केंद्र सरकार ने पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं और उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियों के लिए प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) शुरू की है। इस योजना के तहत नए कर्मचारियों को आर्थिक मदद मिलेगी, वहीं कंपनियों को भी नए लोगों की भर्ती करने पर इंसेंटिव दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को नौकरी मिलने में आसानी होगी।
देश में लाखों युवा हर साल अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद पहली नौकरी की तलाश शुरू करते हैं। लेकिन कई बार अनुभव की कमी, सीमित अवसर और दूसरी वजहों से उन्हें नौकरी मिलने में समय लग जाता है। दूसरी ओर कई कंपनियां भी नए लोगों को नौकरी देने से पहले सोचती हैं, क्योंकि उन्हें ट्रेनिंग और शुरुआती खर्च उठाना पड़ता है।
इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) शुरू की है। इस योजना का मकसद पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं और उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियों दोनों को आर्थिक मदद देना है। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं को नौकरी मिलने में आसानी होगी और कंपनियां भी ज्यादा लोगों को काम देने के लिए आगे आएंगी।
क्या है PM-VBRY योजना? प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना यानी PM-VBRY एक ऐसी योजना है, जिसका उद्देश्य देश में रोजगार बढ़ाना है। इसके तहत पहली बार औपचारिक क्षेत्र में नौकरी करने वाले युवाओं को कैश इंसेंटिव दिया जाएगा।
साथ ही जो कंपनियां नए कर्मचारियों को नौकरी देंगी, उन्हें भी सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिलेगी। सरकार का कहना है कि यह योजना रोजगार बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने में भी मदद करेगी।
पहली किस्त में जारी किए गए ₹2,400 करोड़ दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने इस योजना की पहली किस्त के रूप में करीब ₹2,400 करोड़ जारी करने की घोषणा की। यह राशि उन लोगों और कंपनियों तक पहुंचाई जाएगी, जो योजना की शर्तों को पूरा करेंगे। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में इस योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा।
पहली नौकरी करने वालों को कितना मिलेगा? इस योजना के तहत पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को अधिकतम ₹15,000 तक का एकमुश्त कैश इंसेंटिव दिया जाएगा। यह राशि उनकी पहली नौकरी के शुरुआती खर्चों में मदद कर सकती है। कई युवाओं को नई नौकरी के लिए दूसरे शहर जाना पड़ता है। ऐसे में किराया, यात्रा, रहने और दूसरी जरूरी चीजों का खर्च बढ़ जाता है। सरकार का मानना है कि यह आर्थिक मदद युवाओं के लिए राहत का काम करेगी।
कंपनियों को भी मिलेगा फायदा इस योजना का लाभ सिर्फ युवाओं को ही नहीं मिलेगा, बल्कि कंपनियों को भी मिलेगा। अगर कोई कंपनी नए लोगों को नौकरी देती है, तो उसे हर नए कर्मचारी पर हर महीने अधिकतम ₹3,000 तक का इंसेंटिव दिया जाएगा। इससे कंपनियों का शुरुआती खर्च कम होगा और वे ज्यादा लोगों को नौकरी देने के लिए तैयार हो सकती हैं।
किसे मिलेगा योजना का लाभ? यह योजना उन युवाओं के लिए है जो पहली बार औपचारिक क्षेत्र में नौकरी कर रहे हैं। इसके साथ ही उनका नाम ईपीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में दर्ज होना जरूरी होगा। योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को आगे बढ़ाना है, जो पहली बार नौकरी की दुनिया में कदम रख रहे हैं।
क्यों लाई गई यह योजना? पिछले कुछ वर्षों में नौकरी का बाजार कई चुनौतियों से गुजरा है। कोविड महामारी के बाद कई कंपनियों ने नई भर्ती कम कर दी थी। दूसरी ओर लाखों युवा नौकरी की तलाश में थे। ऐसे समय में सरकार लगातार रोजगार बढ़ाने के लिए नई योजनाओं पर काम कर रही है। PM-VBRY भी उसी दिशा में उठाया गया एक कदम माना जा रहा है।
