हरारे में खेले गए दूसरे वनडे में जिम्बाब्वे ने 13 रन से जीत दर्ज कर सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली। बेन करन की नाबाद 111 रन की पारी मैच का सबसे बड़ा अंतर साबित हुई। तंजीद (57) और तौहीद हृदॉय (60) ने अच्छी साझेदारी की, लेकिन दोनों अर्धशतक के बाद आउट हो गए। तंजीद ने कहा कि बांग्लादेश को बेन करन से सीखना चाहिए, जिन्होंने आखिरी गेंद तक बल्लेबाजी की। उन्होंने गेंदबाजों के प्रदर्शन की तारीफ की, लेकिन बल्लेबाजों को अधिक जिम्मेदारी से खेलने की जरूरत बताई।
बांग्लादेश के सलामी बल्लेबाज तंजीद हसन तमीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे सीरीज हारने के बाद स्वीकार किया कि टीम के बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने और अंत तक टिके रहने में नाकाम रहे, जो हार की सबसे बड़ी वजह बनी। हरारे में खेले गए दूसरे वनडे में जिम्बाब्वे ने 13 रन से जीत दर्ज कर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली।
दूसरे वनडे में जिम्बाब्वे की जीत के सबसे बड़े नायक बेन करन रहे। बाएं हाथ के इस सलामी बल्लेबाज ने नाबाद 111 रन की शानदार पारी खेली और अपनी टीम को 50 ओवर में 246 रन पर 6 विकेट के प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचाया। करन ने शुरुआत से संयमित बल्लेबाजी की और अंत तक क्रीज पर टिके रहे। यही वह पहलू था, जिसने मैच का रुख तय कर दिया।
बांग्लादेश ने लक्ष्य का पीछा करते हुए शुरुआत में संघर्ष किया, लेकिन तंजीद हसन और तौहीद हृदॉय की साझेदारी ने टीम को मुकाबले में वापस ला दिया। तंजीद ने 57 और हृदॉय ने 60 रन बनाए। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 84 रन जोड़े और ऐसा लगने लगा कि बांग्लादेश सीरीज बराबर कर सकता है।
मैच के बाद तंजीद ने माना कि वह और हृदॉय दोनों अच्छी तरह सेट हो चुके थे। उनके अनुसार टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी और दोनों में से किसी एक को आखिरी गेंद तक बल्लेबाजी करनी चाहिए थी। लेकिन अर्धशतक के बाद दोनों के आउट हो जाने से मैच हाथ से निकल गया।
तंजीद ने बेन करन की पारी को दोनों टीमों के बीच सबसे बड़ा अंतर बताया। उन्होंने कहा कि करन ने अपनी पारी अंत तक जारी रखी, जबकि बांग्लादेश के बल्लेबाज ऐसा नहीं कर सके। यही कारण रहा कि जिम्बाब्वे लक्ष्य का सफलतापूर्वक बचाव करने में सफल रहा।
उन्होंने बांग्लादेश के गेंदबाजों के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि गेंदबाजों ने वास्तव में अच्छा काम किया। उनके अनुसार हार का कारण बल्लेबाजों का अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाना था। तंजीद ने यह भी याद दिलाया कि टीम पहले वनडे में 142 रन का लक्ष्य हासिल करने में विफल रही थी।
सीरीज के पहले मुकाबले में जिम्बाब्वे ने 25 रन से जीत दर्ज की थी। उस मैच में भी बांग्लादेश की बल्लेबाजी दबाव में बिखर गई थी। दूसरे वनडे में बल्लेबाजों ने बेहतर शुरुआत की, लेकिन निर्णायक समय पर विकेट गंवा दिए। दोनों मैचों में सेट बल्लेबाज बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर पाए।
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तंजीद ने कहा कि बल्लेबाजों को अधिक जिम्मेदारी से खेलने की जरूरत है। उनके अनुसार जिम्बाब्वे ने बांग्लादेश से बेहतर क्रिकेट खेला और इसी वजह से सीरीज अपने नाम करने में सफल रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि टीम ने समग्र रूप से अच्छा क्रिकेट नहीं खेला।
दूसरे वनडे के अंतिम चरण में खराब रोशनी को लेकर भी चर्चा हुई। कुछ समय के लिए यह सवाल उठा कि क्या खेल जारी रहना चाहिए था, लेकिन तंजीद ने इस मुद्दे पर कोई विवाद खड़ा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट उस रोशनी में जारी रहना चाहिए था या नहीं, यह फैसला अंपायरों का होता है और इस पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।
जिम्बाब्वे के लिए यह सीरीज जीत विशेष महत्व रखती है क्योंकि टीम ने लगातार दो करीबी मुकाबलों में दबाव को बेहतर तरीके से संभाला। पहले मैच में 25 रन और दूसरे में 13 रन से जीत यह दिखाती है कि मेजबान टीम निर्णायक क्षणों में अधिक प्रभावी रही।
बांग्लादेश के लिए इस हार से कई सवाल खड़े हुए हैं। टीम के शीर्ष क्रम को अच्छी शुरुआत मिल रही है, लेकिन उसे बड़े स्कोर में बदलने में लगातार दिक्कत हो रही है। वनडे क्रिकेट में अक्सर वही टीम जीतती है, जिसका कोई बल्लेबाज अंत तक टिककर मैच खत्म करता है। हरारे में बेन करन ने यही भूमिका निभाई।
तंजीद और हृदॉय की साझेदारी ने उम्मीद जगाई थी, लेकिन दोनों के आउट होने के बाद बांग्लादेश का मध्यक्रम दबाव नहीं झेल सका। इस वजह से टीम लक्ष्य से पीछे रह गई और सीरीज भी गंवा बैठी।
अब बांग्लादेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी बल्लेबाजी इकाई को अधिक स्थिर बनाना होगी। टीम को ऐसे बल्लेबाजों की जरूरत होगी जो सेट होने के बाद लंबी पारी खेल सकें और मैच को अंत तक ले जाएं। हरारे की हार ने साफ कर दिया कि अच्छी शुरुआत और अर्धशतक पर्याप्त नहीं होते; जीत के लिए किसी एक बल्लेबाज का अंत तक क्रीज पर बने रहना उतना ही जरूरी होता है। यही वह पहलू था, जिसमें बेन करन जिम्बाब्वे को बढ़त दिलाने में सफल रहे और बांग्लादेश पीछे रह गया।
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