इस साल भारत में सुपर अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून सामान्य नहीं रहा है। देश में औसतन 23 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे धान की फसल प्रभावित हो रही है। जहां उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने का खतरा है, वहीं दक्षिण और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जल संरक्षण और वैज्ञानिक खेती अपनाना बेहद जरूरी हो गया है।
भारत में इस वर्ष मानसून पर सुपर अल नीनो (Super El Niño) का गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ने के कारण मौसम का संतुलन बिगड़ गया है। इसका असर भारत समेत एशिया के कई देशों में दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशांत महासागर के गर्म होने से भारत से लेकर जापान तक एक लंबी ट्रफ लाइन (Convergence Zone) बन गई है। इसी वजह से मानसूनी हवाओं का सामान्य प्रवाह प्रभावित हुआ है और देशभर में बारिश का वितरण असमान हो गया है।
देश में 23 प्रतिशत कम बारिश इस साल अब तक भारत में सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि देश के करीब 60 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पिछले 100 वर्षों में पांचवां सबसे कमजोर मानसून माना जा रहा है। इसका सीधा असर खेती, जल स्रोतों और पेयजल उपलब्धता पर पड़ रहा है।
धान की खेती पर सबसे ज्यादा असर कम बारिश का सबसे अधिक प्रभाव धान की खेती पर पड़ रहा है। धान ऐसी फसल है जिसे पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। बारिश की कमी और लगातार बढ़ते तापमान के कारण खेतों में नमी घट रही है, जिससे धान की बुआई और फसल की बढ़वार प्रभावित हो रही है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है।
कई राज्यों में रेड अलर्ट एक ओर जहां देश के कई हिस्सों में बारिश कम हो रही है, वहीं कुछ राज्यों में अत्यधिक बारिश और उससे जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। इन राज्यों में लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।
दक्षिण और पश्चिम भारत में कमजोर मानसून उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के विपरीत दक्षिण और पश्चिम भारत में मानसून का असर काफी कमजोर बना हुआ है। कई क्षेत्रों में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है, जिससे जलाशयों का जलस्तर घट रहा है और सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है।
दिल्ली-एनसीआर में उमस और बढ़ता तापमान राजधानी दिल्ली और एनसीआर में भी मानसून सक्रिय नहीं होने के कारण लोगों को तेज उमस का सामना करना पड़ रहा है। यहां तापमान 36 से 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। नमी अधिक होने के कारण गर्मी और भी ज्यादा महसूस हो रही है।
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जलवायु परिवर्तन बना बड़ी चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण मौसम का स्वरूप लगातार बदल रहा है। कहीं अत्यधिक बारिश हो रही है तो कहीं लंबे समय तक सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। ऐसे बदलते मौसम में केवल मानसून पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। भविष्य में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा।
जल संरक्षण के लिए सुझाए गए उपाय विशेषज्ञों ने पानी बचाने और भूजल स्तर सुधारने के लिए कई उपाय अपनाने की सलाह दी है। वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) को बढ़ावा देना। अमृत सरोवर जैसी जल संरक्षण योजनाओं का विस्तार करना। सोक पिट बनाकर वर्षा जल को जमीन में पहुंचाना। ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों का अधिक उपयोग करना। बांधों और जलाशयों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना। बदलते मौसम के अनुसार कृषि पद्धतियों में वैज्ञानिक बदलाव लाना। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते जल संरक्षण और टिकाऊ खेती के उपाय नहीं अपनाए गए, तो आने वाले वर्षों में पानी की कमी और खाद्यान्न उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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