SBI Funds Management का IPO 14 जुलाई से खुला है, जिसमें निवेशक देश की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी में हिस्सेदारी खरीद सकते हैं। कंपनी करीब 15.3% बाजार हिस्सेदारी के साथ 12.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति मैनेज करती है। IPO में SBI और Amundi अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं, जबकि कंपनी कोई नया पैसा नहीं जुटा रही है। मजबूत मुनाफे और कम लागत वाले बिजनेस मॉडल के बावजूद कंपनी को कम फीस वाले पैसिव फंड और नए नियामकीय बदलावों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
भारत की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी SBI Funds Management का IPO 14 जुलाई से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है और निवेशक इसमें 16 जुलाई तक बोली लगा सकेंगे। यह IPO इसलिए खास है क्योंकि करोड़ों भारतीय जिस SBI Mutual Fund में SIP या एकमुश्त निवेश करते हैं, अब उसी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने का मौका मिल रहा है।
SBI Funds Management देश के म्यूचुअल फंड बाजार की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है। कंपनी करीब 15.3% बाजार हिस्सेदारी के साथ इस क्षेत्र में सबसे आगे है। इसके बाद बड़े नामों में HDFC और ICICI जैसे फंड हाउस आते हैं। SBI Funds Management लगभग 12.5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति मैनेज करती है।
इस IPO में कंपनी कोई नया पैसा नहीं जुटा रही है। यानी नए शेयर जारी नहीं किए जा रहे हैं। SBI और फ्रांस की एसेट मैनेजमेंट कंपनी Amundi अपनी मौजूदा हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच रही हैं। SBI के पास कंपनी में करीब 62% हिस्सेदारी है और वह IPO के जरिए अपनी हिस्सेदारी कम करेगी। Amundi भी अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचेगी।
कंपनी के लिए यह कदम इसलिए संभव है क्योंकि उसे कारोबार बढ़ाने के लिए नए फंड की जरूरत नहीं है। म्यूचुअल फंड बिजनेस में बड़ी कंपनियों के लिए सबसे अहम चीज होती है कि वे कितनी बड़ी रकम मैनेज कर रही हैं। जितनी ज्यादा संपत्ति कंपनी संभालती है, उतना ही कम लागत के मुकाबले ज्यादा मुनाफा कमाने का मौका मिलता है।
SBI Funds Management का बिजनेस मॉडल इसी पैमाने पर काम करता है। म्यूचुअल फंड कंपनियों को फैक्ट्री या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती। वे निवेशकों से पैसा जुटाती हैं, अलग-अलग योजनाओं में निवेश करती हैं और इसके बदले एक फीस लेती हैं।
कंपनी के आंकड़े भी इसकी मजबूती दिखाते हैं। पिछले साल SBI Funds Management ने करीब 4,389 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया और इसमें से लगभग 3,067 करोड़ रुपये मुनाफे के रूप में बचा। कंपनी का मुनाफा मार्जिन करीब 70% रहा। कुछ साल पहले कंपनी का मुनाफा 2,073 करोड़ रुपये था।
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कंपनी की बड़ी ताकत उसका कम खर्च वाला ढांचा है। SBI Funds Management की ऑपरेटिंग लागत उसकी मैनेज की जा रही कुल संपत्ति का करीब 0.08% है, जो देश के बड़े 10 फंड हाउसों में सबसे कम है। अन्य बड़ी कंपनियों की लागत लगभग 0.10% से 0.25% के बीच रहती है।
लेकिन कंपनी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। म्यूचुअल फंड उद्योग में अब निवेशक कम लागत वाले पैसिव फंड जैसे इंडेक्स फंड और ETF की तरफ बढ़ रहे हैं। इन फंड्स में फंड मैनेजर की सक्रिय भूमिका कम होती है और फीस भी काफी कम होती है। कुछ पैसिव फंड की फीस 0.04% तक है।
SBI इस बदलाव से पूरी तरह बाहर नहीं है। कंपनी भारत की सबसे बड़ी पैसिव फंड मैनेजर भी है और इस बाजार में उसकी हिस्सेदारी करीब 28% है। लेकिन समस्या यह है कि अगर निवेशक ज्यादा फीस वाले एक्टिव फंड से कम फीस वाले पैसिव फंड में जाते हैं, तो कंपनी की हर रुपये पर होने वाली कमाई घट सकती है।
इसके अलावा म्यूचुअल फंड फीस को कम करने के लिए नियामकीय बदलाव भी कंपनियों के लिए चुनौती बन सकते हैं। SBI Funds Management ने भी माना है कि नए नियमों के कारण उसकी कमाई पर दबाव आ सकता है और उसे अपने खर्चों के ढांचे में बदलाव करना पड़ सकता है।
IPO का मूल्यांकन भी निवेशकों के लिए अहम सवाल है। SBI Funds Management ने अपने शेयर का प्राइस बैंड 545 रुपये से 574 रुपये तय किया है। ऊपरी कीमत पर कंपनी का मूल्यांकन करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये बैठता है, जो भारत की किसी भी एसेट मैनेजमेंट कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा वैल्यूएशन है।
SBI Funds Management का कारोबार मजबूत है और कंपनी के पास बड़ा ग्राहक आधार है। लेकिन IPO में निवेश करने वालों के लिए कंपनी की मौजूदा मजबूती के साथ भविष्य में फीस घटने और मार्जिन पर पड़ने वाले असर को भी समझना जरूरी होगा।
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