दिल्ली पुलिस ने संसद की ओर निकाले जाने वाले प्रस्तावित मार्च पर रोक लगा दी है। इसके बाद भी 'Cockroach' आंदोलन से जुड़े लोगों ने अपना विरोध जारी रखने की बात कही है। यह आंदोलन परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग को लेकर चल रहा है।
दिल्ली में संसद के मानसून सत्र से पहले पुलिस ने संसद की ओर होने वाले प्रस्तावित मार्च पर रोक लगा दी है। इसके लिए न्यू दिल्ली जिले में आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ जमा होने पर रोक रहेगी। यह फैसला सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और संसद सत्र के दौरान किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए लिया गया है।
पिछले करीब तीन सप्ताह से जंतर-मंतर पर 'Cockroach Janata Party' और उसके समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं। उनकी मुख्य मांग है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए और शिक्षा मंत्री को पद से हटाया जाए।
इस आंदोलन से पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारों की आवाज उठाने वाले सोनम वांगचुक भी जुड़े हुए हैं। वह कुछ समय से भूख हड़ताल पर थे। बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद आंदोलन में लोगों की संख्या और बढ़ने लगी। प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालने की घोषणा की थी। लेकिन पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। पुलिस का कहना है कि संसद सत्र के दौरान सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। संसद के आसपास कई महत्वपूर्ण सरकारी भवन हैं और बड़ी संख्या में वीआईपी की आवाजाही रहती है। ऐसे में किसी भी बड़े प्रदर्शन की अनुमति देना सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं माना गया।
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि लाखों छात्र पेपर लीक जैसी घटनाओं से परेशान हैं और उनकी आवाज सरकार तक पहुंचनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखना चाहते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के कारण कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं या दोबारा करानी पड़ीं। इससे लाखों छात्रों का समय और मेहनत दोनों प्रभावित हुए। इसी वजह से युवाओं में नाराजगी बढ़ी है और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग लगातार उठ रही है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर जैसे तय स्थानों पर प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन संसद की ओर मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस ने लोगों से कानून का पालन करने और शांति बनाए रखने की अपील भी की है।
इस पूरे मामले में दो अहम बातें सामने आती हैं। एक ओर युवाओं का कहना है कि उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि संसद सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच बातचीत से समाधान निकलना सबसे बेहतर रास्ता माना जा रहा है।
यदि सरकार छात्रों की मांगों पर खुलकर चर्चा करती है और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाती है, तो इससे युवाओं का भरोसा बढ़ सकता है। वहीं, शांतिपूर्ण बातचीत से किसी भी तरह के टकराव से भी बचा जा सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में सरकार, पुलिस और आंदोलन से जुड़े लोग इस मुद्दे पर क्या फैसला लेते हैं।
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