शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर INDIA गठबंधन के दलों ने अलग-अलग तरीके से प्रदर्शन करते हुए एकजुटता दिखाई। संसद से लेकर जंतर-मंतर और प्रधानमंत्री आवास तक विपक्षी नेताओं की सक्रियता देखने को मिली। हालांकि सभी दल हर कार्यक्रम में साथ नहीं थे, लेकिन सरकार पर दबाव बनाने के लिए उन्होंने साझा रणनीति अपनाई।
शिक्षा व्यवस्था और लगातार सामने आए परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मामलों को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन अब विपक्ष की राजनीति का भी प्रमुख मुद्दा बन गया है। मंगलवार को INDIA गठबंधन के दलों ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन और समर्थन कार्यक्रम आयोजित किए, लेकिन उनका उद्देश्य एक ही था—सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय करने का दबाव बनाना। इस रणनीति को उस राजनीतिक सोच से जोड़ा गया जिसे दिवंगत माकपा (CPI-M) के पूर्व महासचिव सीताराम येचुरी अक्सर विपक्षी एकता के संदर्भ में दोहराते थे—"अलग मार्च करो, लेकिन एक साथ वार करो।" मंगलवार की घटनाओं में INDIA गठबंधन के दलों ने इसी रणनीति को व्यवहार में उतारा।
INDIA गठबंधन की बैठक में बनी सहमति मंगलवार सुबह हुई INDIA गठबंधन की बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुए छात्र आंदोलन का समर्थन किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी तय हुआ कि यह समर्थन केवल संसद परिसर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच भी विपक्ष अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगा। विपक्ष का दावा है कि पिछले 12 वर्षों में 152 प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। बैठक में इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के कई विकल्पों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने जैसे प्रस्ताव भी सामने आए, लेकिन किसी एक कार्यक्रम पर सभी दलों की सहमति नहीं बन सकी।
संसद परिसर में राहुल गांधी और अखिलेश यादव का साझा संदेश संसद में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर छात्र आंदोलन पर चर्चा कराने की मांग की। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत की। उसी दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव संसद के मकर द्वार की सीढ़ियों पर राहुल गांधी का इंतजार करते रहे। राहुल गांधी के मीडिया से बात खत्म करने के बाद दोनों नेताओं ने अलग-अलग बयान दिए, लेकिन दोनों का संदेश एक जैसा था। दोनों ने शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को स्वीकार करने में सरकार की विफलता पर सवाल उठाए।
अलग-अलग जगह पहुंचे विपक्षी नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेता पुलिस कार्रवाई में घायल छात्रों से मिलने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे। वहीं CPI(M) और CPI के सांसद जंतर-मंतर पहुंचे, जहां छात्र आंदोलन का मुख्य केंद्र बना हुआ है। दोनों वामपंथी दलों ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनका समर्थन किया।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास तक निकाला मार्च दोपहर करीब तीन बजे कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च किया। बताया गया कि कई सांसदों को इस मार्च की जानकारी कुछ मिनट पहले ही मिली थी। वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 84वें जन्मदिन के कार्यक्रम के लिए उनके आवास पहुंचे थे, जहां से अचानक मार्च का फैसला लिया गया। इस मार्च में शुरुआत में INDIA गठबंधन के अन्य दलों को शामिल होने का निमंत्रण नहीं दिया गया था।
बाद में जुड़े अन्य विपक्षी दल जैसे-जैसे प्रदर्शन स्थल पर भीड़ बढ़ी, कांग्रेस ने अन्य विपक्षी दलों से संपर्क किया। हालांकि सभी दल मौके पर नहीं पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बात पर नाराजगी जताई कि उन्हें पहले से जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि उन्होंने इसे "छोटी असुविधा" बताते हुए नजरअंदाज किया और लोकसभा सांसद धर्मेंद्र यादव के साथ प्रदर्शन में शामिल हो गए। बाद में उन्हें राहुल गांधी के साथ पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
एनसीपी (एसपी) और शरद पवार की अलग भूमिका राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले कांग्रेस के प्रदर्शन में शामिल हुईं। वहीं उनके पिता और पार्टी प्रमुख शरद पवार जंतर-मंतर पहुंचे, जहां उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों से मुलाकात की। सुप्रिया सुले की मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि हाल के दिनों में पार्टी में संभावित टूट और लोकसभा में सरकार की संख्या बढ़ने जैसी अटकलें लगाई जा रही थीं।
सुप्रिया सुले ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव समेत अन्य नेताओं पर हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में लोकसभा में विपक्ष के नेता के साथ ऐसा व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ है। उनका कहना था कि जो सरकार शांतिपूर्ण विरोध का जवाब संवाद की बजाय बल प्रयोग से देती है, वह लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करती है।
उद्धव ठाकरे भी पहुंचे जंतर-मंतर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे भी जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलन कर रहे छात्रों से मुलाकात कर अपना समर्थन जताया। इस तरह INDIA गठबंधन के अलग-अलग दल भले ही हर कार्यक्रम में एक साथ नजर नहीं आए, लेकिन सभी ने अपने-अपने तरीके से छात्र आंदोलन के समर्थन में सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की। विपक्ष का फोकस शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और छात्रों की मांगों को राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बनाने पर रहा।
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