दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के बीच पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 15वां दिन पूरा हो गया है। डॉक्टरों के अनुसार उनका 7.8 किलो वजन कम हो चुका है और उनका ब्लड प्रेशर भी गिर गया है। कई विपक्षी नेताओं ने आंदोलन का समर्थन करते हुए निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रभावित छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। CJP ने 20 जुलाई को संसद मार्च का भी ऐलान किया है।
प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का 15वां दिन पूरा हो गया है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी तबीयत पहले से अधिक खराब हो गई है। उनका रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) घटकर 104/66 mmHg रह गया है और भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से उनका करीब 7.8 किलोग्राम वजन कम हो चुका है। यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा है, जहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कथित परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। यह प्रदर्शन अब अपने 23वें दिन में पहुंच चुका है।
कई नेताओं ने दिया समर्थन रविवार को समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज आंदोलन में शामिल हुए। इसके अलावा केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा तथा पूर्व मंत्री के.एन. बालगोपाल और पी. राजीव ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य रिपोर्ट साझा करते हुए लिखा, "सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 15वां दिन। आखिर सरकार कब जागेगी?"
परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग सभा को संबोधित करते हुए के. के.
शैलजा ने कहा कि वे सभी इस आंदोलन के समर्थन में आए हैं क्योंकि यह देश के छात्रों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा कि देश में निष्पक्ष और पारदर्शी प्रवेश परीक्षा प्रणाली होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक शिक्षा मंत्रालय की जानकारी के बिना संभव नहीं हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यह एक बड़ा घोटाला है और प्रश्नपत्र लीक करके छात्रों का भविष्य बेचा जा रहा है। शैलजा ने यह भी कहा कि इस मामले से जुड़े तनाव के कारण 20 छात्रों ने आत्महत्या की है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मृत छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए और भविष्य में निष्पक्ष एवं जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
छात्रों का भी जारी है अनशन CJP ने बताया कि लोकसभा के सबसे युवा सांसदों में शामिल पुष्पेंद्र सरोज जंतर-मंतर पहुंचे और लगातार हो रहे पेपर लीक तथा परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठा रहे छात्रों का समर्थन किया। अभिजीत दिपके ने आंदोलन स्थल की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि 23वें दिन जंतर-मंतर लोगों से खचाखच भरा हुआ है। इसी दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्य नेहा, मनीष, दीपक कुमार वर्मा और आमीन भी अलग मंच पर अपनी भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं।
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लोगों से खुद आगे आने की अपील शनिवार को सोनम वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से कहा था कि वे किसी और में नायक न तलाशें। उन्होंने कहा, "मैं कोई आधुनिक गांधी या हीरो नहीं हूं। मैं सिर्फ एक सामान्य नागरिक हूं। हर व्यक्ति को अपने जीवन का हीरो खुद बनना चाहिए और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।" उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने की भी अपील की।
CJP की मुख्य मांगें CJP की मांग है कि कथित NEET पेपर लीक मामले की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। साथ ही पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। संगठन ने घोषणा की है कि 20 जुलाई, यानी संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, संसद मार्च निकाला जाएगा। यह आंदोलन 20 जून को शुरू हुआ था, जबकि सोनम वांगचुक 28 जून को इसमें शामिल हुए और तभी से वे लगातार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
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