भारत-यूके CETA समझौते के लागू होने के पहले ही दिन भारत से ब्रिटेन को 140 मिलियन डॉलर से अधिक के सामान ड्यूटी फ्री भेजे गए। 50 से ज्यादा निर्यात खेपों में इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, जेम्स-ज्वेलरी और अन्य उत्पाद शामिल रहे। समझौते के तहत करीब 99% भारतीय निर्यात को ब्रिटेन में शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे भारतीय कंपनियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा सरकारी खरीद, MSME, पर्यावरण और श्रम से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) लागू होने के पहले ही दिन भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिला। भारत से 50 से अधिक निर्यात खेपों में करीब 140 मिलियन डॉलर मूल्य के सामान ब्रिटेन भेजे गए, जिन पर शून्य शुल्क का लाभ मिला। यह समझौता बुधवार से लागू हुआ है, जिसके तहत भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का कहना है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे और भारतीय उद्योगों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
भारत-यूके CETA लागू, निर्यातकों को मिला शुरुआती फायदा भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (Comprehensive Economic and Trade Agreement) के लागू होने के पहले दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से 50 से ज्यादा निर्यात खेप ब्रिटेन के लिए रवाना की गईं। इनकी कुल कीमत 140 मिलियन डॉलर से अधिक बताई गई है। ये खेप 20 से ज्यादा बंदरगाहों, हवाई अड्डों, इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD), विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से भेजी गईं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, रत्न एवं आभूषण समेत कई उत्पाद शामिल थे। मुख्य निर्यात केंद्रों में मुंद्रा, न्हावा शेवा, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद शामिल रहे।
करीब 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को मिलेगा लाभ इस व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन के बाजार में भारत के करीब 99 प्रतिशत निर्यात को ड्यूटी फ्री पहुंच मिलेगी। इससे चमड़ा, फुटवियर, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, प्लास्टिक, बेस मेटल, समुद्री उत्पाद और जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है। पहले इन उत्पादों पर ब्रिटेन में 2 से 16 प्रतिशत तक शुल्क लगता था। शुल्क हटने से भारतीय कंपनियों को ब्रिटिश बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाएगा और भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने बताया कि इस समझौते को अंतिम रूप देने से पहले 14 दौर की बातचीत में 800 से ज्यादा तकनीकी बैठकें हुई थीं।
सरकारी खरीद बाजार में भी बढ़ेंगे अवसर भारत-यूके व्यापार समझौते में सरकारी खरीद (Government Procurement) से जुड़ा प्रावधान भी शामिल है। इसके तहत भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन के करीब 90 अरब पाउंड (लगभग 122 अरब डॉलर) के सरकारी खरीद बाजार तक कानूनी पहुंच मिलेगी। इसके बदले भारत ने ब्रिटेन की कंपनियों के लिए करीब 114 अरब डॉलर के सरकारी खरीद अवसर उपलब्ध कराए हैं। हालांकि, इस व्यवस्था में कई सुरक्षा प्रावधान भी रखे गए हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन के अनुसार, छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) के हितों को सुरक्षित रखने के लिए समझौते में विशेष उपाय शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी खरीद के नियम सभी विभागों और संस्थानों पर लागू नहीं होंगे। कुछ रणनीतिक क्षेत्रों में ब्रिटिश कंपनियों की भागीदारी की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, केंद्र सरकार के स्तर पर भी कुछ तय संस्थाओं और सीमाओं के ऊपर ही यह व्यवस्था लागू होगी।
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IPR और पेटेंट नियमों पर भारत की स्थिति स्पष्ट बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) से जुड़े मुद्दों पर सरकार ने कहा है कि समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो भारत को सार्वजनिक हित में अनिवार्य लाइसेंस (Compulsory Licensing) का इस्तेमाल करने से रोके। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत किसी देश की सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे विशेष हालात में पेटेंट उत्पाद के उत्पादन की अनुमति दे सकती है। भारत ने अब तक केवल एक बार कैंसर की दवा नेक्सावर के मामले में अनिवार्य लाइसेंस जारी किया था।
कार्बन टैक्स को लेकर बातचीत जारी ब्रिटेन की ओर से प्रस्तावित कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को लेकर भारत और ब्रिटेन के बीच चर्चा जारी है। ब्रिटेन ने 2027 से आयरन-स्टील, एल्युमीनियम, उर्वरक और सीमेंट जैसे उत्पादों पर कार्बन टैक्स लगाने की योजना घोषित की है। इससे भारतीय निर्यात पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है। सरकार का कहना है कि यदि भविष्य में ब्रिटेन के किसी कार्बन टैक्स से भारतीय निर्यात प्रभावित होता है तो भारत अपने हितों की रक्षा के लिए समझौते में दिए गए विकल्पों का इस्तेमाल कर सकता है।
श्रम, पर्यावरण और MSME नियमों पर भी प्रावधान समझौते में जेंडर, छोटे एवं मध्यम उद्योग (SME), पर्यावरण और श्रम से जुड़े अध्याय भी शामिल किए गए हैं। सरकार के अनुसार, इन प्रावधानों के तहत कोई अलग विवाद निपटारा व्यवस्था नहीं है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि भारत की मौजूदा नीतियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं और इन प्रावधानों से देश की नीति बनाने की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होगी। ब्रिटिश हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने कहा कि लंबे समय में यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब पाउंड से अधिक बढ़ाने में मदद कर सकता है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को इससे सालाना करीब 5 अरब पाउंड का फायदा होने का अनुमान जताया गया है।
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