NOAA के अनुसार, एल नीनो 1950 के बाद सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक बन सकता है, जिससे भारत में सामान्य से कम मानसून, भीषण गर्मी और कृषि पर असर पड़ने की आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका प्रभाव 2027 की शुरुआत तक जारी रह सकता है और इससे दुनिया के कई हिस्सों में चरम मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
प्रशांत महासागर में सक्रिय एल नीनो (El Niño) इस साल तेजी से मजबूत हो रहा है। अमेरिका की नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच इसके 1950 के बाद के सबसे शक्तिशाली एल नीनो घटनाओं में शामिल होने की 81 प्रतिशत संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ेगा और भारत में भी मानसून, तापमान तथा कृषि पर बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
क्या होता है एल नीनो? एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के समुद्री जल के सामान्य से अधिक गर्म होने पर बनती है। यह ENSO (El Niño Southern Oscillation) चक्र का हिस्सा है। एल नीनो और ला नीना दुनिया भर के मौसम को प्रभावित करते हैं और कई क्षेत्रों में सूखा, बाढ़, हीटवेव और अत्यधिक बारिश जैसी परिस्थितियां पैदा कर सकते हैं।
इस बार क्यों है ज्यादा चिंता? NOAA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, Niño 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। यह अभी मध्यम श्रेणी का एल नीनो है, लेकिन आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वर्ष के अंत तक यह बहुत मजबूत स्तर तक पहुंच सकता है।
भारत पर क्या होगा असर? भारत में एल नीनो का सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ता है। आमतौर पर इसके दौरान देश में सामान्य से कम बारिश होती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि एल नीनो वाले लगभग 60 प्रतिशत वर्षों में मानसून सामान्य से कम या कमजोर रहा है। इस वर्ष भी जून में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े तक भी देश के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। हालांकि राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर आंतरिक कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में सामान्य वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
कृषि और जल संकट बढ़ने की आशंका यदि मानसून कमजोर रहता है तो इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा। धान, मक्का, दालें और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा जलाशयों में पानी कम भरने से पेयजल संकट और बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
2027 हो सकता है सबसे गर्म वर्षों में शामिल जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि मजबूत एल नीनो और पहले से बढ़ रहे वैश्विक तापमान के कारण 2027 दुनिया के सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो सकता है। इससे हीटवेव, जंगलों में आग, सूखा और अचानक होने वाली भारी बारिश जैसी चरम मौसम घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
कब तक रहेगा एल नीनो? NOAA के अनुसार, वर्तमान एल नीनो जून 2026 में शुरू हुआ था और इसके 2027 की शुरुआत तक बने रहने की 97 प्रतिशत संभावना है। यानी आने वाले कई महीनों तक दुनिया के मौसम पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष एल नीनो के लगातार मजबूत होने से भारत समेत दुनिया के कई देशों में मौसम की स्थिति बदल सकती है। भारत में कमजोर मानसून, बढ़ती गर्मी और कृषि पर असर की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना और जल संरक्षण जैसे उपाय अपनाना आने वाले समय में बेहद महत्वपूर्ण होगा।
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