दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट ने खुलासा किया है कि उनकी कंपनी Berkshire Hathaway ने Google की पैरेंट कंपनी Alphabet में 31 अरब डॉलर का निवेश किया है। बफेट का कहना है कि AI की बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने बड़ी टेक कंपनियों के निवेश का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पहले Google में निवेश न करना उनकी बड़ी गलती थी।
दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में गिने जाने वाले वॉरेन बफेट ने पहली बार खुलकर बताया कि उनकी कंपनी Berkshire Hathaway ने Google की पैरेंट कंपनी Alphabet में करीब 31 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। लंबे समय तक टेक कंपनियों से दूरी बनाए रखने वाले बफेट का यह फैसला निवेश जगत में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।
CNBC को दिए एक इंटरव्यू में बफेट ने कहा कि आज AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की दौड़ ने बड़ी टेक कंपनियों को ऐसे खेल में उतार दिया है, जिसे वे शायद खुद भी नहीं खेलना चाहती थीं। लेकिन प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए उनके पास भारी निवेश करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
AI की दौड़ ने बदला खेल बफेट ने कहा कि Google, Microsoft, Amazon और अन्य बड़ी टेक कंपनियां अब डेटा सेंटर, AI चिप्स और नई तकनीकों पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले सॉफ्टवेयर कंपनियों का बिजनेस मॉडल अलग था, लेकिन अब AI की वजह से उन्हें बिजली, रेलवे और यूटिलिटी कंपनियों की तरह भारी पूंजी (Capital Expenditure) लगानी पड़ रही है। बफेट के शब्दों में, "वे अब ऐसा खेल खेल रहे हैं, जिसे वे शायद खेलना नहीं चाहते, लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं है।"
Google में निवेश का फैसला खुद लिया वॉरेन बफेट ने यह भी साफ किया कि Alphabet में निवेश का फैसला उन्होंने खुद लिया था। कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा था कि Berkshire Hathaway के भावी CEO ग्रेग एबेल ने यह निवेश कराया है, लेकिन बफेट ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि यह उनका अपना फैसला था। उन्होंने कहा कि ग्रेग एबेल वही काम करते हैं, जिस पर दोनों की सहमति होती है और दोनों लगातार एक-दूसरे से चर्चा करते रहते हैं।
Google में निवेश न करना बताया बड़ी गलती बफेट ने स्वीकार किया कि कई वर्षों तक Google में निवेश न करना उनकी सबसे बड़ी गलतियों में से एक था। उन्होंने कहा कि पहले वे टेक कंपनियों में निवेश से बचते थे क्योंकि उन्हें उनका बिजनेस मॉडल पूरी तरह समझ नहीं आता था। लेकिन जब उन्होंने देखा कि Google और अन्य बड़ी टेक कंपनियां अब बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और AI चिप्स पर निवेश कर रही हैं, तो उन्हें यह बिजनेस मॉडल अधिक भरोसेमंद लगा। उनके अनुसार यह मॉडल उन उद्योगों जैसा है जिनमें वे दशकों से सफल निवेश करते आए हैं।
Amazon या Microsoft नहीं, Alphabet क्यों? जब बफेट से पूछा गया कि उन्होंने Amazon, Microsoft या अन्य बड़ी टेक कंपनियों की बजाय Alphabet को क्यों चुना, तो उन्होंने किसी भी कंपनी की आलोचना करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि Alphabet का प्रदर्शन और उसका ट्रैक रिकॉर्ड उसे सबसे मजबूत कंपनियों में शामिल करता है। उनका मानना है कि वॉल स्ट्रीट पर मौजूद अधिकांश कंपनियों की तुलना में Google भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है।
Berkshire की बड़ी होल्डिंग्स में शामिल हुआ Alphabet बफेट ने बताया कि Alphabet अब Berkshire Hathaway की सबसे बड़ी निवेश होल्डिंग्स में पांचवें या छठे स्थान पर पहुंच चुका है। कंपनी ने 2025 की तीसरी तिमाही से Alphabet के शेयर खरीदने शुरू किए थे। इसके बाद निवेश लगातार बढ़ता गया और केवल पिछले महीने ही Berkshire Hathaway ने लगभग 10 अरब डॉलर के अतिरिक्त शेयर खरीदे। अब कंपनी का कुल निवेश बढ़कर 31 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
Google के शेयरों में आई तेजी बफेट के बयान के बाद Alphabet के शेयरों में लगभग 4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इस उछाल के कारण Google के सह-संस्थापक लैरी पेज की कुल संपत्ति एक बार फिर 300 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गई। विश्लेषकों का मानना है कि बफेट जैसे दिग्गज निवेशक का समर्थन मिलना Alphabet के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
AI पर Google का भारी निवेश Google की पैरेंट कंपनी Alphabet इस समय AI तकनीक पर सबसे अधिक निवेश करने वाली कंपनियों में शामिल है। कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और नई तकनीकों के विकास के लिए अपने पूंजीगत खर्च (Capex) को बढ़ाकर लगभग 185 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा दिया है। Google के CEO सुंदर पिचाई ने भी पहले स्वीकार किया था कि AI पर इतना बड़ा निवेश चुनौतीपूर्ण है, लेकिन कंपनी को विश्वास है कि वह 2026 में भी तेज़ी से नवाचार जारी रखेगी। उन्होंने कहा था कि AI के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग हो रहे हैं और Google इस प्रतिस्पर्धा में अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
AI की दौड़ में निवेशकों की नई सोच वॉरेन बफेट के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि अब AI केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि निवेश की दुनिया का भी सबसे बड़ा विषय बन चुका है। जो निवेशक पहले टेक कंपनियों से दूरी बनाए रखते थे, वे भी अब AI की वजह से अपना नजरिया बदल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और चिप निर्माण पर भारी निवेश जारी रहेगा और यही कंपनियों की प्रतिस्पर्धा तय करेगा।
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