फिबोनाची सीरीज़ (0, 1, 1, 2, 3, 5…) में हर नंबर पिछले दो नंबरों के जोड़ से बनता है। इसी सीरीज़ से 61.8%, 38.2% और 23.6% जैसे अहम रेशियो निकलते हैं, जिन्हें गोल्डन रेशियो भी कहा जाता है। शेयर मार्केट में जब कोई स्टॉक तेज़ी या गिरावट के बाद थोड़ा वापस आता है, तो उसे रिट्रेसमेंट कहते हैं। ट्रेडर इन फिबोनाची लेवल्स का इस्तेमाल यह समझने के लिए करते हैं कि स्टॉक कहाँ तक गिर या उछल सकता है। हालांकि, फिबोनाची को अकेले इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बेहतर नतीजों के लिए इसे candlestick pattern, support-resistance, volume और stoploss जैसे संकेतों के साथ मिलाकर देखना चाहिए।
फिबोनाची रिट्रेसमेंट का विषय काफी दिलचस्प है। इसे सही से समझने के लिए पहले फिबोनाची सीरीज़ को समझना ज़रूरी है। फिबोनाची सीरीज़ की जड़ें प्राचीन भारतीय गणित में मिलती हैं, कुछ दावे इसे 200 ईसा पूर्व तक ले जाते हैं।
लेकिन 12वीं सदी में इटली के पीसा शहर के गणितज्ञ लियोनार्डो पिसानो बोगोलो, जिन्हें उनके दोस्त फिबोनाची कहते थे, ने फिबोनाची संख्याओं को प्रसिद्ध किया। फिबोनाची सीरीज़ एक नंबरों की श्रृंखला है जो शून्य से शुरू होती है, और इसमें हर अगला नंबर पिछले दो नंबरों के जोड़ के बराबर होता है।
यह सीरीज़ अनंत तक चलती रहती है। फिबोनाची सीरीज़ की कुछ दिलचस्प विशेषताएँ हैं। अगर आप इस सीरीज़ के किसी भी नंबर को उसके पिछले नंबर से भाग देते हैं, तो अनुपात लगभग 1.618 आता है। 1.618 को गोल्डन रेशियो या Phi कहा जाता है।
यह अनुपात प्रकृति में भी देखा जाता है — जैसे इंसान का चेहरा, फूलों की पंखुड़ियाँ, जानवरों का शरीर, फल-सब्ज़ियाँ, चट्टानों की बनावट, आकाशगंगाएँ आदि। अगर किसी नंबर को उसके अगले नंबर से भाग दें तो अनुपात लगभग 0.618 आता है। 0.618 को प्रतिशत में लिखें तो यह 61.8% होता है।
इसी तरह, अगर किसी नंबर को उससे दो स्थान आगे वाले नंबर से भाग दें तो अनुपात 0.382 आता है। 0.382 प्रतिशत में 38.2% होता है। अगर किसी नंबर को उससे तीन स्थान आगे वाले नंबर से भाग दें तो अनुपात 0.236 आता है। 0.236 प्रतिशत में 23.6% होता है।
माना जाता है कि फिबोनाची के ये रेशियो — 61.8%, 38.2% और 23.6% — शेयर चार्ट में काम आते हैं। जब किसी स्टॉक में तेज़ी से ऊपर या नीचे की मूव आती है, तो वह अक्सर अगली दिशा में बढ़ने से पहले थोड़ा वापस आता है, जिसे रिट्रेसमेंट कहते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर कोई स्टॉक ₹50 से बढ़कर ₹100 हो गया, तो वह ₹120 जाने से पहले शायद ₹70 तक वापस आ सकता है। ‘रिट्रेसमेंट लेवल फोरकास्ट’ एक ऐसी तकनीक है जो बताती है कि स्टॉक कितने स्तर तक वापस आ सकता है। ये लेवल ट्रेडर को ट्रेंड की दिशा में नई एंट्री लेने का मौका देते हैं।
मान लीजिए स्टॉक ₹380 से बढ़कर ₹489 तक गया। मतलब स्टॉक लगभग ₹421 तक गिर सकता है और फिर दोबारा ऊपर जा सकता है। इसी तरह 38.2% और 23.6% भी निकाले जा सकते हैं। आमतौर पर सॉफ्टवेयर यह कैलकुलेशन खुद कर देता है। इसी तरह, अगर कोई स्टॉक ₹288 से ₹338 गया (50 पॉइंट मूव), तो 38.2% रिट्रेसमेंट लगभग ₹319 पर आएगा।
फिबोनाची रिट्रेसमेंट गिरते हुए स्टॉक्स में भी लागू होता है। अगर स्टॉक ₹187 से गिरकर ₹120.6 आया (67 पॉइंट गिरावट), तो वह 61.8% तक उछलकर लगभग ₹162 तक जा सकता है।
16.2 – फिबोनाची रिट्रेसमेंट कैसे बनाएं फिबोनाची रिट्रेसमेंट ट्रेंड के खिलाफ होने वाली मूव को दिखाता है। इसे लगाने के लिए पहले 100% मूव पहचानें — यानी हाल का सबसे ऊँचा और सबसे निचला पॉइंट (Peak और Trough)। स्टेप-बाय-स्टेप: हाल का Peak और Trough पहचानें।
चार्ट टूल में से Fibonacci Retracement टूल चुनें।
पहले Trough पर क्लिक करें, फिर Peak तक ड्रैग करें।
इसके बाद सॉफ्टवेयर अपने-आप 23.6%, 38.2%, 61.8% आदि लेवल चार्ट पर दिखा देगा।
16.3 – फिबोनाची रिट्रेसमेंट का उपयोग कैसे करें? मान लीजिए आप कोई स्टॉक खरीदना चाहते थे, लेकिन वह तेज़ी से ऊपर चला गया। ऐसे में समझदारी यह होगी कि आप रिट्रेसमेंट का इंतज़ार करें। 61.8%, 38.2% और 23.6% जैसे लेवल संभावित सपोर्ट बन सकते हैं, जहाँ से स्टॉक दोबारा ट्रेंड पकड़ सकता है।
लेकिन याद रखें — फिबोनाची को अकेले इस्तेमाल न करें। इसे एक confirmation टूल की तरह इस्तेमाल करें। कोई साफ़ candlestick pattern बने
Stoploss, Support & Resistance लेवल से मेल खाए
Volume औसत से ज्यादा हो
और अगर Stoploss फिबोनाची लेवल से भी मेल खाए
जब कई संकेत एक साथ मिलते हैं, तो ट्रेड का सेटअप मजबूत माना जाता है। यही बात शॉर्ट ट्रेड पर भी लागू होती है।
Disclaimer
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