अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। अमेरिका का कहना है कि ICC को अमेरिकी सैनिकों और अधिकारियों पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है और यह देश की संप्रभुता के लिए खतरा है। इस मामले में अमेरिका ICC अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने और दूसरे देशों से भी ICC का समर्थन नहीं करने की अपील करने की तैयारी कर रहा है।
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि ICC अमेरिकी अधिकारियों और सैनिकों पर कार्रवाई करने की कोशिश कर रहा है, जो देश की आजादी और अधिकारों के लिए खतरा है।
अमेरिका ने ICC के खिलाफ कई तरह के कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसमें ICC अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने और दूसरे देशों को ICC से दूरी बनाने के लिए मनाने की योजना शामिल है।
ट्रंप प्रशासन ने ICC पर उठाए सवाल अमेरिकी प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। अमेरिका का कहना है कि ICC को अमेरिकी नागरिकों और अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस मामले में सरकार की योजना सामने रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठा रहा है।
अमेरिका का तर्क है कि उसने ICC बनाने वाली रोम संविधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए इस अदालत के फैसले या जांच का अधिकार अमेरिका पर लागू नहीं होना चाहिए।
ICC क्या है और अमेरिका को आपत्ति क्यों है? अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय यानी ICC दुनिया की एक ऐसी अदालत है, जो गंभीर अपराधों जैसे युद्ध अपराध, नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों की जांच करती है।
इस अदालत की स्थापना रोम संविधि के तहत हुई थी। कई देश इसके सदस्य हैं और जरूरत पड़ने पर यह अदालत मामलों की जांच कर सकती है।
अमेरिका का कहना है कि ICC को उन देशों के लोगों पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए, जो इसके सदस्य नहीं हैं। अमेरिकी सरकार को डर है कि भविष्य में ICC अमेरिकी सैनिकों और अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने दी जानकारी मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिकी सरकार ICC की गतिविधियों को रोकने के लिए कई कदम उठाएगी। उन्होंने बताया कि अमेरिका दूसरे देशों से भी बातचीत करेगा और उनसे अमेरिकी नागरिकों पर ICC के अधिकार को स्वीकार नहीं करने की अपील करेगा।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, जिन देशों में अमेरिकी सेना मौजूद है या जो अमेरिका से सुरक्षा मदद लेते हैं, उनसे भी इस मुद्दे पर बातचीत की जाएगी।
अमेरिका उन देशों पर नजर रखेगा जो ICC का समर्थन करते रहेंगे। हालांकि, इस बारे में अभी आगे की कार्रवाई की पूरी जानकारी नहीं दी गई है।
ICC अधिकारियों पर लग सकते हैं प्रतिबंध अमेरिका ने ICC से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही है। इसमें कुछ अधिकारियों के वीजा रद्द करना, यात्रा पर रोक लगाना और अन्य प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं।
अमेरिकी सरकार का कहना है कि वह अपने कानून और अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह कदम उठा रही है। अमेरिका पहले भी ICC के कुछ फैसलों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करता रहा है। अब ट्रंप प्रशासन ने इस मामले को और आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
रुबियो ने ICC पर लगाए गंभीर आरोप मार्को रुबियो ने एक वीडियो संदेश में ICC की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका में लोग अपने नेताओं को चुनते हैं और अपने कानून खुद बनाते हैं।
उनका कहना है कि किसी भी अमेरिकी नागरिक पर फैसला लेने का अधिकार अमेरिकी व्यवस्था के पास होना चाहिए। रुबियो ने ICC को ऐसी संस्था बताया जो बिना चुने गए अधिकारियों के जरिए काम करती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी कानूनी व्यवस्था में बाहरी दखल को स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर ICC अमेरिकी लोगों पर अपना अधिकार लागू करने की कोशिश करेगा तो अमेरिका अपने पास मौजूद सभी साधनों का इस्तेमाल करेगा।
अफगानिस्तान जांच का भी किया जिक्र अमेरिकी विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना से जुड़े मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ICC की जांच अमेरिका के लिए चिंता का कारण बनी थी।
अमेरिका का कहना है कि इस तरह की जांच से उसके सैनिकों और अधिकारियों पर दूसरे देश की अदालत का असर पड़ सकता है। अमेरिकी सरकार लंबे समय से यह कहती रही है कि उसके नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार अमेरिकी कानून के तहत होना चाहिए।
अमेरिका और ICC के बीच पुराना विवाद अमेरिका और ICC के बीच विवाद नया नहीं है। अमेरिका ने हमेशा ICC के अधिकारों को लेकर सावधानी बरती है।
अमेरिकी सरकार का कहना रहा है कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत को उन देशों के लोगों पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं होना चाहिए, जिन्होंने इस अदालत को मान्यता नहीं दी है।
वहीं ICC का उद्देश्य दुनिया में बड़े अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करना है। ICC समर्थक देशों का कहना है कि ऐसी अदालत से गंभीर अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलती है।
दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है असर अमेरिका के इस कदम का असर दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। अमेरिका कई देशों के साथ सुरक्षा और आर्थिक संबंध रखता है। अगर अमेरिका दूसरे देशों से ICC को लेकर अपनी नीति बदलने को कहता है तो इससे अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा बढ़ सकती है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि कितने देश अमेरिका की इस अपील का समर्थन करेंगे।
आगे क्या कदम उठा सकता है अमेरिका? ट्रंप प्रशासन ने ICC के खिलाफ कार्रवाई की योजना तो बताई है, लेकिन इसके पूरे असर के बारे में अभी जानकारी सामने नहीं आई है। अमेरिका आगे ICC अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने और दूसरे देशों के साथ बातचीत बढ़ाने जैसे कदम उठा सकता है।
फिलहाल यह मामला अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के बीच बढ़ते मतभेद को दिखाता है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और फैसले सामने आ सकते हैं।
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