सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल है कि अमेरिका में जन्म-सिद्ध नागरिकता समाप्त कर दी गई है और अब वहां जन्म लेने मात्र से नागरिकता नहीं मिलेगी। उपलब्ध न्यायिक जानकारी और रिपोर्टों की जांच में यह दावा गलत पाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद भी अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत जन्म-सिद्ध नागरिकता की व्यवस्था बरकरार है।
"सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक दावा तेजी से साझा किया जा रहा है कि अमेरिका में जन्म-सिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) खत्म कर दी गई है और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पहल के बाद अब वहां जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः नागरिकता नहीं मिलेगी। यह दावा लोगों के बीच भ्रम पैदा कर रहा है। उपलब्ध आधिकारिक न्यायिक जानकारी और विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों की पड़ताल से स्पष्ट होता है कि यह दावा सही नहीं है।
फैक्ट-चेक में सामने आया है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को लेकर कई पोस्ट भ्रामक तरीके से पेश की गई हैं। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में यह संदेश दिया गया कि अदालत ने जन्म-सिद्ध नागरिकता की व्यवस्था समाप्त करने की मंजूरी दे दी है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है।
Democracy Now! की 1 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के फैसले में ट्रम्प प्रशासन की उस कोशिश को स्वीकार नहीं किया, जिसमें यह तर्क दिया गया था कि बिना वैध आव्रजन दस्तावेज या स्थायी कानूनी दर्जा रखने वाले माता-पिता से अमेरिका में जन्मे बच्चों को संविधान के तहत नागरिकता का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत जन्म-सिद्ध नागरिकता की व्यवस्था बनी हुई है। इसका अर्थ है कि मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार अमेरिका में जन्म लेने वाला बच्चा नागरिकता पाने का अधिकार रखता है। वायरल पोस्ट में किया गया यह दावा कि यह अधिकार समाप्त कर दिया गया है, उपलब्ध तथ्यों से मेल नहीं खाता।
अमेरिका के संविधान का 14वां संशोधन लंबे समय से जन्म-सिद्ध नागरिकता का आधार माना जाता है। इसी संवैधानिक प्रावधान के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों को नागरिकता मिलती है। हालिया फैसले के बाद भी इस व्यवस्था में कोई ऐसा परिवर्तन सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि जन्म-सिद्ध नागरिकता खत्म हो गई है।
सोशल मीडिया पर फैल रही कई पोस्ट में अदालत के फैसले की अधूरी या गलत व्याख्या की गई। कुछ पोस्ट में यह संकेत दिया गया कि ट्रम्प की नीति पूरी तरह लागू हो गई है, जबकि उपलब्ध न्यायिक जानकारी ऐसा नहीं बताती। अदालत के फैसले और वायरल दावे के बीच यही सबसे बड़ा अंतर है।
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Democracy Now! की वीडियो हेडलाइन और प्रकाशित रिपोर्ट दोनों में यह बताया गया है कि ट्रम्प प्रशासन की ओर से जन्म-सिद्ध नागरिकता को सीमित करने की कोशिश अदालत में टिक नहीं सकी। इसलिए यह कहना कि अमेरिका में अब जन्म लेने भर से नागरिकता नहीं मिलेगी, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
ऐसे मामलों में केवल सोशल मीडिया पोस्ट या फॉरवर्ड संदेशों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। संवैधानिक और कानूनी विषयों में अदालत के आधिकारिक फैसलों तथा विश्वसनीय समाचार स्रोतों की जानकारी अधिक भरोसेमंद मानी जाती है। खासकर उन लोगों के लिए जो अमेरिका में पढ़ाई, नौकरी या प्रवास की योजना बना रहे हैं, सही कानूनी जानकारी महत्वपूर्ण होती है।
फैक्ट-चेक निष्कर्ष: वायरल दावा कि अमेरिका में जन्म-सिद्ध नागरिकता समाप्त कर दी गई है, गलत है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्म-सिद्ध नागरिकता को समाप्त नहीं किया है। अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत यह व्यवस्था अभी भी लागू है और हालिया फैसले के बाद भी इसमें ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ है जिससे वायरल दावा सही साबित हो।
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