कनाडा में लगी भीषण जंगलों की आग का धुआं अब अमेरिका के कई राज्यों तक पहुंच गया है। 20 से ज्यादा राज्यों में हवा की गुणवत्ता खराब होने के कारण एयर क्वालिटी अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को मास्क पहनने, बाहर कम निकलने और बच्चों व बुजुर्गों का खास ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
कनाडा के कई इलाकों में लगी भीषण जंगलों की आग अब सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रही है। इन आग से उठने वाला घना धुआं हजारों किलोमीटर का सफर तय करके अमेरिका के उत्तर-पूर्व और मिडवेस्ट इलाके तक पहुंच गया है। इससे वहां की हवा काफी खराब हो गई है और लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के 20 से ज्यादा राज्यों में एयर क्वालिटी अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो मास्क पहनें और लंबे समय तक खुले में रहने से बचें।
दूसरी बार धुएं की चादर में ढके कई इलाके यह पहली बार नहीं है जब कनाडा की आग का असर अमेरिका तक पहुंचा है। इससे पहले भी जंगलों की आग का धुआं कई अमेरिकी राज्यों में फैल चुका है। एक बार फिर कई बड़े शहर धुएं की मोटी परत से ढक गए हैं।
धुएं की वजह से कई जगह आसमान साफ दिखाई नहीं दे रहा। दूर की इमारतें और ऊंची इमारतों की पहचान करना मुश्किल हो गया है। लोगों को ऐसा महसूस हो रहा है जैसे पूरे शहर पर धुंध छा गई हो, जबकि इसकी वजह धुआं है।
हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर धुएं के कारण कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कई जगह PM 2.5 का स्तर काफी बढ़ गया है। यह हवा में मौजूद बहुत छोटे धूल और धुएं के कण होते हैं, जो सांस के साथ शरीर के अंदर चले जाते हैं।
जब इनकी मात्रा ज्यादा हो जाती है तो लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा? डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि खराब हवा का असर सबसे ज्यादा बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ सकता है। जिन लोगों को अस्थमा, सांस की बीमारी या दिल से जुड़ी समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। छोटे बच्चों की सांस लेने की क्षमता भी कम होती है, इसलिए उन्हें ज्यादा समय तक बाहर नहीं रहने की सलाह दी गई है। बुजुर्गों को भी घर के अंदर रहने और जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकलने को कहा गया है।
लोगों को क्या सलाह दी गई? प्रशासन ने लोगों से कहा है कि हवा खराब होने के दौरान जितना हो सके घर के अंदर रहें। अगर बाहर निकलना जरूरी हो तो अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क पहनें।
बच्चों को पार्क या खुले मैदान में खेलने से बचाने की सलाह दी गई है। जिन लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो, उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने को कहा गया है। खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने की भी सलाह दी गई है ताकि धुआं घर के अंदर कम पहुंचे।
अभी भी कई जगह जल रहे हैं जंगल कनाडा और अमेरिका दोनों देशों में अभी भी कई बड़ी जंगलों की आग सक्रिय हैं। अमेरिका में 15 राज्यों में 60 से ज्यादा बड़ी आग की घटनाएं चल रही हैं। इन आग पर काबू पाने के लिए सैकड़ों फायरफाइटर्स लगातार काम कर रहे हैं। कई हेलीकॉप्टर और विमान भी आग बुझाने के अभियान में लगाए गए हैं। आग कई इलाकों में तेजी से फैल रही है, जिससे राहत और बचाव का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
धुएं का असर हजारों किलोमीटर दूर तक जंगलों की आग से उठने वाला धुआं केवल आग वाले इलाके तक सीमित नहीं रहता। तेज हवाओं के कारण यह धुआं हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि कनाडा में लगी आग का असर अमेरिका के कई बड़े शहरों में दिखाई दे रहा है। कई जगह सुबह और शाम के समय धुएं की मात्रा और ज्यादा महसूस की जा रही है।
यात्रा और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर जब हवा की गुणवत्ता खराब होती है तो लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होती है। कई लोग सुबह की सैर, दौड़ और अन्य बाहरी गतिविधियां रोक देते हैं।
खुले में काम करने वाले मजदूरों, डिलीवरी कर्मियों, सफाई कर्मचारियों और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। उन्हें लंबे समय तक खराब हवा में काम करना पड़ता है। कई जगह स्कूलों और खेल गतिविधियों में भी बदलाव किया जा सकता है ताकि बच्चों की सेहत पर बुरा असर न पड़े।
पर्यटन और कारोबार पर भी असर धुएं के कारण कई इलाकों में लोगों की आवाजाही कम हो जाती है। पर्यटक ऐसे स्थानों पर जाने से बचते हैं जहां हवा खराब हो। इसका असर होटल, रेस्तरां और स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है। खुले मैदानों में होने वाले कार्यक्रमों पर भी असर देखने को मिलता है। अगर धुआं लंबे समय तक बना रहे तो हवाई यात्रा और अन्य सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
जंगलों की आग क्यों बढ़ रही है? पिछले कुछ वर्षों में उत्तरी अमेरिका में जंगलों की आग की घटनाएं पहले की तुलना में ज्यादा देखने को मिल रही हैं। कई रिपोर्टों में सूखा, बढ़ता तापमान और जलवायु परिवर्तन को इसके बड़े कारणों में शामिल किया गया है।
जब लंबे समय तक बारिश नहीं होती और मौसम ज्यादा गर्म रहता है, तब जंगलों में पेड़-पौधे जल्दी सूख जाते हैं। ऐसे में छोटी सी चिंगारी भी बड़ी आग का रूप ले सकती है। एक बार आग फैलने के बाद तेज हवा उसे और तेजी से आगे बढ़ा देती है। इसी कारण कई बार आग पर जल्दी काबू पाना मुश्किल हो जाता है।
पर्यावरण पर पड़ रहा है असर जंगलों की आग से बड़ी संख्या में पेड़-पौधे जल जाते हैं। इससे वन्य जीवों का प्राकृतिक घर भी नष्ट हो जाता है। कई जानवर सुरक्षित जगह की तलाश में जंगल छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।
आग से निकलने वाला धुआं हवा को प्रदूषित करता है, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। लंबे समय तक ऐसी घटनाएं होती रहें तो उनका असर मौसम और प्रकृति दोनों पर पड़ सकता है।
लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों की आग अब केवल पर्यावरण की समस्या नहीं रह गई है। इसका असर सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।
खराब हवा के कारण आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। जिन लोगों को पहले से बीमारी है, उनके लिए यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रहा है।
फिलहाल क्या स्थिति है? कनाडा और अमेरिका में कई जगह जंगलों की आग पर काबू पाने का प्रयास जारी है। फायरफाइटर्स लगातार आग बुझाने में जुटे हुए हैं, लेकिन कई इलाकों में आग अभी भी सक्रिय है।
जब तक आग पूरी तरह नहीं बुझती और धुआं कम नहीं होता, तब तक कई अमेरिकी राज्यों में हवा की गुणवत्ता प्रभावित रह सकती है। प्रशासन लोगों से लगातार सरकारी सलाह का पालन करने और अपनी सेहत का ध्यान रखने की अपील कर रहा है।
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