फिल्म ‘नायक’ में दमदार मुख्यमंत्री का किरदार निभाने के बाद अनिल कपूर को राजनीति में आने के संकेत और प्रस्ताव मिले थे। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि वे राजनीति के लिए खुद को उपयुक्त नहीं मानते। उनका कहना है कि वे जो भी काम करते हैं, पूरी ईमानदारी और सौ प्रतिशत समर्पण के साथ करते हैं, और राजनीति आधे मन से नहीं की जा सकती। इसलिए उन्होंने सभी प्रस्ताव ठुकरा दिए और अपने अभिनय करियर पर ही ध्यान केंद्रित रखा।
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनिल कपूर सालों से अपनी एक्टिंग और फिटनेस के लिए चर्चा में रहते हैं। 80 के दशक से लेकर आज तक उन्होंने कई यादगार किरदार निभाए हैं। लेकिन साल 2001 में आई फिल्म ‘नायक’ ने उनके करियर में एक अलग ही पहचान बना दी।
इस फिल्म में अनिल कपूर ने एक पत्रकार का किरदार निभाया, जो हालात के चलते एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनता है। उस एक दिन में वह ऐसे फैसले लेते हैं कि जनता का दिल जीत लेते हैं। उनका यह दमदार रोल दर्शकों को इतना पसंद आया कि फिल्म के बाद असल जिंदगी में भी उन्हें राजनीति में आने के संकेत मिलने लगे।
हाल ही में एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान अनिल कपूर ने खुलासा किया कि ‘नायक’ के बाद कुछ राजनीतिक पार्टियों की तरफ से उन्हें इशारे मिलने लगे थे। हालांकि उन्होंने साफ किया कि ऐसे ऑफर सीधे नहीं आते, बल्कि किसी माध्यम से बात आगे बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि थोड़ी बहुत चर्चा जरूर हुई थी, लेकिन उन्होंने वहीं बात खत्म कर दी। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि किस पार्टी या किस व्यक्ति की तरफ से प्रस्ताव आया था।
🤔 “मेरे अंदर वो बात नहीं है…” अनिल कपूर का कहना है कि अगर वे कोई काम करते हैं तो पूरी ईमानदारी और सौ प्रतिशत समर्पण के साथ करते हैं। उनका मानना है कि राजनीति आधे मन से करने वाली चीज नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके अंदर वह प्रतिबद्धता नहीं है कि वे राजनीति को उतनी गंभीरता से निभा सकें, जितनी जरूरत होती है। उनका मानना है कि अगर वे किसी जिम्मेदारी को लें, तो उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाना चाहिए।
अनिल कपूर ने यह भी बताया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से भी ब्रांड एंबेसडर बनने के प्रस्ताव मिले थे। लेकिन उन्होंने कई बार इनकार किया, क्योंकि वे सिर्फ फोटो खिंचवाने या नाम जोड़ने के लिए किसी पहल से नहीं जुड़ना चाहते।
उनका कहना है कि अगर कोई सामाजिक या सार्वजनिक काम करना है तो दिल से करना चाहिए, सिर्फ दिखावे के लिए नहीं। इस समय उनकी प्राथमिकताएं अभिनय और अपने काम पर केंद्रित हैं।
🎥 सिनेमा ही पहली पसंद अनिल कपूर के इस बयान से साफ है कि वे राजनीति में कदम रखने के बजाय अपने अभिनय करियर पर ही ध्यान देना चाहते हैं। ‘नायक’ में भले ही वे एक दिन के मुख्यमंत्री बने हों, लेकिन असल जिंदगी में उन्होंने पर्दे की दुनिया को ही अपनी असली पहचान माना है। उनकी सोच यह दिखाती है कि हर लोकप्रिय अभिनेता का राजनीति में जाना जरूरी नहीं, और अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा से काम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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