पूर्वोत्तर राज्य असम इस समय भीषण बाढ़ की मार झेल रहा है। कई लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई गांव पानी में डूब गए हैं, खेती को भारी नुकसान हुआ है और राहत एजेंसियां लगातार लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने में लगी हैं।
असम में एक बार फिर बाढ़ ने लोगों की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया है। लगातार हो रही बारिश और नदियों का जल स्तर बढ़ने से राज्य के कई हिस्से पानी में डूब गए हैं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, इस साल की बाढ़ में कई दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। एक दिन में ही 21 लोगों की जान जाने की खबर सामने आई थी। इसके बाद कुल मौतों का आंकड़ा 30 से अधिक बताया गया। बाढ़ की वजह से लाखों लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं।
असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (ASDMA) के अनुसार, पहले जारी की गई एक रिपोर्ट में लगभग 3.63 लाख लोगों के प्रभावित होने की जानकारी दी गई थी। बाद में हालात और बिगड़ने पर यह संख्या बढ़कर करीब 18.8 लाख तक पहुंच गई। इससे साफ है कि बाढ़ का असर बहुत बड़े इलाके में देखने को मिल रहा है।
राज्य के कई जिले इस समय बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। करीब 15 जिलों में लोगों का सामान्य जीवन पूरी तरह रुक गया है। सैकड़ों गांव पानी में डूब चुके हैं। कई जगह लोगों के घरों में कई फीट तक पानी भर गया है। ऐसे में परिवारों को अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में रहना पड़ रहा है।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर गरीब परिवारों पर पड़ा है। जिन लोगों की रोज की कमाई पर घर चलता था, उनका काम पूरी तरह बंद हो गया है। खेतों में खड़ी फसल पानी में डूब गई है। हजारों हेक्टेयर खेती की जमीन खराब हो चुकी है। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। कई परिवारों की सालभर की मेहनत कुछ ही दिनों में खत्म हो गई।
बाढ़ का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं बल्कि जानवरों पर भी पड़ा है। हजारों पशु-पक्षी भी इस आपदा की चपेट में आए हैं। कई जगह मवेशियों को सुरक्षित जगह पर ले जाना पड़ा। जिन लोगों की कमाई पशुओं पर निर्भर थी, उनके सामने भी बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव का काम तेजी से चल रहा है। सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और वायुसेना लगातार लोगों की मदद कर रही हैं। कई इलाकों में नावों के जरिए लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। जहां सड़क का संपर्क टूट गया है, वहां हेलीकॉप्टर की मदद से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। जरूरतमंद लोगों को खाने का सामान, पीने का पानी और जरूरी दवाइयां दी जा रही हैं।
राहत शिविरों में हजारों लोग रह रहे हैं। यहां लोगों को रहने और खाने की व्यवस्था दी जा रही है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का खास ध्यान रखा जा रहा है। कई सरकारी और सामाजिक संगठन भी राहत कार्य में सहयोग कर रहे हैं।
असम में हर साल बाढ़ आती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। राज्य में कई बड़ी नदियां हैं, जिनका जल स्तर बारिश के दौरान तेजी से बढ़ जाता है। जब नदियां खतरे के निशान से ऊपर बहने लगती हैं तो आसपास के गांव और शहर पानी में डूब जाते हैं। हर साल हजारों लोगों को इसका सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम का असर भी बाढ़ की समस्या को बढ़ा रहा है। पहले जहां बारिश एक तय समय पर होती थी, अब कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने लगी है। इससे नदियों में अचानक पानी बढ़ जाता है और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि नदी किनारे बिना योजना के बढ़ते निर्माण और जंगलों की कटाई भी बाढ़ की बड़ी वजह बन रही है। जब पेड़ कम होते हैं तो बारिश का पानी तेजी से नदियों में पहुंचता है। इससे जल स्तर जल्दी बढ़ जाता है। साथ ही कई जलाशयों और नालों की समय पर सफाई नहीं होने से भी पानी की निकासी प्रभावित होती है।
बाढ़ का सबसे बड़ा नुकसान लोगों के घरों को होता है। कई परिवारों के घर पूरी तरह पानी में डूब जाते हैं। घर के साथ जरूरी सामान, कपड़े, खाने का राशन और जरूरी कागजात भी खराब हो जाते हैं। गरीब परिवारों के लिए दोबारा नई शुरुआत करना आसान नहीं होता। बच्चों की पढ़ाई भी बाढ़ की वजह से प्रभावित होती है। कई स्कूलों में पानी भर जाता है या फिर उन्हें राहत शिविर बना दिया जाता है। इससे पढ़ाई कई दिनों तक बंद रहती है। छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है।
स्वास्थ्य के लिए भी यह समय काफी मुश्किल होता है। बाढ़ के बाद गंदा पानी कई बीमारियों को जन्म देता है। साफ पीने के पानी की कमी हो जाती है। ऐसे समय में लोगों को बुखार, पेट की बीमारी और त्वचा से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ जाता है। राहत शिविरों में ज्यादा भीड़ होने से संक्रमण फैलने की संभावना भी बनी रहती है।
सरकार और राहत एजेंसियां लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रही हैं। लोगों को सुरक्षित जगहों पर रहने, गंदे पानी से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जा रहा है। लगातार हालात पर नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत कार्य बढ़ाया जा रहा है।
असम की यह बाढ़ एक बार फिर दिखाती है कि प्राकृतिक आपदाएं लोगों की जिंदगी पर कितना बड़ा असर डालती हैं। लाखों लोगों के सामने घर, रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। राहत और बचाव का काम जारी है, लेकिन सामान्य स्थिति लौटने में अभी समय लग सकता है।
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