तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु बिजली प्लांट से जुड़ी कुछ फाइलें इंटरनेट पर लीक होने का मामला सामने आया है। रिलायंस ग्रुप ने अपने सर्वर से आंशिक डेटा लीक की पुष्टि की है, जबकि सरकारी एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। अभी तक प्लांट के मुख्य सिस्टम पर किसी तरह के असर की पुष्टि नहीं हुई है।
तमिलनाडु में बने भारत के सबसे बड़े परमाणु बिजली प्लांट कुडनकुलम से जुड़ी कुछ फाइलें इंटरनेट पर सामने आने के बाद चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि एक हैकर ग्रुप ने प्लांट से जुड़ी कई फाइलें ऑनलाइन डाल दी हैं। इन फाइलों में प्लांट के कुछ नक्शे, सामान देने वाली कंपनियों की जानकारी और कुछ जरूरी कागज शामिल होने की बात कही गई है।
हालांकि, अभी तक यह पूरी तरह साफ नहीं हुआ है कि ऑनलाइन डाली गई सभी फाइलें असली हैं या नहीं। इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्लांट से जुड़े अधिकारी और साइबर टीम यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस घटना से कितना नुकसान हुआ है।
कुडनकुलम प्लांट से जुड़ी फाइलें इंटरनेट पर आईं रिपोर्ट के अनुसार, "वर्ल्ड लीक्स" नाम के एक हैकर ग्रुप ने डार्क वेब पर कई फाइलें शेयर की हैं। इस ग्रुप ने दावा किया है कि ये फाइलें रिलायंस ग्रुप से जुड़ी हैं।
रिलायंस ग्रुप कुडनकुलम प्लांट की कुछ परियोजनाओं पर काम कर रहा है। हैकर ग्रुप ने दावा किया कि उसने बड़ी संख्या में फाइलें हासिल की हैं।
इन फाइलों में प्लांट के कुछ हिस्सों के नक्शे, काम से जुड़े कागज, सप्लायर की जानकारी और मीटिंग से जुड़े दस्तावेज होने की बात कही गई है। हालांकि, इन फाइलों की सच्चाई की अभी पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है।
रिलायंस ने मानी कुछ डेटा लीक की बात रिलायंस ग्रुप ने बताया कि उसके एक सर्वर से कुछ जानकारी बाहर जाने की घटना सामने आई है। कंपनी ने इसे एक छोटी घटना बताया है और इसकी जानकारी सरकार को दे दी गई है।
कंपनी ने यह नहीं बताया कि कौन-कौन सी जानकारी बाहर गई है। अभी इस मामले की जांच चल रही है।
जिस सर्वर पर यह घटना हुई थी, वह योट्टा नाम की एक डेटा सेंटर कंपनी का था। योट्टा ने बताया कि 29 मई को उसके सर्वर पर कुछ गलत गतिविधि दिखाई दी थी।
कंपनी ने कहा कि उसने तुरंत उस गतिविधि को रोक दिया था। बाद में रिलायंस की तरफ से जून के आखिर में जानकारी दी गई कि कुछ बाहरी लोगों ने डेटा चोरी का दावा किया है।
प्लांट की सुरक्षा को लेकर चिंता परमाणु बिजली प्लांट देश के लिए बहुत जरूरी होते हैं। ऐसे प्लांट से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रखना बहुत जरूरी होता है। जानकारों का कहना है कि अगर ऐसी जानकारी गलत लोगों के हाथ लग जाए तो उसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि, अभी तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि प्लांट के मुख्य मशीन सिस्टम या बिजली बनाने वाले असली सिस्टम को नुकसान पहुंचा है।
बताया गया है कि लीक हुई फाइलों में प्लांट के कुछ दूसरे हिस्सों की जानकारी हो सकती है। इनमें प्लांट की ठंडा रखने वाली व्यवस्था, हवा आने-जाने की व्यवस्था और कुछ कमरों के नक्शे शामिल हो सकते हैं।
कुडनकुलम प्लांट भारत के लिए क्यों जरूरी है? कुडनकुलम परमाणु बिजली प्लांट तमिलनाडु में स्थित है। यह भारत के सबसे बड़े बिजली प्लांटों में से एक है।
इस प्लांट की मदद से देश को बड़ी मात्रा में बिजली मिलती है। भारत आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।
कुडनकुलम की पहली और दूसरी यूनिट पहले से बिजली बना रही हैं। वहीं तीसरी और चौथी यूनिट पर काम चल रहा है। इन दोनों नई यूनिट से करीब 2000 मेगावाट बिजली बनाने की योजना है। इनके शुरू होने से देश की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
भारत में बढ़ रहे हैं ऑनलाइन हमले आज के समय में इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ऑनलाइन चोरी के मामले भी बढ़ रहे हैं। कई कंपनियों और संस्थानों पर हैकर हमला करके उनकी जानकारी चोरी करने की कोशिश करते हैं।
ऐसे हमलों से बचने के लिए कंपनियों को अपने कंप्यूटर सिस्टम और जानकारी की सुरक्षा मजबूत करनी पड़ती है। कई बार कंपनियों को समय पर पता भी नहीं चलता कि उनकी जानकारी चोरी हो चुकी है। इसलिए नियमित जांच और सावधानी रखना बहुत जरूरी है।
पहले भी सामने आया था ऐसा मामला कुडनकुलम प्लांट से जुड़ा साइबर मामला पहले भी सामने आ चुका है। साल 2019 में प्लांट के एक कंप्यूटर नेटवर्क में खराब सॉफ्टवेयर मिलने की बात सामने आई थी। उस समय अधिकारियों ने कहा था कि प्लांट के मुख्य सिस्टम पर इसका कोई असर नहीं पड़ा था। इस बार भी अधिकारी जांच कर रहे हैं कि डेटा कैसे बाहर गया और इसके पीछे कौन लोग हैं।
जांच में जुटी एजेंसियां इस मामले की जांच में भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी भी शामिल है। कुडनकुलम प्लांट चलाने वाली संस्था और रिलायंस के बीच इस मामले को लेकर बातचीत चल रही है।
जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कितनी जानकारी बाहर गई है और क्या इससे प्लांट की सुरक्षा पर कोई असर पड़ा है। अभी तक यह साफ नहीं है कि चोरी हुई जानकारी का इस्तेमाल किसी गलत काम के लिए किया गया है या नहीं।
आगे क्या होगा? फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह घटना कैसे हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाने होंगे। कुडनकुलम जैसे बड़े प्लांट की सुरक्षा सिर्फ बाहर से ही नहीं बल्कि कंप्यूटर और इंटरनेट सिस्टम से भी जुड़ी होती है। इसलिए आने वाले समय में डिजिटल सुरक्षा पर और ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि इस डेटा लीक का असली असर कितना बड़ा था।
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