दो साल में रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में करीब 3.5 करोड़ रोजगार अवसरों को बढ़ावा देना है। सरकार का कहना है कि यह योजना इसी बड़े लक्ष्य का हिस्सा है। अगर ज्यादा कंपनियां इस योजना का लाभ लेंगी, तो नए युवाओं को नौकरी मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा ज्यादा लाभ सरकार ने बताया है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए यह इंसेंटिव चार साल तक दिया जाएगा। दूसरे क्षेत्रों के लिए यह सहायता दो साल तक मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे उद्योगों में नई भर्ती बढ़ सकती है और उत्पादन के क्षेत्र में रोजगार के ज्यादा अवसर बन सकते हैं।
युवाओं को कैसे होगा फायदा? पहली नौकरी किसी भी युवा के जीवन का बड़ा कदम होती है। नई नौकरी मिलने पर कई खर्च एक साथ सामने आते हैं। रहने की जगह, यात्रा, खाना, कपड़े और दूसरी जरूरतों पर पैसा खर्च होता है। अगर ऐसे समय में अतिरिक्त ₹15,000 की मदद मिलती है तो यह शुरुआती दिनों में काफी राहत दे सकती है। इससे युवाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ सकता है।
छोटे कारोबारों को भी मिलेगी मदद देश में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ लाखों छोटे और मध्यम कारोबार भी काम करते हैं। कई बार ये कारोबार नए लोगों को नौकरी देना चाहते हैं, लेकिन खर्च ज्यादा होने के कारण भर्ती नहीं कर पाते। अगर सरकार की ओर से इंसेंटिव मिलेगा, तो ऐसे कारोबार भी ज्यादा लोगों को काम देने के बारे में सोच सकते हैं।
अनुभव की कमी की समस्या हो सकती है कम अक्सर देखा जाता है कि कंपनियां अनुभव वाले लोगों को ज्यादा प्राथमिकता देती हैं। ऐसे में नए युवाओं को नौकरी मिलने में कठिनाई होती है। अगर कंपनियों को सरकार की ओर से सहायता मिलेगी, तो वे नए लोगों को भी मौका देने के लिए तैयार हो सकती हैं। इससे फ्रेशर्स के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।
कुछ लोगों ने उठाए सवाल इस योजना को लेकर कुछ लोगों का कहना है कि सिर्फ आर्थिक मदद देना ही काफी नहीं होगा। उनका मानना है कि युवाओं को अच्छी ट्रेनिंग, बेहतर शिक्षा और सही कौशल भी मिलना चाहिए। सरकार का कहना है कि रोजगार योजना को दूसरी स्किल डेवलपमेंट योजनाओं के साथ जोड़कर आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि रोजगार की संख्या और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकें।
देश की अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है फायदा जब ज्यादा लोगों को नौकरी मिलेगी तो उनकी आय बढ़ेगी। आय बढ़ने से लोग ज्यादा खरीदारी करेंगे और बाजार में कारोबार भी बढ़ेगा। इससे उद्योगों को फायदा होगा और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
युवाओं के लिए नई उम्मीद देश के लाखों युवा लंबे समय से अच्छी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में यह योजना उनके लिए नई उम्मीद लेकर आई है। अगर योजना सही तरीके से लागू होती है और ज्यादा कंपनियां इसमें हिस्सा लेती हैं, तो आने वाले समय में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
आगे क्या होगा? अब इस योजना को पूरे देश में लागू किया जाएगा। पात्र युवा और कंपनियां तय नियमों के अनुसार इसका लाभ ले सकेंगी। सरकार समय-समय पर इसकी प्रगति की समीक्षा भी करेगी। अगर योजना का अच्छा असर दिखाई देता है तो भविष्य में इसका दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
फिलहाल PM-VBRY योजना का मुख्य उद्देश्य यही है कि पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को आर्थिक सहारा मिले, कंपनियां नई भर्ती के लिए आगे आएं और देश में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ें।
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