंग की ओर वापसी हुई।
हर दिन एक नई शुरुआत जैसा था लंबे समय तक खेल से दूर रहने के बाद वापसी करना आसान नहीं होता। खिलाड़ियों को अपनी पुरानी लय हासिल करने में समय लगता है। श्रीशंकर ने भी जल्दबाजी करने के बजाय एक-एक कदम आगे बढ़ने का रास्ता चुना।
उन्होंने अपनी पूरी ट्रेनिंग रूटीन को नए सिरे से तैयार किया। हर अभ्यास का उद्देश्य केवल दूरी बढ़ाना नहीं, बल्कि शरीर को दोबारा उसी स्तर तक पहुंचाना था जहां से वे पहले खेलते थे। इस दौरान उन्होंने खुद को यह भी याद दिलाया कि खेल केवल मेडल जीतने का नाम नहीं है। यह सीखने, संघर्ष करने और हर चुनौती को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ने की यात्रा भी है।
परिवार बना सबसे बड़ी ताकत डॉक्यूमेंट्री में श्रीशंकर के माता-पिता ने भी अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि चोट के कठिन दौर में उन्होंने हमेशा अपने बेटे का मनोबल बनाए रखने की कोशिश की। परिवार ने लगातार उन्हें भरोसा दिलाया कि वे एक दिन जरूर वापसी करेंगे। हालांकि अंदर ही अंदर उन्हें भी चिंता और डर था, लेकिन उन्होंने कभी यह एहसास श्रीशंकर को नहीं होने दिया। यही सकारात्मक माहौल उनके आत्मविश्वास को बनाए रखने में मददगार साबित हुआ।
टीम से जुड़े रहकर निभाई नई जिम्मेदारी चोट के दौरान श्रीशंकर प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पा रहे थे, लेकिन उन्होंने खुद को खेल से पूरी तरह अलग नहीं किया। डॉक्यूमेंट्री में उनके कोच और साथी खिलाड़ियों ने बताया कि इस दौरान भी वे टीम के साथ जुड़े रहे और युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करते रहे। इससे उन्हें खुद भी सकारात्मक रहने में मदद मिली और नए खिलाड़ियों को भी सीखने का अवसर मिला। यह दिखाता है कि एक खिलाड़ी का नेतृत्व केवल मैदान में प्रदर्शन से नहीं, बल्कि कठिन समय में दूसरों का साथ देने से भी पहचाना जाता है।
अब ग्लासगो 2026 पर नजर लंबे संघर्ष के बाद श्रीशंकर अब फिर से भारत के प्रमुख लॉन्ग जंप खिलाड़ियों में शामिल हैं। आने वाले समय में ग्लासगो 2026 जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। उनकी वापसी केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानी जा रही, बल्कि यह उन सभी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो किसी चोट या कठिन दौर के कारण खेल से दूर हो जाते हैं।
हर इंसान के लिए प्रेरणा है यह कहानी श्रीशंकर मुरली की कहानी केवल खेल प्रेमियों तक सीमित नहीं है। यह हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जिसने अपने जीवन में किसी तरह की असफलता, बीमारी, चोट या लंबे संघर्ष का सामना किया हो। चाहे कोई छात्र हो, नौकरी करने वाला व्यक्ति हो या किसी दूसरे क्षेत्र में काम करता हो, जीवन में रुकावटें आना स्वाभाविक है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कठिन समय में इंसान खुद को कैसे संभालता है और दोबारा आगे बढ़ने की हिम्मत कैसे जुटाता है।
करीब 650 दिनों तक ट्रैक से दूर रहने के बाद श्रीशंकर की वापसी यह संदेश देती है कि सफलता केवल तेज दौड़ने वालों को नहीं मिलती, बल्कि उन्हें भी मिलती है जो गिरने के बाद दोबारा उठने का साहस रखते हैं। यही संघर्ष, धैर्य और लगातार मेहनत किसी भी सपने को फिर से सच करने की सबसे बड़ी ताकत बनती है। desclaimer :
श्रीशंकर मुरली, भारतीय लॉन्ग जंपर, 650 दिन बाद वापसी, लॉन्ग जंप, Reliance Foundation Sports, एथलेटिक्स, ग्लासगो 2026, खेल प्रेरणा, भारतीय एथलीट, चोट से वापसी Sreeshankar Murali, Indian Long Jumper, 650 din baad wapsi, Athletics India, Long Jump, Glasgow 2026, Injury Comeback, Sports Inspiration, Bharatiya Athlete
650 दिन बाद भारतीय लॉन्ग जंपर श्रीशंकर की वापसी, Sreeshankar Murali comeback after 650 days, Reliance Foundation Sports documentary on Sreeshankar, श्रीशंकर मुरली की प्रेरणादायक कहानी, Indian long jumper injury comeback story
Inspiring Story, Human Interest, Sports News, Athletics, Indian Athlete, Long Jump, Motivation, Reliance Foundation Sports, Glasgow 2026, Success Story, NetGramNews, NetGram Ne
Disclaimer
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI. अस्वीकरण: इस लेख में उपयोग की गई तस्वीरें केवल सांकेतिक (Illustrative) उद्देश्य के लिए हैं। इनमें से कुछ तस्वीरों का संपादन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से किया गया है।
Published by: Gulam Rasool. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.