राजस्थान में करीब 19.87 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने Amazon के नाम पर फ्री गिफ्ट और खास ऑफर का लालच देकर लोगों के घर और ऑफिस में चाय व स्नैक्स भेजे। इसके साथ दिए गए नकली QR कोड को स्कैन कराने के बाद लोगों के खातों से पैसे निकाल लिए गए। पुलिस ने जांच के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और लोगों से अनजान QR कोड या पेमेंट लिंक पर भरोसा न करने की अपील की है।
राजस्थान में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें करीब 19.87 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। आरोपियों ने Amazon के नाम पर लोगों को फ्री गिफ्ट और खास ऑफर का लालच दिया। इसके बाद चाय और स्नैक्स भेजकर नकली QR कोड स्कैन कराया और लोगों के बैंक खातों से पैसे निकाल लिए। पुलिस ने जांच के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
राजस्थान में साइबर ठगी का एक अलग तरीका सामने आया है। इस मामले में ठगों ने लोगों का भरोसा जीतने के लिए चाय और स्नैक्स का सहारा लिया। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने Amazon के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को फ्री गिफ्ट और खास ऑफर मिलने की बात कही। इसके बाद लोगों को एक छोटा पेमेंट करने या QR कोड स्कैन करने के लिए कहा गया। इसी बहाने करीब 19.87 लाख रुपये की ठगी की गई।
साइबर क्राइम से जुड़े इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। साइबर सेल की मदद से बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल फोन और इंटरनेट से जुड़ी जानकारी की जांच की गई। इसके आधार पर चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। शुरुआती जांच में पता चला कि यह गिरोह लंबे समय से लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाने की कोशिश कर रहा था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले लोगों से फोन पर संपर्क करते थे। वे खुद को Amazon या उससे जुड़े कस्टमर सपोर्ट और डिलीवरी टीम का सदस्य बताते थे। इसके बाद लोगों से कहा जाता था कि उन्हें कंपनी की ओर से फ्री गिफ्ट, इनाम या खास ऑफर मिला है। ऑफर लेने के लिए सिर्फ एक छोटी सी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
ठगों की सबसे अलग चाल यही थी कि वे लोगों के घर या ऑफिस में चाय या हल्का नाश्ता भी भेजते थे। इसके साथ एक रसीद या QR कोड दिया जाता था। कई लोगों को लगा कि यह किसी कंपनी की ओर से भेजा गया स्वागत या प्रचार का हिस्सा है। इसी भरोसे में उन्होंने QR कोड स्कैन कर दिया।
जैसे ही QR कोड स्कैन किया गया, लोगों को एक छोटा पेमेंट करने के लिए कहा गया। कई मामलों में यह रकम सिर्फ 10 रुपये या उससे थोड़ी ज्यादा बताई गई। लोगों को लगा कि यह केवल पहचान की जांच या ऑफर शुरू करने की प्रक्रिया है। लेकिन इसी दौरान ठगों ने बैंक खाते से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली और बाद में बड़ी रकम निकाल ली।
जांच में सामने आया कि इस तरीके से कई लोगों को निशाना बनाया गया। अलग-अलग खातों से पैसे निकालकर कुल करीब 19.87 लाख रुपये की ठगी की गई। पुलिस का कहना है कि आरोपी अलग-अलग राज्यों में भी इसी तरह का नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रहे थे। इसके लिए छोटे दुकानदारों, डिलीवरी करने वाले लोगों और दूसरे माध्यमों का इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई थी।
साइबर सेल ने बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, इंटरनेट इस्तेमाल की जानकारी और दूसरे तकनीकी सबूतों की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई। इसके बाद चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और क्या उन्होंने दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है।
यह मामला बताता है कि साइबर ठगी का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले ऐसे मामलों में सिर्फ फोन कॉल, ई-मेल या फर्जी मैसेज का इस्तेमाल होता था। अब ठग लोगों का भरोसा जीतने के लिए नई-नई तरकीबें अपना रहे हैं। चाय, गिफ्ट, फ्री सैंपल या छोटे ऑफर जैसी चीजों का इस्तेमाल भी अब ठगी का हिस्सा बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कंपनी के नाम पर मिलने वाले फ्री ऑफर पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति QR कोड स्कैन करने, पेमेंट लिंक खोलने या छोटी रकम भेजने के लिए कहता है, तो पहले उसकी पूरी जांच कर लेनी चाहिए। केवल इसलिए किसी लिंक पर भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि उसमें किसी बड़े ब्रांड का नाम लिखा है।
अगर कोई व्यक्ति आपके घर या ऑफिस में कोई सामान, गिफ्ट, चाय या स्नैक्स भेजता है और उसके साथ QR कोड स्कैन करने के लिए कहता है, तो पहले यह पता करें कि वह किसकी ओर से आया है। अगर जानकारी साफ नहीं मिले, तो कोई भी भुगतान न करें। जरूरत पड़ने पर संबंधित कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर से संपर्क करें।
साइबर अपराध से बचने के लिए कुछ आसान बातों का ध्यान रखना जरूरी है। किसी भी अनजान QR कोड को स्कैन न करें। बिना जांचे किसी लिंक पर क्लिक न करें। बैंक की जानकारी, OTP, UPI PIN या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। अगर किसी तरह की ठगी का शक हो, तो तुरंत बैंक को जानकारी दें और साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
राजस्थान में सामने आया यह मामला लोगों के लिए एक जरूरी सीख भी है। आज के समय में ठग केवल ऑनलाइन नहीं, बल्कि ऑफलाइन तरीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए किसी भी ऑफर, गिफ्ट या छोटी पेमेंट की मांग को हल्के में लेने की बजाय पहले उसकी सच्चाई की जांच करना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
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