भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के दो पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने 2018 में Skyroot Aerospace की स्थापना कर भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नई क्रांति की शुरुआत की। 2022 में भारत का पहला निजी रॉकेट विक्रम-एस (Vikram-S) लॉन्च करने के बाद कंपनी अब अपने ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 के जरिए वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में नई पहचान बनाने की तैयारी कर रही है।
भारत में कई दशकों तक अंतरिक्ष कार्यक्रम पूरी तरह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के हाथों में रहा। उपग्रह प्रक्षेपण (Satellite Launch) जैसी सेवाएं सरकारी संस्थान तक सीमित थीं, जिससे लंबी प्रतीक्षा और अधिक लागत जैसी चुनौतियां सामने आती थीं। लेकिन अब भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस बदलाव के केंद्र में हैं ISRO के दो पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका। दोनों वैज्ञानिकों ने वर्ष 2018 में हैदराबाद में Skyroot Aerospace की स्थापना की। उनका उद्देश्य था कि उपग्रह लॉन्च करना भविष्य में उतना ही आसान और किफायती बने, जितना किसी व्यावसायिक विमान की टिकट बुक करना।
ISRO से स्टार्टअप तक का सफर ISRO में वर्षों तक काम करने के बाद पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में संभावनाएं देखीं और अपना स्टार्टअप शुरू करने का फैसला लिया। आज पवन कुमार चंदाना कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं, जबकि नागा भरत डाका मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दोनों के नेतृत्व में Skyroot Aerospace में अब 1,000 से अधिक विशेषज्ञ काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों ने ISRO के वर्षों के अनुभव को स्टार्टअप की नई सोच और तेज कार्यशैली के साथ जोड़कर भारत के निजी स्पेस सेक्टर को नई दिशा दी है।
2022 में रचा इतिहास Skyroot Aerospace ने वर्ष 2022 में 'मिशन प्रारंभ (Mission Prarambh)' के तहत विक्रम-एस (Vikram-S) नामक भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह उपलब्धि इसलिए ऐतिहासिक मानी गई क्योंकि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने खुद का रॉकेट विकसित कर सफल लॉन्च किया। इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि भारतीय निजी कंपनियां भी विश्वस्तरीय अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने में सक्षम हैं।
तकनीकी उपलब्धियों की लंबी सूची Skyroot Aerospace ने सिर्फ विक्रम-एस तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। 2020 में कंपनी ने भारत का पहला निजी रॉकेट इंजन रमन-1 (Raman-1) का सफल परीक्षण किया। 2021 में कंपनी ने धवन-1 (Dhawan-1) नामक क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया। इसके बाद कंपनी ने अपने प्रमुख ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 (Vikram-1) के लिए कई महत्वपूर्ण तकनीकी परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरे किए। इन उपलब्धियों ने Skyroot Aerospace को दुनिया की तेजी से उभरती अंतरिक्ष कंपनियों में शामिल कर दिया है।
वैश्विक निवेशकों का मिला भरोसा कंपनी की लगातार सफलताओं के चलते कई बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने भी इसमें निवेश किया। Skyroot Aerospace ने अब तक 160 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग जुटाई है। इसमें दुनिया की प्रतिष्ठित निवेश कंपनियां GIC और Temasek भी शामिल हैं। इस निवेश के बाद कंपनी का मूल्यांकन (Valuation) बढ़कर 1.
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1 अरब अमेरिकी डॉलर (1. 1 Billion Dollar) तक पहुंच गया है, जिससे Skyroot भारत की प्रमुख स्पेस स्टार्टअप कंपनियों में शामिल हो गई है।
विक्रम-1 से नई उम्मीदें अब कंपनी की सबसे बड़ी उम्मीद विक्रम-1 मिशन से जुड़ी है। यह Skyroot का पहला ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है, जिसे व्यावसायिक उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है। कंपनी का मानना है कि यदि यह मिशन सफल रहता है तो भारत वैश्विक स्तर पर कम लागत में उपग्रह प्रक्षेपण सेवाएं देने वाले प्रमुख देशों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।
भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए नई शुरुआत भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद Skyroot Aerospace जैसी कंपनियों को तेजी से आगे बढ़ने का अवसर मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने यह साबित कर दिया है कि भारत केवल सरकारी अंतरिक्ष कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी कंपनियां भी वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। उनकी सफलता आने वाले वर्षों में भारत को दुनिया का प्रमुख और किफायती सैटेलाइट लॉन्च हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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